करोड़ो के अस्पताल की सुरक्षा पेड़ काटकर कर रहे सीएस
मरीजों के परिजन सुलभ कॉम्लेक्स जाने से हो रहे वंचित, आयुर्वेद हास्पीटल में 25 से 15 पर पहुंची ओपीडी

✓करोड़ो के अस्पताल की सुरक्षा पेड़ काटकर कर रहे सीएस
✓कलेक्टर का आदेश बताकर की जा रही मनमानी
✓मरीजों के परिजन सुलभ कॉम्लेक्स जाने से हो रहे वंचित, आयुर्वेद हास्पीटल में 25 से 15 पर पहुंची ओपीडी
✓गणपति के पंडाल को सडक़ के किनारे पहुंंचाया, सुरक्षा पर सवाल
परिधि न्यूज बैतूल

जिला अस्पताल में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के बार-बार औचक निरीक्षण के बाद सिविल सर्जन को अंदरूनी व्यवस्थाओं में कसावट लानी चाहिए लेकिन इसके विपरीत सीएस साहब बाहरी मार्गों की चाक चौबंद व्यवस्थाओं पर ध्यान देने में मशगूल है। शनिवार को सीएस द्वारा कलेक्टर का आदेश बताकर अस्पताल तक पहुंचने वाले मार्गों को हरे-भरे पेड़ कटवाकर बंद कर दिया। करोड़ों के अस्पताल भवन तक पहुंचने वाले मार्गों को अचानक पेविंग ब्लाक एवं पेड़ों की टहनियों से बंद करने पर सवाल उठने लगे है साथ ही इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे है। एक तो अस्पताल परिसर में बने सुलभ कॉम्पलेक्स का लाभ मरीजों के परिजनों को नहीं मिल पा रहा वहीं आयुर्वेद हास्पीटल में ओपीडी भी आधी रह गई है। अचानक सीएस ने यह व्यवस्था क्यों बनाई इस पर कुछ जागरुक लोगों के सवाल पर कुछ पेविंग ब्लॉक हटा दिए गए तो किसी को कलेक्टर के आदेश का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया गया।
सुलभ कॉम्लेक्स पहुंचना हुआ दूभर


अस्तपाल परिसर में सुलभ कॉॅम्पलेक्स बनाया ही इस उद्देश्य है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को भटकना न पड़े लेकिन शनिवार को अस्तपाल से सुलभ कॉम्पलेक्स तक पहुंचने वाले मार्ग को भी बंद कर दिया जिससे मरीजों के परिजनों को काम्लेक्स तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
गणपति के पंडाल भी सडक़ पर

जिला अस्पताल परिसर में वर्षों से अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा गणपति स्थापना पंचमुखी हनुमान मंदिर के सामने की जाती है। गणपति पंडाल के ठीक पीछे सिविल सर्जन द्वारा पेविंग ब्लॉक एवं पेड़ों को कटवाकर रास्ता बंद करवा दिया है। जिसकी वजह से अब रात के समय पंडाल के आसपास कोई नहीं रह पाता। ऐसे में यदि प्रतिमा को कोई असमााजिक तत्व या जानवर नुकसान पहुंचाते है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। आस्था के साथ किए जा रहे खिलवाड़ श्रद्धालुओं में भी नाराजगी है।
आयुर्वेद हास्पीटल में ओपीडी कम
अस्पताल परिसर में संचालित आयुर्वेद हास्पीटल में प्रतिदिन जहां 25 से 30 ओपीडी रहती थी वह शनिवार के बाद 10 से 15 हो गई है। दरअसल अस्पताल तक पहुंचने वाले दो रास्ते सुलभ काम्पलेक्स के सामने एवं अम्बेडकर चौक के सामने डॉक्टर्स के पुराने क्वार्टर के पास को भी झाडिय़ों से ही बंद कर दिया है। जिसकी वजह से ओपीडी संख्या में भी कमी आई है।
एक ही गेट से आवागमन

सीएस साहब की नई व्यवस्थाओं की वजह से अब अस्तपाल में आवागमन एक ही मार्ग से हो रहा है। पैदल, मोटरसाईकिल, चौपहिया वाहनों से आने जाने वाले मरीज एवं एम्बुलेंस भी मेन गेट से आना-जाना कर रही है। अक्सर एम्बुलेंस से मरीजों को हास्पीटल लाते वक्त हड़बड़ी रहती है। मेन गेट पर भीड़ होने से असुविधा भी होती है। शनिवार से पहले बाकी रास्ते खुले होने से एक रास्ते से जाकर एम्बुलेंस पार्किंग में खड़ी कर दी जाती थी, लेकिन अब आना-जाना एक ही गेट से होने से अव्यवस्थाएं बढ़ गई है।
रास्तें बंद ही करना है तो पेड़ की डालियों से क्यों?

जहां एक ओर पर्यावरण सुरक्षा एवं मां के नाम से पौधे लगाने के लिए अभियान चलाए जा रहे है वहीं जिला अस्पताल में हरे भरे पेड़ों को काटकर रास्ते बंद किए जा रहे है। अस्तपाल में किसी किसी रास्ते को बंद करने के लिए क्या आधिकारिक तौर पर बैठक लेकर निर्णय लिए गए है या मनमर्जी से रास्ते बंद कर दिए गए। इस मामले में जांच की मांग जागरुक नागरिकों ने कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी से की है।