चारों हाथों में लड्डू: पति-पत्नी पर मेहरबान जिले का ट्राईबल विभाग
✓पत्नी संभाल रही 400 सीटर तो पति के जिम्में 50 छात्रों की जिम्मेदारी
परिधि ग्राउंड रिपोर्ट- 5

जिले में आदिम जाति कार्य विभाग के कारनामों की कलई एक के बाद एक सामने आ रही है। जिले में विभाग के अंतर्गत करीब 135 छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। यदि छात्रावासों की खामिया गिनाई जाए तो वरिष्ठ महकमा भी कटघरे में नजर आएगा। आदिम जाति कार्य विभाग की मेहरबानी एक ही परिवार में देखने मिली है। यहां पति और पत्नी दोनों को विभाग ने छात्रावास अधीक्षक बनाकर दो हाथों में लड्डू की कहावत को बदलकर चारों हाथों में लड्डू पकड़ा दिए है। आदिवासी दूरस्थ अंचलों के छात्रावासों के साथ-साथ जिला मुख्यालस के भी मलाईदार छात्रावासों पर विभागीय जिम्मेदार मेहरबान नजर आ रहे है। यहां पत्नी को 400 सीटर आदिवासी छात्रावास का तो पति को 50 सीटर बालक छात्रावास का अधीक्षक नियुक्त किया गया है।

17 किमी दूर से शिक्षिका को किया जिला मुख्यालय पर प्रभार
जिला मुख्यालय के सदर क्षेत्र में आदिम जाति कार्य विभाग का आदिवास कन्या शिक्षा परिसर संचालित है। 400 सीटर छात्रावास का कुछ महीनों पहले ही आमढाना में पदस्थ शिक्षिका ललिता राक्से को प्रभारी अधीक्षक नियुक्त किया गया है। पूर्व अधीक्षक द्वारा बालिकाओं के साथ की जाने वाली अभद्रता, भोजन एवं अन्य सुविधाओं को देने में लापरवाही को विरोध में खुद बालिकाएं विरोध करने कलेक्ट्रेट पहुंची थी। जिसकी वजह से तत्कालीन अधीक्षिका को निलंबित कर दिया गया था। गौरतलब है कि इसी परिसर में स्कूल भी संचालित है जहां कई पात्र शिक्षकाएं है जिनमें से पात्र शिक्षिका को कन्या शिक्षा परिसर का अधीक्षक बनाया जा सकता था, लेकिन 17 किमी दूर से एक शिक्षिका को बैतूल के आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर में अटैच किया गया है। आमढाना की शिक्षिका ललिता राक्से को बैतूल में अधीक्षक बनाए जाने पर भी सवाल उठ रहे है।
अधीक्षक पति का ध्यान अपने छात्रावास पर कम पत्नी के छात्रावास पर ज्यादा
गौरतलब है कि आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर की अधीक्षक ललिता राक्से के पति कमलेश राक्से भी हमलापुर में आदिवासी बालक छात्रावास के अधीक्षक है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अपने छात्रावास के संचालन से ज्यादा ध्यान और समय वह कन्या शिक्षा परिसर पर देते है। उनका ज्यादा समय भी पत्नी के छात्रावास में बीतता रहा है। जानकारी के अनुसार छात्रावास की गतिविधियों से लेकर तमाम व्यवस्थाएं बनाने में जितना दखल शिक्षा परिसर की प्रभारी अधीक्षक का नहीं है, उससे कहीं ज्यादा दखल उनके पति रखते है। सवाल यह भी है कि आदिम जाति कार्य विभाग के जिम्मेदारों को आखिर पति-पत्नी की इस जोड़ी का नाम सुझाया किसने?
इधर पुरानी अधीक्षिक वापसी के लिए लगा रही जोर
सूत्र बताते है कि कन्या शिक्षा परिसर की पूर्व अधीक्षक ज्योति विजयकर को छात्राओं के विरोध के बाद निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ी थी, लेकिन वे फिर से इसी छात्रावास में वापसी की जुगत लगा रही है। उनके द्वारा फिर से वापसी की सुगबुगाहट मात्र से अंदरूनी विरोध भी परिलक्षित हो रहा है। पूर्व में बालिकाओं को आक्रोश को देखते हुए जागरुक लोगों का कहना है कि जो बच्चों को सुरक्षित माहौल और पेट भर भोजन भी न करा सके ऐसी शिक्षिका के निलंबन के बाद पुन: उसी पद पर बहाली नहीं होनी चाहिए। बहरहाल यह जांच का विषय है कि जब 50 से 150 सीटर छात्रावासों में पदस्थापना के लिए 1 से 2 पेटी का चढ़ावा चढ़ता है तो, 400 सीटर छात्रावास में पदस्थापना या प्रभार के लिए अधीक्षक को कितना चढ़ावा चढ़ाना होता होगा?
कलेक्टर के निर्देश- छात्रावासों में नियमित उपस्थित रहें अधीक्षक


कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बुधवार 29 अप्रैल को आयोजित जनजातीय कार्य विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति एवं आवास सहायता योजना के तहत एमपी टॉस पोर्टल पर शत-प्रतिशत वेरिफिकेशन एवं स्वीकृति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र छात्र योजना के लाभ से वंचित न रहे, इसके लिए शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। कलेक्टर डॉ सोनवणे ने छात्रावास एवं आश्रमों की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि अधीक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहें। छात्रावासों में साफ-सफाई, भोजन मेनू एवं भोजन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण की समीक्षा के लिए सभी छात्रों की आभा आईडी तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के ऑनलाइन आवेदन एमपी टॉस पोर्टल पर किए जाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया। गौरतलब है कि कलेक्टर डॉ सोनवणे ने अधीक्षकों को छात्रावासों में नियमित उपस्थित रहने निर्देशित किया है, ऐसे में वे आधा दर्जन अधीक्षक जिनके पास दो छात्रावासों का प्रभार है वे किस तरह एक समय में दो छात्रावासों में मौजूद रहेंगे यह भी बड़ा सवाल है।
इनका कहना…
बैतूल ट्राइबल ब्लॉक नहीं है, इसलिए कहीं बाहर से अधीक्षक लाना पड़ेगा। पति पत्नी अलग -अलग एम्पलाई है, इसलिए अधीक्षक बनाया जा सकता है।
विवेक कुमार पाण्डेय,
एसी आदिम जाति कार्य विभाग बैतूल