यहां मुर्दों को भी करना पड़ता है अंतिम संस्कार के लिए इंतजार…!!
चिता जलाने के लिए लकडिय़ां नहीं मिलने पर टायर से जलाये जा रहे शव
✓यहां मुर्दों को भी करना पड़ता है अंतिम संस्कार के लिए इंतजार…!!
✓चिता जलाने के लिए लकड़ियां नहीं मिलने पर टायर से जलाये जा रहे शव
✓खेड़ी निस्तार डिपों में एक वर्ष से नहीं है अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां
गौरी पदम/मनोहर अग्रवाल
परिधि न्यूज बैतूल/खेड़ीसांवलीगढ़

इस खबर का शीर्षक थोड़ा आहत करने वाला हो सकता है, लेकिन यह सच है कि खेड़ीसांवलीगढ़ में शव को अंतिम संस्कार के लिए कई बार इंतजार करना पड़ जाता है। समय पर अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां उपलब्ध न होने की वजह से यह स्थिति निर्मित होती है। बैतूल जनपद पंचायत की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत जिसकी आबादी करीब 9 हजार है, यहां किसी ग्रामीण के निधन होने पर चिता की लकड़ियां जुटाना बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां न मिलने से टायर से भी शव जलानेे पड़ते है। प्राप्त जानकारी के अनुसार खेड़ीसांवलीगढ़ में वन विभाग का निस्तार डिपो भी है लेकिन पिछले करीब एक वर्ष से डिपो से अंतिम संस्कार के लिए लकडिय़ा नहीं मिल पा रही। इस समस्या से जागरुक ग्रामीणों ने दक्षिण वन मंडल वन परिक्षेत्र से लेकर डीएफओ को भी अवगत कराया लेकिन लम्बे समय से यहां अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी व बांस आदि की व्यवस्था नहीं की गई।
टायरों से शव को जलाने की विवशता
खेड़ी डिपो में जलाऊ लकड़ी न होने के कारण ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता है। सर्वाधिक परेशानी गांव में किसी के निधन होने पर चिता के लिए लकडिय़ा जुटाने की होती है। डिपों में लकड़ी न मिलने पर बैतूल से लकड़ियां खरीदकर लाना पड़ता है या फिर मजबूरी में शव टायर से जलाये जाते है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले डिपो में लकड़ी मिल जाती थी तो आसानी से मृतक का अंतिम संस्कार हो जाता था। अब लकड़ी के लिए बैतूल जाना होता है, चिता के लिए लकड़ी बैतूल से लाने में अधिक खर्च के साथ-साथ समय भी जाता है। किसी परिवार में दुख की घड़ी के बीच अपने दिवंगत परिजन के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां जुटाने की चिंता दुबले पर दो अषाढ़ जैसी होती है।
पहले हर घरों में भी मिल जाती थी लकड़ियां
ग्राम पंचायत खेड़ी के लोग किसी परिजन का निधन होने पर खेड़ी के ताप्ती घाट पर अंतिम संस्कार करते है। ग्रामवासी बताते है कि पहले घरों में गैस चुल्हे कम थे, जलाऊ लकड़ी लगभग हर घर में उपलब्ध होती थी। पहले अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीण घरों से लकडिय़ा एकत्रित करवा लेते थे, लेकिन जब से गैस चुल्हे का चलन बढ़ा तो लोगों के घरों में चुल्हे जलना बंद हो गए, ऐसे में घरों में भी लकड़ियां नहीं मिल पाती। दो दिन पहले भी ग्राम में ऐसी ही स्थिति निर्मित हुई। जब एक ग्रामीण के निधन पर अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी नहीं मिल पाई। जब ग्रामीण सहायक परिक्षेत्र कार्यालय में पहुंचे तो उन्हें सहायक परिक्षेत्र अधिकारी भी नहीं मिल पाये। ऐसे में शव के अंतिम संस्कार के लिए बैतूल से लकड़ी आने तक इंतजार करना पड़ा। ग्रामीणों ने इस संवेदनशील मामले में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी एवं डीएफओ दक्षिण वन मंडल विजयानंतम टीआर से डिपो में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराये जाने की मांग की है।इस संबंध में दक्षिण वन मंडल के डीएफओ विजयानंतम टीआर को उनके मोबाईल नंबर 9424790400 पर कॉल किया गया उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
इनका कहना…
मुझे इस संबंध में आपसे जानकारी मिली है, मैं डीएफओ से इस संबंध में बात करता हूं।
नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल