अजब गजब परिधि: एक NRC ऐसी, जहां लखपति कुपोषितों की मंडली!!
✓अजब गजब परिधि: एक NRC ऐसी, जहां लखपति कुपोषितों की मंडली!!
परिधि अजब गजब
चटकारा

कहते है कि दिल का रास्ता पेट से जाता है। ज्यादातर मामलों में यह कहावत सही हो भी सकती है, लेकिन उन लोगों का क्या जिनके पास दिल ही नहीं है? जिले के प्रशासनिक तंत्र में कुछ ऐसे बेदिल लोग भी है, जो अपना पेट भरने के लिए मासूमों के दिल से खिलवाड़ कर सकते है। जिले के ही एक पोषण पुर्नवास केन्द्र में इसकी बानगी देखी जा सकती है। जहां लाखों रुपए वेतन पाने वाले कुपोषित बच्चों के आहार तक पर बिना डकार डाका मार रहे है। अब इसे दिलचस्प कहे या बेहायी या फिर बेदर्दी यह तो समझ से परे है। इस पोषण पुनर्वास केन्द्र में आधा दर्जन अधिकारियों की मंडली जमकर चटकारा लगाती है। अति कुपोषित बच्चों की निगरानी एवं प्रबंधन के लिए बनाए गए पोषण पुर्नवास केन्द्र में बच्चों का पोषण हो रहा है या नहीं यह तो कहना संभव नहीं है पर आला अफसरों के पेट जरुर पल रहे है। 50 हजार रुपए से लाख रुपए तक वेतन पाने वाले साहेब सुबह-दोपहर और रात का नाश्ता, लंच और डिनर यहीं फोकट में पीट रहे है। चर्चा है कि जिले में गरीबों के लिए संचालित दीनदयाल रसोई में भी गरीब और जरुरतमंद 5 और 10 रुपए में भोजन करते है। अब लोग यह कहने से भी नहीं चूक रहे कि पुनर्वास केन्द्र के भरोसे पेट पाल रहे लखपतियों से कहीं अधिक खुद्दारी इन गरीबों में है जो शासन को एक टाइम भोजन के 5 से 10 रुपए अदा तो कर रहे है। शासन का राशन, शासन के कर्मचारी और शासन का केन्द्र ….यहां हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा का खेल वर्षों से हो रहा है और सब बेखबर है। पोषण पुनर्वास केन्द्र का सबसे बड़ा चटकारा तो यह है आधा दर्जन लोगों की इस टीम को कुपोषित बच्चों के इस केन्द्र में अपने स्वाद के लिए नॉनवेज पार्टी तक करने में कोई गुरेज नहीं है। इनमें से एक बंदा सोशल मीडिया पर खासा फ्रेंडली है। पोषण पुर्नवास केन्द्र का स्टॉफ अधिकारियों की जी हजूरी करने विवश है, क्योंकि मानदेय के बिल पर चिड़िया इन्ही की बनेगी । फैमेली के साथ न होने के कारण फैमेली क्वार्टर छोडक़र इन्होंने एनआरसी को अपनी पेटपूजा का जरिया बना लिया है। लोग आए दिन इन चटकारेबाजों की चर्चा करते है, शिकायत कर नहीं सकते इसलिए बस बातों में चटकारा ले लेते है। बहरहाल गंभीर बात यह है कि कुपोषित बच्चों का निवाला तक छीना जा रहा है और सिस्टम कुपोषण का शिकार है इसलिए हाथ-पैर भी नहीं हिला पा रहा।