यह है बैतूल का स्वर्ग: सतपुड़ा की वादियों में बसा कुकरु
डीएफओ की सकारात्मक सोच ने बदल दी कुकरु की तस्वीर

✓यह है बैतूल का स्वर्ग: सतपुड़ा की वादियों में बसा कुकरु
✓डीएफओ की सकारात्मक सोच ने बदल दी कुकरु की तस्वीर
✓इको टूरिज्म की संभावनाओं को किया साकार
प्रकृति एवं एडवेंचर प्रेमियों के लिए नायाब है बैतूल का कश्मीर
परिधि न्यूज बैतूल

सतपुड़ा की हरी-भरी वादियों में बसे कुकरु खामला की रंगत अब बदल गई है। यह सब संभव हो पाया दक्षिण वन मंडल के डीएफओ विजयानंतम टीआर की सकारात्मक सोच एवं प्रयास की वजह से। कुकरु नैसर्गिक सौन्दर्य से ज्यादा से ज्यादा लोग आकर्षित हो और जिले में ईको टूरिज्म को बड़ावा मिले इस उद्देश्य से डीएफओ विजयानंतम द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे है। अब जब कुकरु पूरी तरह पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है दक्षिण वन मंडल द्वारा हाइवे राइडर्स के सहयोग से राइड फॉर कुकरु का आयोजन कर पर्यटन प्रेमियों को कुकरु से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। राइड फॉर कुकरु के आयोजन से पहले वन विभाग द्वारा कुकरु को प्रकृति प्रेमियों, एडवेंचर लवर्स के लिहाज से तैयार किया है। इसके लिए कई जीर्णोद्धार कार्य भी किए गए है। 27 जुलाई को सुबह 10 बजे राइड फॉर कुकरु का आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। डीएफओ विजयानंतम ने बताया कि यह रैली कुकरु के पर्यटन को बढ़ावा तो देगी ही साथ ही स्थानीय लोगों के जीवन में विकास और समृद्धि लाने का माध्यम बनेगी।

परिवार के साथ सुकून के पल बिताना चाहते है तो कुकरु में स्वागत है
बैतूल जिला मुख्यालय से 90 किमी दूर सतपुड़ा की वादियों में बसा कुकरु मध्यप्रदेश की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है,जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 1137 मीटर है। शहर की भागदौड़ भरी जिदंगी से दूर कुकरु गांव नेचर और एडवेंचर लवर्स के पसंदीदा स्थानों में शुमार होने लगा है। जो लोग अपने परिवार के साथ सुकून के पल बिताने के लिए आऊटिंग करना पसंद करते है उनके लिए कुकरु एक बेहतर विकल्प है।
डीएफओ विजयानंतम ने वादियों में बसे कुकरु का बदल दिया स्वरुप

दक्षिण वन मंडल के डीएफओ विजयानंतम टीआर के प्रयासों से ईको टूरिज्म स्थल कुकरु का जीर्णाेद्धार किया गया है। पर्यटकों को इस स्थल से जोडऩे के लिए ईको टूरिज्म स्थल पर कैंटीन की व्यवस्था की गई ताकि पर्यटक यहां स्थानीय व्यजंनों का स्वाद ले सके। रात्रि विश्राम हेतु आवास, बिजली की व्यवस्था, केम्पस में मचान, सोलर लाईट की व्यवस्था के साथ पर्यटकों की सुविधा के लिए सिग्रल बुस्टर लगाए गए है। ताकि पर्याटक अपने परिजनों से बात कर सकें। जंगल सफारी का लुत्फ भी पर्यटक अब कुकरु में उठा सकेंगे।

पर्यटक परिवार के साथ पवन चक्की, लोकलदरी एवं कुकरु विलेज, लेडी फ्लोरेंस का पूर्व निवास एवं जंगल का आनंद ले सकेंगे। स्थानीय जनजाति द्वारा पर्यटकों के कहने पर कोरकु नृत्य कार्यक्रम भी आयोजित किया जाने लगा है। केम्प्स में चिल्ड्रन प्ले एरिया विकसित किया गया है जिसमें बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व अन्य मनोरंजक उपकरण स्थापित किए गए है। पर्यटन स्थल पर कॉफी गार्डन नेचर नेचर टे्रल एवं साइकिलिंग ट्रेक विकसित किया गया है। जहां नेचर ट्रेन माऊअेन साईकिलिंग, हार्स राइडिंग का मजा ले सकते है। प्राकृतिक सौन्दर्य, कॉफी बागान, ग्रामीण संस्कृति, कुकरु जनजाति लोकनृत्य एवं सीपना नदी उद्गम क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनेंगे।
मध्यप्रदेश का एकलौता कॉफी बागान देख सकेंगे पर्यटक

मध्यप्रदेश का एकलौता कॉफी बागान कुकरु में है। जो वन विश्राम गृह कुकरु से लगा हुआ है। वर्तमान में यहां 44 हेक्टेयर में कॉफी बागान फैला हुआ है। कॉफी बागान एवं आसपास के क्षेत्र में विभिन्नप्रकार के पक्षियों का कलरव एवं उपस्थिति पर्यटकों को उत्साहित करती है।
यह भी है खास-

भोडियाकुण्ड/ सिपना: सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के मध्य बसा हुआ वन ग्राम भोडियाकुंड एवं महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व की जीवनदायिनी सिपना नदी का उद्गम मनमोहक है। यहां से सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला की मनभावन सात पर्वत श्रेणियां दृष्टिगोचर होती है।

बुच पाईंट: यह पाईंट सतपुडा की वादियों में स्थित सूर्योदय दर्शन का अत्यंत रमणीय स्थल बिंदु है। प्राकृतिक सौन्दर्य की छटा सूर्योदय के दौरान पूरे शबाब पर होती है।
सूर्यास्त पाइंट: मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा रेखा के निकट सतपुड़ा की सुंदर पहाडिय़ों के बीच इस पाइंट से सूर्यास्त का विहंगम दृश्य मन को प्रफुल्लित करता है।
मिस फ्लोरेंस हेड्रिक्स हेरिटेज: ब्रिटिश महिला मिस फ्लोरेंस हेड्रिक्स का पूर्व निवास वर्तमान में जीर्ण शीर्ण है। घने जंगलों के बीच इस निवास पर मिस फ्लोरेंस अकेले निवास करती थी।

सांस्कृतिक नृत्य: ईको पर्यटन केन्द्र कुकरु में स्थानीय आदिवासियों द्वारा लोकनृत्य का आयोजन किया जाता है।
बैलगाड़ी सवारी: ईको पर्यटन केन्द्र कुकरु में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बैलगाड़ी से भी पर्यटकों को विजिट कराई जाती है।

सायकल पथ: कुकरु से भोडियाकुंड तथा अन्य दर्शनीय स्थलों पर साईकिलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।