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साहब के बंगले के रिनोवेशन के लिए कहां से आए 7 लाख…!

✓खिडक़ी दरवाजों में पर 60 हजार के पर्दे
✓साहब के बंगले के रिनोवेशन के लिए कहां से आए 7 लाख…!
✓अपनी जेब से दी राशि, ठकेदार पर दबाव या किसी मद की राशि का हुआ उपयोग

परिधि ग्राउंड रिपोर्ट-11


छात्रावास अधीक्षकों से सहायक आयुक्त के नाम पर की गई अवैध वसूली की प्रभारी मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल से मीडिया द्वारा की गई शिकायतों का असर तो बेअसर साबित हो रहा है। जांच के आश्वासन भी रद्दी की टोकरी में है। इस बीच एक चर्चा जोर शोर से प्रशासनिक गलियारों में सुर्खियां बटोर रही है कि अगस्त 2025 में सहायक आयुक्त जिस बंगले में रह रहे है उसका रिनोवेशन कराया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 6- 7 लाख रुपए रिनोवेशन पर खर्च हुए है क्योंकि सहायक आयुक्त को पुराने रंग, पुरानी दीवारें और अच्छे-खासे पर्दे पसंद नहीं थे, लिहाजा रंग रोगन, मरम्मत, फर्नीचर से लेकर बंगले को नया करने के लिए करीब 6-7 लाख रुपए खर्च हुए है। जनजातीय कार्य विभाग की निर्माण शाखा रिनोवेशन किस मद से हुआ यह बताने में परहेज कर रही है। जिससे यह तो साफ है कि दाल काली है।
आखिर किस मद की राशि का उपयोग यह तो जांच से होगा खुलासा
सूत्र बताते है कि सहायक आयुक्त वर्तमान में जिला परियोजना अधिकारी, आदिवासी विकास विभाग के नाम पर आबंटित बंगले में निवासरत है। सहायक आयुक्त विवेक पाण्डेय प्रभारी जिला परियोजना अधिकारी भी है। इस बंगले में शिफ्ट होने से पहले बाकायदा बंगले का रिनोवेशन कराया गया है। बिजली फीटिंग, नल कनेक्शन, दीवारों का रंग रोगन, इनवर्टर, से लेकर तमाम कार्य बंगले में कराए गए। यहां किए गए खर्च का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज खिडक़ी और दरवाजों के पर्दों पर ही 60 हजार रुपए व्यय हुआ है। अब सवाल यह है कि सहायक आयुक्त द्वारा यह खर्च अपने वेतन से किया है या जनजातीय कार्य विभाग के किसी अन्य मद की राशि रिनोवेशन में लगाई गई। यह भी संभव है कि ठेकेदारों पर दबाव बनाकर बंगले का रिनोवेशन कराया गया हो? रिनोवेशन को लेकर जब जनजातीय कार्य विभाग बैतूल के निर्माण शाखा प्रभारी प्रीतम पाखरे से शनिवार को जानकारी चाही गई तो उन्होंने कार्यालय पहुंचकर एक घंटे में जानकारी देने का कहां और दो दिन तक टाल दिया। सोमवार को जब वापस कॉल किया गया तो उन्होंने बताया कि कार्यालय से किसी भी मद से रिनोवेशन का काम नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा बंगले में रिनोवेशन किसने और कैसे कराया यह जानकारी उन्हें नहीं है।
विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी नाराज
प्राप्त जानकारी के अनुसार बैतूल विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी जनजातीय कार्य विभाग में चल रही धांधलियों एवं अवैध वसूली की शिकायतों से नाराज है। गौरतलब है कि मीडिया ने सहायक आयुक्त के नाम पर 134 छात्रावासों के अधीक्षकों से 5 हजार एवं इससे अधिक की वसूली की शिकायत प्रभारी मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल से भी की थी, जिसके बाद उन्होंने जांच के निर्देश दिए थे। विधायक श्री खण्डेलवाल के संज्ञान में भी छात्रावासों में हुई अवैध वसूली एवं अधीक्षकों की नियुक्ति के लिए होने वाले लेन-देन की शिकायतें है। जिले में जनजातीय कार्य विभाग की कार्यशैली को लेकर श्री खण्डेलवाल भी नाराज है। कयास लगाए जा रहे है कि जल्द ही बड़ा फेरबदल विभाग में हो सकता है।
केन्द्रीय राज्य मंत्री डीडी उईके की चुप्पी पर सवाल
भारत सरकार के केन्द्रीय राज्य मंत्री डीडी उईकेे एवं बैतूल सांसद जनजातीय मामले के ही मंत्री है लेकिन उन्हीं के गृह जिले में जनजातीय कार्य विभाग लगातार सुर्खियों में है। छात्रावासों में बदहाली, यहां रहने वाले बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं में कटौती एवं अन्य शिकायतों पर कभी श्री उईके सख्त नजर नहीं आए। जिलेवासियों ने उन्हें कभी किसी छात्रावास में औचक निरीक्षण करते भी नहीं देखा। हां यह बात और है कि राष्ट्रीय पर्व पर होने वाले कार्यक्रम एवं विशेष भोज में जरुर उन्होंने शिरकत की है। जनजातीय कार्य विभाग पर नकेल कसने के लिए विधायक हो या सांसद सभी को बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए एक्शन लेने की जरुरत है।

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