जनजातीय विभाग के गड़बड़झाले की हाण्डी का चावल जितेन्द्र काजले..!
➡️मनपसंद पोस्टिंग के खेल में तीन बार चली गई स्वैच्छिक स्थानांतरण की चाल
➡️मास्टर माइंड कौन…झाबुआ या बुरहानपुर कहां से बैतूल आए काजले…?
परिधि पड़ताल बैतूल/01

16 जून को एक प्राथमिक शिक्षक जितेन्द्र काजले का तबादला स्वेच्छिक आवेदन के आधार पर सीटीडी भोपाल द्वारा बुरहानपुर जिले की प्राथमिक शाला गोंदरी से बैतूल जिले में शाहपुर ब्लॉक की प्राथमिक शाला कोटमी में होता है, लेकिन इस स्कूल में पद रिक्त न होने की वजह से जनजातीय कार्य विभाग द्वारा सीटीडी के आदेश का हवाला देकर 13 जुलाई को उक्त शिक्षक का तबादला घोड़ाडोंगरी विकासखंड की प्राथमिक शाला हीरापुर कर दिया जाता है। दोबारा फिर विभाग को याद आता है कि हीरापुर में भी शिक्षक का पद रिक्त नहीं है इसलिए 23 जुलाई को इसी शिक्षक का तबादला वापस प्राथमिक शाला कोटमी से शाहपुर की प्राथमिक शाला कामठी में कर दिया जाता है। आदेश के तिकड़म में इतने झोल से यह तो स्पष्ट है कि सीटीडी से जो स्थानांतरण किए गए है। उनमें आयुक्त जनजातीय कार्य, मध्यप्रदेश भोपाल के पत्र क्रमांक/शिक्षा स्था./1064163/2026 दिनांक 3/6/2026 की कंडिका 10 में दिए गए निर्देश का हवाला देकर जमकर तोड़ा मरोड़ा गया है। इस पूरे क्रम में यह भी स्पष्ट है कि सीटीडी के स्थानांतरण आदेश को काउंसलिंग, रिक्त पदों एवं अन्य मापदंडों के आधार पर भुनाया गया और सूत्रों के मुताबिक पर्दे के पीछे खूब कमाया भी गया। इस पूरी व्यवस्था को समझने के लिए परिधि न्यूज ने जनजातीय विभाग के गड़बड़झाले की हाण्डी के एक चावल की पड़ताल की और एक शिक्षक के तीन आदेशों ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर संवेदनशील कलेक्टर संजय सोनवणे यदि जनजातीय विभाग में विभिन्न जिलों से स्थानांतरित होकर आए शिक्षकों की पदस्थापना के आदेश की जांच करें तो बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो सकता है।
एक नजर में तीनों आदेश
➡️आदेश दिनांक-16/06/2026- स्वैच्छिक आवेदन के आधार पर सीटीडी भोपाल द्वारा स्थानांतरण
आदेश क्रमांक/ E-1346851/1/0187/2026-O/o Add.Dir-CTD-1
जितेन्द्र काजले 190411346 प्राइमरी टीचर शासकीय प्राथमिक शाला गोंदरी, ब्लाक खकनार, जिला बुरहानपुर से शासकीय प्राथमिक शाला कोटमी ब्लाक शाहपुर जिला बैतूल

➡️आदेश दिनांक 13/07/2026 जिला कार्यालय कलेक्टर (जनजातीय कार्य)बैतूल
आदेश क्रमांक-स्थापना/2026/टी.एच./1/3425
प्राशि जितेन्द्र काजले झाबुआ से प्राशा हीरापुर वन ग्राम घोड़ाडोंगरी

➡️आदेश दिनांक- 23/7/2026 जिला कार्यालय कलेक्टर (जनजातीय कार्य)बैतूल द्वारा स्थानांतरण
आदेश क्रमांक-स्थापना/2026/टीएच/1/3595
जितेन्द्र काजले प्राथमिक शाला कोटमी शाहपुर से प्राथमिक शाला कामठी शाहपुर

कौन है पूरे खेल का मास्टर माइंड…?
जनजातीय कार्य विभाग बैतूल को सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी माना जाता है। यहां कुछ बाबू वर्षों से एक ही सीट पर जमें जकड़े है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जनजाति विभाग में अन्य जिलों से आये शिक्षकों को बार-बार आदेशों में संशोधन कर लाभ पहुंचाया गया है। मनचाही पदस्थापना के लिए भारी लेन-देन कर तीन-तीन बार संशोधन के भी मामले है। अलग-अलग नियमों का हवाला देकर भले ही संशोधन या आदेश में बदलाव कर मनमाफिक पदस्थापना की गई है लेकिन 16 जून को स्थानांतरित शिक्षकों की वर्तमान पदस्थापना को लेकर जांच की जाएगी तो पूरा खेल उजागर होगा साथ ही इस पूरे खेल का मास्टर माइंड भी सामने आ जाएगा।
जितेन्द्र काजले के आदेश से ही उजागर हुई गलती
शिक्षक जितेन्द्र काजले को 16 जून को बुरहानपुर की गोंदरी प्राथमिक शाला से मध्यप्रदेश शासन जनजातीय कार्य विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा बैतूल जिले के शाहपुर विकासखंड के ग्राम कोटमी की शासकीय प्राथमिक शाला में सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय भोपाल के परिपत्र क्रमांक GAD/4/0001/2026-GAD-9-01 दिनांक 22.05.2026 के द्वारा जारी स्थानांतरण नीति के अनुसार स्वैच्छिक आवेदन के आधार पर स्थानांतरित किया गया। यहां स्पष्ट है कि जितेन्द्र काजले का यह स्थानांतरण स्वैच्छिक आवेदन के आधार पर किया गया। लेकिन कोटमी में पद रिक्त न होने पर जनजातीय कार्य विभाग बैतूल द्वारा 13 जुलाई को जितेन्द्र काजले को बैतूल में झाबुआ से स्थानांतरित बताकर घोड़ाडोंगरी विकासखंड के वनग्राम हीरापुर की प्राथमिक शाला में पदस्थ कर दिया गया। यहीं पर विभाग की बड़ी चूक हो गई। क्योंकि 16 जून के आदेश में जितेन्द्र काजले बुरहानपुर जिले से बैतूल स्थानांतरित हुए है। वैसे विभाग जितेन्द्र काजले के झाबुआ से हीरापुर स्थानांतरण संबंधी कोई आदेश यदि है तो उसे सामने लाकर स्थिति स्पष्ट कर सकता है कि कोई गड़बड़झाला नहीं है। गौरतलब है कि 13 जुलाई को जारी आदेश में जितेन्द्र काजले का नाम है 29 नंबर पर है इस आदेश में सीटीडी से स्थानांतरित कुल 43 शिक्षकों के नाम शामिल है जिनके आदेश में संशोधन कर उन्हें रिक्त पदों वाले स्कूलों में भेजा गया। सूत्र बताते है कि हीरापुर जितेन्द्र काजले के गृहग्राम से दूर होने की वजह से पुन: आदेश में संशोधन का प्रपंच इस खेल के मास्टर माइंड द्वारा रचा गया और फिर 9 दिन बाद 23 जुलाई को जितेन्द्र का स्थानांतरण बुरहानपुर के गोंदरी से शाहपुर की प्राथमिक शाला कोटमी होना और यहां पद रिक्त न होने की स्थिति में शाहपुर विकासखंड की ही प्राथमिक शाला कामठी में कर दिया गया। इस आदेश में भी जितेन्द्र का झाबुआ से कोई कनेक्शन नहीं दर्शाया गया। गौरतलब है कि बुरहानपुर से झाबुआ- 326 किमी, बैतूल- 226 किमी और झाबुआ से बैतूल- 422 किमी है। भले ही जितेन्द्र काजले 16 जून से 23 जुलाई के अंतराल में झाबुआ न गए हो लेकिन उसकी पदस्थापना यहां होकर यहां से स्थानातरण भी होना चौकाने वाला है।

क्या नवागत सहायक आयुक्त की जानकारी में भी है खेल
13 जुलाई को जारी 43 शिक्षकों के पदस्थापना आदेश एवं 23 जुलाई को कार्यालय कलेक्टर जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी शिक्षक जितेन्द्र काजले को प्राथमिक शाला कामठी में पदस्थ किए जाने के आदेश पर सहायक आयुक्त वत्सला शिवहरे के हस्ताक्षर है। स्थानांतरण के इस खेल की जानकारी क्या सहायक आयुक्त श्रीमती शिवहरे के संज्ञान में है या पूरे खेल के मास्टर माइंड ने उन्हें गुमराह किया है यह तो जितेन्द्र काजले के आदेश की तरह ही संशोधन के बाद फिर संशोधन कर जारी किए आदेशों की जांच से ही उजागर होगा। जिन शालाओं में झाबुआ, बुरहानपुर, खंडवा, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, अलीराजपुर बड़वानी, से आए शिक्षकों को पद रिक्त न होने के नाम पर पदस्थ किया गया है और जिन शालाओं में उनकी सीटीडी से पदस्थापना की गई थी वहां रिक्त पदों की जानकारी यदि ली जाएगी तो कई राज और खुलने की संभावना है।इस संबंध में सहायक आयुक्त बैतूल से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।