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रामलीला में श्रीराम जन्म, सीता जन्म और मुनि आगमन का हुआ मंचन

खजूरी जिला सीधी के पारंगत कलाकारों का रामलीला मंचन, दर्शक तल्लीन होकर देख रहे हर प्रसंग

✓रामलीला में श्रीराम जन्म, सीता जन्म और मुनि आगमन का हुआ मंचन
✓खजूरी जिला सीधी के पारंगत कलाकारों का रामलीला मंचन, दर्शक तल्लीन होकर देख रहे हर प्रसंग 
परिधि न्यूज बैतूल
श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलीला महोत्सव में गुरुवार को श्रीराम जन्म, सीता जन्म और मुनि विश्वामित्र के आगमन की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। रामलीला के दूसरे दिन अयोध्या नगरी की पृष्ठभूमि में राजा दशरथ की संतानहीनता का दुख, यज्ञ की तैयारी और भगवान राम के जन्म की लीला ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। अयोध्या पति राजा दशरथ संतान न होने की चिंता में निराश नजर आए। ऋषि वशिष्ठ द्वारा यज्ञ करवाने की सलाह दी जाती है और इसके बाद पुत्र यष्टि यज्ञ के सफल होने पर अग्नि देव प्रसन्न होकर तीनों रानियों को दिव्य द्रव्य देते हैं, जिससे रानियां गर्भवती होती हैं। इसके बाद राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
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जैसे ही भगवान राम का जन्म होता है, अयोध्या नगरी में खुशी की लहर दौड़ जाती है। राजा दशरथ की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठते हैं और पूरे नगर में उत्सव मनाया जाता है। रामलीला मंच पर अयोध्या जैसा दृश्य सजीव हो उठता है।  इसके बाद मंचन में जनकपुरी का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जहां सूखा पड़ने से राजा जनक परेशान हो जाते हैं। नारद जी राजा जनक को खेतों में हल चलाने की सलाह देते हैं, जिससे उन्हें सीता जी मिलती हैं। राजा जनक उन्हें अपनी पुत्री के रूप में अपनाते हैं और नारद जी द्वारा उनका नाम सीता रखा जाता है। दर्शकों ने सीता जन्म की इस लीला को भी उत्साह से सराहा।
भगवान राम के बाल्यकाल के दृश्य मंचित होने के बाद मुनि विश्वामित्र का आगमन होता है। वे राजा दशरथ से भगवान राम और लक्ष्मण को शिक्षा-दीक्षा के लिए गुरुकुल ले जाने की इच्छा जताते हैं। राजा दशरथ इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार करते हैं और राम-लक्ष्मण को विदा करते हैं। दोनों राजकुमारों को गुरुकुल भेजने का निर्णय लेते समय परिवार में उदासी छा जाती है, लेकिन सभी इस निर्णय का सम्मान करते हैं।
खजूरी जिला सीधी के पारंगत कलाकारों का शानदार प्रदर्शन
रामलीला का मंचन खजूरी, जिला सीधी के आदर्श श्री इंद्रलोक रामलीला मंडल के पारंगत कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। इस मंडल के महंत रमेशदास तिवारी महाराज ने जानकारी दी कि श्रीराम की भूमिका में अभिषेक तिवारी, लक्ष्मण की भूमिका में हरि गोविंद, भरत की भूमिका में बाल गोविंद, और शत्रुघ्न की भूमिका में कृष्णा हैं। सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को बखूबी निभाया और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
 13 अक्टूबर को होगा समापन
श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामलीला महोत्सव का यह 67वां वर्ष है। इस रामलीला का समापन 13 अक्टूबर को प्रभु श्रीराम के राजतिलक के साथ होगा। 6 अक्टूबर को श्रीराम बारात निकाली जाएगी और 12 अक्टूबर को स्टेडियम ग्राउंड पर दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। प्रतिदिन रात्रि 9 बजे रामलीला का मंचन होगा। इस आयोजन में आम नागरिक भी उत्साहपूर्वक हिस्सा ले सकते हैं। रामलीला मैदान पर महिलाओं के लिए विशेष बैठने की व्यवस्था की गई है।
रामलीला में आज
श्री रामलीला में आज शुक्रवार को यज्ञ रक्षा, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार का मंचन किया जाएगा।
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