नब्ज पकड़ी, मर्ज समझा फिर शुरु किया ईलाज… कलेक्टर की पहल पर जर्जर स्कूलों को संजीवनी देने उठे हजारों हाथ
नब्ज पकड़ी, मर्ज समझा फिर शुरु किया ईलाज…
कलेक्टर की पहल पर जर्जर स्कूलों को संजीवनी देने उठे हजारों हाथ
गौरी बालापुरे पदम / परिधि न्यूज, बैतूल

जिले के इतिहास में संभवत: डॉ सौरभ संजय सोनवणे पहले ऐसे कलेक्टर है जिन्होंने बैतूल पदस्थापना के बाद अकेले भीमपुर विकासखंड में लगभग 20 से 25 बार पहुंच चुके है। जिले में आमद देने के साथ ही उन्होंने जमीनी स्तर पर यहां की शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का स्वयं निरीक्षण किया। आम तौर पर शुक्रवार के दिन अपने मैदानी दौरे में कलेक्टर जिस भी क्षेत्र में पहुंचते है वहां के छात्रावास, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केन्द्र पर जरुर पहुंचते है। 12 अप्रैल को बैतूल की कमान संभालने और चार महीने तक जिले की नब्ज टटोलने के बाद स्कूलों का मर्ज समझने के बाद संजीवनी की आवश्यकता को महसूस किया गया और डॉक्टर कलेक्टर ने सरकारी स्कूलों की दशा को बदलने के लिए शिक्षा संजीवनी के माध्यम से कदम बढ़ाए। कलेक्टर के इस नवाचार को साथ मिला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, केन्द्रीय राज्य मंत्री डीडी उईके सहित अन्य सभी जनप्रतिनिधियों का और 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर आधिकारिक रुप से शिक्षा संजीवनी अभियान की शुरुआत हुई। स्कूलों की अधोसंरचना से लेकर मूलभूत जरुरतों को जनभागीदारी से दूर करने से पहले पंचायत स्तर पर भवन-शौचालय एवं अन्य मरम्मत कार्य कराएं गए। 11 अगस्त से लेकर सिंतबर 25 तक जिले में करीब एक हजार लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई है। जनप्रतिनिधि,आधिकारी, शिक्षक, सेवा निवृत्त शिक्षक, कर्मचारी, बैंक, व्यापारी, संगठन, फाउंडेशन, कंपनी सहित विभिन्न सेवाभावियों ने स्कूलों में डेस्क-बैंच, पंखे-कूलर, पानी की टंकी, मरम्मत, कक्ष निर्माण, शैक्षणिक सामग्री, अलमारी, लाईट, सहित अन्य जरुरत के हिसाब से सामग्री मुहैया कराई। सीएसआर के तहत निर्माण एवं अन्य कार्य किए जा रहे है। जामठी पंचायत के स्कूल में एक संगठन द्वारा लाखों रुपए का सहयोग करते हुए पांच कक्षों एवं बाउंड्रीवाल का निर्माण भी कराया। यह कलेक्टर डॉ संजय सोनवणे की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि वर्तमान में चिन्हित 227 स्कूलों में से 50 से अधिक स्कूलों की दशा पूर्णत: बदल गई है। गौरतलब है कि चिन्हित स्कूलों में 19हजार डेस्क बे्रंच की कमी सामने आई थी, महज दो महीने में 9 हजार से अधिक डेस्कब्रेंच की पूर्ति हो चुकी है, जो बच्चों को सुविधाजनक शिक्षा देने की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन है।

शिक्षा, अधोसंरचना, डिजिटल लर्निंग, खेल और समग्र विकास पर फोकस
जनजातीय अंचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने और शासकीय विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की पहल पर ‘शिक्षा संजीवनी’ कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा तैयार इस नवाचार को सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) एवं जनभागीदारी के माध्यम से प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
डिजिटल शिक्षा-आधुनिक लाइब्रेरी पर जोर
विद्यालयों में ई-लर्निंग एवं उन्नत डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने, डिजिटल रिसोर्सेज के साथ आधुनिक लाइब्रेरी, कंप्यूटर, टैबलेट, किंडल तथा हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं का विस्तार, विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के एजुकेशनल एप्स और ई-कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराकर उनके सीखने के दायरे को व्यापक बनाने के प्रयास जारी है।
स्कूलों में बेहतर अधोसंरचना और सुरक्षित वातावरण
शिक्षा संजीवनी’ के अंतर्गत बालक एवं बालिकाओं के लिए पृथक, स्वच्छ एवं जल-जलयुक्त शौचालय, पर्याप्त बिजली व्यवस्था के लिए सोलर पैनल एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं तथा जर्जर भवनों का तत्काल सुधार कार्यक्रम के प्रमुख घटक हैं। विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त कक्षों के निर्माण सहित आवश्यक कार्य भी जनसहभागिता और सीएसआर के माध्यम से करना।
227 स्कूलों में शुरू हुए विकास कार्य : कलेक्टर डॉ. सोनवणे

अभियान का उद्देश्य शासकीय स्कूलों की अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ उन्हें आकर्षक, सुरक्षित एवं विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। लगभग 227 शासकीय स्कूलों में शिक्षा संजीवनी अभियान के तहत समाज को जोडक़र अधोसंरचना विकास एवं उन्नयन कार्य प्रारंभ किए जा रहे हैं। स्कूलों के विकास के साथ शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए समाज की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक दिवस के अवसर पर शुरू की गई इस पहल की शुरुआत शिक्षकों के सम्मान के साथ की गई है। अभियान के माध्यम से समयसीमा में शासकीय स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार कर विद्यार्थियों के लिए बेहतर एवं अनुकूल शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जाएगा।
सरकार के साथ समाज की सहभागिता, स्कूलों का स्वरुप बदलने की कोशिश- हेमंत खण्डेलवाल

मध्यप्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही है। हमारा प्रयास है कि अधोसंरचना विकास के साथ समाज को भी शिक्षा के मंदिरों से जोड़ा जाए और शासकीय स्कूलों को आकर्षक एवं सुंदर स्वरूप दिया जाए। यही स्कूल 2047 के विकसित भारत का नेतृत्व करने वाली युवा शक्ति के निर्माण का आधार बनेंगे।पूर्व में शिक्षा व्यवस्था में समाज का सीधा जुड़ाव रहता था। समय के साथ यह जुड़ाव कम हुआ और स्कूल समाज की सीधी निगरानी से दूर होते गए। शिक्षा संजीवनी अभियान के माध्यम से सरकार और समाज की सहभागिता को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। समाज, पालक, सेवानिवृत्त शिक्षक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन एवं अन्य सहयोगी शिक्षा संजीवनी अभियान के तहत स्कूलों की आवश्यकताओं के अनुरूप निर्माण कार्य, डेस्क-बेंच, डिजिटल कक्षाएं, बाउंड्रीवाल सहित अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों में आगे आकर योगदान दें। जनसहभागिता से किए गए कार्यों से न केवल सहयोगकर्ताओं का स्कूलों से जुड़ाव बढ़ रहा है, बल्कि स्कूलों की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों के प्रति समाज की जिम्मेदारी एवं निगरानी भी मजबूत हो रही है।
70 से 90 के दशक में बने जर्जर भवनों को मिली संजीवनी, प्रदेश में लागू हो सकता है बैतूल का मॉडल

जानकारी के अनुसार अब प्रत्येक विकासखंड के एक संकुल को पूरी तरह से सर्वसुविधायुक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिले का यह अभियान जल्द ही पूरे प्रदेश में लागू हो सकता है। इस संबंध में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री खण्डेलवाल ने मुख्यमंत्री से भी चर्चा की है। प्रदेश की टीम जिले के शिक्षा संजीवनी के अंतर्गत हुए कार्यों कार्यों का अवलोकन भी करेगी।जिले में 70 से 90 के दशक के कई स्कूल भवन जर्जर हालत में है। मैदानी दौरे में कलेक्टर ने जब स्कूलों की स्थिति देखी उसके बाद ही उन्होंने स्कूलों के कायाकल्प के लिए जनभागीदारी और लोगों का स्कूलों से जुड़ाव हो यह प्रयास किए। विधायक हेमंत खण्डेलवाल सहित सभी जनप्रतिनिधियों ने भी इस नवाचार को बल दिया, यहीं नहीं उन्होंने भी स्कूलों के उत्थान के लिए अपनी सहभागिता दर्ज कराई। जानकारी के अनुसार शिक्षा संजीवनी अभियान शासन और जनभागीदारी से विकास का उम्दा उदाहरण बन गया है।