गोल्डन शावर से सज गए है ताप्ती के जंगल, बिखरी सुंदरता

✓गोल्डन शावर से सज गए है ताप्ती के जंगल, बिखरी सुंदरता
मनोहर अग्रवाल खेड़ीसावलीगढ़
गर्मी के दिनों में जब जंगलों में ज्यादातर पेड़ पौधे मुरझा जाते है और पेड़ पत्तियां तक छोड़ देते है, ऐसे मौसम में अमलतास का पेड़ पूरे यौवन पर होता है। इसके आकर्षक पीले शानदार फूलो से लदे झुमरो की वजह से अंग्रेज इसका नाम गोल्डन शावर नाम रखकर चले गए है।इसकी खास बात तो यह है की यह मई के महीने से जुलाई तक ही फूलते है। अमलतास के पेड़ फूलो और फलों का औषधीय रूप में उपयोग किया जाता है। जानकार इसे एंटीडायबिटीज के रूप में देखते है तथा इस पेड़ की छाल को दवाई के रूप में उपयोग लिया जाता है। आदिवासी भाई इन प्राकृतिक रूप से जंगल में पीले रंग के झुमरो से लद रहे पेड़ो से झूमर तोड़कर ले जाते है और विवाह के मंडप में लटकाते है। ताप्ती घाट से केरपानी घाट में भी यह अमलतास का पेड़ सुंदरता बिखेर रहा है। लोग सड़क चलते दुपहिया वाहनों से उतर कर इसकी सुंदरता आकर्षित होकर पेड़ के नीचे सेल्फी भी लेने लालायित नजर आते है।