पेयजल संकट की विभीषिका:दो किलोमीटर पहाड़ी चढ़कर पीने का पानी जुटाते तोगाढाना के आदिवासी

✓पेयजल संकट की विभीषिका:दो किलोमीटर पहाड़ी चढ़कर पीने का पानी जुटाते तोगाढाना के आदिवासी
मनोहर अग्रवाल, परिधि न्यूज खेड़ीसावलीगढ़

आजादी के वषों बाद भी कई आदिवासी गावों की तकदीर और तस्वीर बदल नही पाई नतीजतन वे आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जूझ है।सरकार के प्रयास है की प्रत्येक घरों तक नल से शुद्ध पानी पहुंचे लेकिन लाचार व्यस्था उनकी इस व्यस्था को मुंह चिढ़ा रही है विकासखंड भीमपुर की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत चुनालोमा के ताप्ती नदी किनारे दो किलोमीटर पहाड़ी पर बसे लगभग एक हजार की आबादी वाले ग्राम तोगाढाना की।

गांव गांव के आदिवासी बीते एक माह से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे है गांव में पीने के पानी के लिए हेडपंप लगे है सभी बंद पड़े है।नलजल योजना का बोरवेल भी पी एच ई विभाग की अनदेखी से बंद है ग्राम पंचायत भी इस समस्या से अनजान नही है फिर भी लोग इस अव्यस्था से पानी जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है ग्रामीण जयराम तंडीलकार राजेंद्र तड़ीलकर, रमिया बाई बताते है वे गांव से प्रतिदिन दो किलोमीटर दूर ताप्ती नदी से पानी लेकर आते है ऐसा वक्त गांव में पहली बार आया है जब पानी के लिए उन्हे ताप्ती मैया की शरण में जाना पड़ रहा है।

इस गांव में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नही पहुंचते जब चुनाव आता है तो सभी प्रचार करने आते है और चले जाते है पर पीने के पानी की स्थाई व्यस्था नही करते ग्रामीण बेहद नाराज है की वे आने वाले चुनाव में वोट नही देगे जब कोई समस्या का हल नही हो रहा तो वह कैसे मतदान करेंगे।