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हस्तांतरित राख बांध क्षेत्र पर्यावरणीय और औषधियुक्त पौधो के रोपण से लहलहाता आएगा नजर

हस्तांतरित राख बांध क्षेत्र पर्यावरणीय और औषधियुक्त पौधो के रोपण से लहलहाता आएगा नजर 

परिधि न्यूज सारणी

:कभी कटीली झाड़ियों,जंगली घास से लदा रहने वाला सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी के राख बांध का 373 हेक्टेयर का रकबा आने वाले दिनो मे पर्यावरणीय और औषधियुक्त पौधो से लहलहाता नजर आने लगेगा। इसको लेकर वन परिक्षेत्र सारनी द्वारा पौधोरोपण की व्यापक तैयारिया की जा रही है। विदित हो की सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी को विद्युत उत्पादन पश्चात निकलने वाली राख निष्पादन हेतु वन परिक्षेत्र सारनी ने कई हेक्टेयर वन भूमी राख बांध हेतु लीज पर दी है, विगत कुछ वर्षों मे तापगृह परिसर मे स्थापित नई ईकाई से आधुनिक व्यवस्थाओं के तहत अब राख सीधे सायलो से भरकर उसका निष्पादन किए जानें से करीबन 373 हेक्टेयर भूमी पर स्थापित राख बांध का क्षेत्र तापगृह प्रबंधन हेतु अनुपयोगी हो जाने से प्रबंधन ने इस क्षेत्र को विधिवत वन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है।

वन परिक्षेत्र सारनी के अधीन शांतिनगर के पीछे स्थित यह 373 हेक्टेयर का क्षेत्र वन परिक्षेत्र सारनी को हस्तांतरित होते ही वन विभाग ने इस क्षेत्र पर पौधारोपण की व्यापक योजना बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की।तत्सम्बंध मे वन परिक्षेत्र आधिकारी सारनी शरदेंदु नायक ने अवगत कराया की एमपीपीजीसील प्रबंधन द्वारा हस्तांतरित 373 हेक्टेयर वन क्षेत्र 3 चरणों मे पर्यावरणीय और औषधियुक्त पौधो का रोपण किया जायेगा जिसके लिए वारिष्ट अधिकारियों के मार्गदर्शन मे राख बांध की भूमि का मृदा परीक्षण उपरांत कौन से पौधे रोपे जा सकते है इसका मार्गदर्शन मिलते ही प्रथम चरण मे 106 हेक्टेयर हस्तांतरित वनक्षेत्र मे पौधारोपण का धरातलीय कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, संपूर्ण भूमी से खरपतवार और जंगली झाड़ियां हटाकर भूमि का समतलीकरण पुर्ण होते ही आगमी जून माह तक 106 हेक्टेयर मे ” सफेद सिरस, सिस्सु, बबुल, करंजी, सु बाबुल, पुल्टाफॉम,” इत्यादि 10 से 12 प्रजातियों के पर्यावरणीय और औषधियुक्त पौधो का रोपण कर दीया जायेगा, इसके बाद हस्तानांतरित शेष भूमी पर मृदा परीक्षण कर वांछित पौधो का रोपण आगमी एक वर्ष के भीतर कर लिया जाएगा।
सनद रहे की शांतिनगर के पीछे से लेकर 373 हेक्टेयर क्षेत्र मे फैला यह राख बांध का क्षेत्र ” सतपुड़ा मेलघाट टाइगर कॉरिडोर ” क्षेत्र से एकदम लगा है जहा 2018 मे क्रमश: दो बार बाघ का रेस्क्यू किया गया है, राख बांध का यह क्षेत्र बाघों के अनुकूल वातावरण से युक्त है, जहा बाघों की आवक से भविष्य मे इंकार नही किया जा सकता।
वही दूसरी ओर एमपीपीजीसीएल प्रबंधन द्वारा राख बांध क्षेत्र मे प्रस्तावित ” सोलर प्लांट ” की स्थापना के मद्देनजर वन विभाग को हस्तांतरित राख बांध की 373 हेक्टेयर भूमि पुनः प्राप्त किए जानें हेतू वन विभाग से कागजी कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है, परन्तु यह प्रक्रिया इतनी आसन नही है,अब उक्त भूमी के बदले एमपीपीजीसीएल प्रबंधन हस्तांतरण के पुर्व मध्यप्रदेश मे कही भी तीन गुणा भूमी वन विभाग को प्लांटेशन कर उपलब्ध कराना होगी, इस प्रक्रिया मे लंबा समय लगने के चलते फिलहाल यह तय है की एक वर्ष के भीतर वन परिक्षेत्र सारनी के अधीन हस्तांतरित 373 हेक्टेयर मे पौधारोपण से शांतिनगर से लगा यह क्षेत्र पर्यावरणीय और औषधियुक्त युक्त पौधो से हराभरा होकर लहलहाता नजर आने लगेगा।

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