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रॉयल बाघ का रेस्क्यू… रायसेन में 5 हाथी, 150 लोगों की टीम के प्रयास से 90 दिन बाद पिंजरे में कैद,  कई रात नहीं सोई बाघ को पकड़ने वाली टीम

 

✓रॉयल बाघ का रेस्क्यू… रायसेन में 5 हाथी, 150 लोगों की टीम के प्रयास से 90 दिन बाद पिंजरे में कैद,  कई रात नहीं सोई बाघ को पकड़ने वाली टीम

रायसेन। पिछले तीन महीने से रायसेन में एक इंसान और 12 से ज्यादा मवेशियों का शिकार करने वाले रॉयल बाघ का रेस्क्यू कर लिया गया। बाघ को पकड़ने के लिए 10 दिन से कान्हा और पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम जंगल में ही डेरा डाले हुए थी। डीएफओ, रेंजर, एक्सपर्ट और डॉक्टरों के साथ 100 कर्मचारी और 5 हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे थे। गुरुवार को टीम ने ट्रैंक्यूलाइज कर बाघ को पिंजरे में कैद कर लिया।टीम के अनुसार टीम के अनुसार बाघ की मूवमेंट को कैद करने के लिए जंगल में डेढ़ सौ से ज्यादा कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों में प्रतिदिन होने वाले मूवमेंट को देखकर टीम बाघ के रेस्क्यू का प्लान तैयार करती थी। रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए टीम कई रातें नहीं सोई।

बाघ, अभियान पर हुए 25 से 30 लाख रुपए खर्च
वन विभाग की टीम को सुबह 7 बजे उसकी पिन प्वाइंट लोकेशन मिल गई थी। लोकेशन मिलते ही 8 बजे तक हाथियों के साथ टीम मौके पर पहुंच गई, जहां उसे घेर लिया गया। हालांकि इस दौरान बाघ ने टीम को काफी छकाया।करीब 11 बजे डाक्टर व विशेषज्ञों की टीम भी वहां पहुंच गई। 12 बजकर 5 मिनट पर बाघ को गन की मदद से पहला इंजेक्शन दिया गया। इसके बाद उसकी मूवमेंट कुछ धीमी हो गई। इसके बाद 1 बजकर 30 मिनट पर उसे दूसरा इंजेक्शन दिया गया, जिससे वह पूरी तरह बेहोश हो गया।डॉक्टरों की टीम ने उसके स्वास्थ्य की जांच की। गर्मी अधिक होने से बाघ के ऊपर पानी का छिड़काव किया गया और आक्सीजन भी दी गई। पूरी तरह से निश्चिंत होने के बाद बाघ को टीम ने पिंजरे में पहुंचाया, करीब 4 बजे बाघ वापस होश में आ गया। पिछले तीस दिन से वन विभाग की टीम बाघ की सर्चिंग में जुट गई थी। उसकी मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इस काम में वाइल्डलाइफ के क्षेत्र में काम करने वाले दो एनजीओ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और डब्ल्यूसीपी की टीम भी वन विभाग की मदद कर रही थी।एनजीओ ने विभाग को आधुनिक कैमरे व अन्य तकनीकी मदद प्रदान की। 20 दिन बाघ की निगरानी करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कान्हा, पन्ना नेशनल पार्क व वन विहार भोपाल की 40 सदस्यीय टीम बाघ को रेस्क्यू करने रायसेन पहुंची।इस टीम के साथ वन विभाग के करीब 100 कर्मचारी मिलाकर करीब 140 सदस्यीय टीम 10 दिन से बाघ को पकड़ने में जु़टी हुई थी। रायसने डीएफओ के अनुसार इस पूरे रेस्क्यू आपरेशन में करीब 25 से 30 लाख रुपए खर्च हो गया है।

पांच हाथियों के साथ की घेराबंदी

गुरुवार सुबह बाघ के मूवमेंट के कैद होने के बाद शहर से लगे हुए सुरई के जंगल में पांच हाथी के साथ टीम ने घेराबंदी की। करीब 12.30 बाघ झाड़ियों के पीछे नजर आया। इस पर टीम ने ट्रैंक्यूलाइजर गन की मदद से बाघ पर पर इंजेक्शन फायर किया, हालांकि बाघ बेहोश नहीं हुआ। बाघ यहां से चकमा देकर भागने में सफल हो गया। टीम करीब एक घंटे तक उसे जंगल में खोजती रही। करीब डेढ़ बजे बाघ दूसरी बार नजर आया। इस बार ट्रैंक्यूलाइजर गन से छोड़ा गया इंजेक्शन बाघ के पिछले हिस्से में लगा। बाघ वहां से भागा, लेकिन कुछ देर बाद इंजेक्शन ने असर दिखाया। करीब ढाई बजे बाघ के बेहोश होने पर टीम ने उसका रेस्क्यू किया गया।
10 दिन से कर रही थी टीम बाघ का रेस्क्यू

डीएफओ विजय कुमार ने बताया कि पिछले 30 दिनों से रायसेन वन मंडल का 100 का स्टाप कान्हा और पन्ना रिजर्व वन विहार की टीम, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम, कुछ एनजीओ, ईशा फाउंडेशन द्वारा बाघ को पकड़ने का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा था। पिछले 10 दिनों से टीम जंगल में ही रह रही थी। पांच हाथियों की भी इस काम में मदद ली गई। गुरुवार को बिना किसी नुकसान के रॉयल बाघ का रेस्क्यू किया गया।

150 किलोमीटर एरिया में घूम रहा था बाघ

बाघ का रेस्क्यू करने में सबसे बड़ा चैलेंज था कि बाघ की टैरेटरी काफी बड़ी थी। वह 150 किलोमीटर के एरिया में घूम रहा था। एक जगह शिकार करने के बाद यह बाघ दूसरी बार उस जगह पर नहीं आता था। इसके चलते बाघ को पकड़ने में काफी समस्या आ रही थी। कई बार तो टीम पूरी रात नहीं सो पाई। नौतपा में भी 44 डिग्री तापमान में जंगलों में टीम रेस्क्यू में जुटी रही।

एक माह पहले किया था तेंदूपत्ता श्रमिक का शिकार

बाघ ने रायसेन के भोपाल रोड के नीमखेड़ा में रहने वाले मनीराम जाटव का शिकार किया था। जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने के दौरान उनका सामना बाघ से हो गया था। बाघ ने शरीर का ज्यादातर हिस्सा खा लिया था। यह बाघ शहर से सटे गांव के साथ ही जंगल में चरने गए 12 से ज्यादा मवेशियों का भी शिकार कर चुका है।

36 गांव के लोगों के जंगल में जाने पर लगी थी रोक

बाघ के मूवमेंट के चलते वन विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से एक महीने पहले शहर के आसपास के 36 गांव के लोगों को घरों से अकेले नहीं निकलने और जंगल की ओर न जाने की बात कही थी। बाघ अक्सर ग्रामीण क्षेत्र सहित जंगलों में लोगों को दिखाई देता था। कई बार तो भोपाल रोड पर रोड क्रॉस करते हुए भी लोगों को दिखाई दिया। जिसका लोगों ने वीडियो भी बनाया था।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में रखा जाएगा बाघ

डीएफओ विजय कुमार के अनुसार रेस्क्यू किया गए बाघ को वरिष्ठ वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरो की सलाह पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा जा रहा है। यहां पर 5 से 6 दिन के लिए बाड़े में रखा जाएगा। यहां डॉक्टरों सहित वन विभाग की टीम स्वास्थ्य संबंधित जांच करेगी। इसके बाद बाघ को खुले में छोड़ा जाएगा। यह रॉयल बाघ आदमखोर नहीं है। नीमखेड़ा के जंगल में मनीराम जाटव का इस बाघ से सामना हो गया था। जिसके कारण बाघ को अपने बचाव में उन पर हमला किया गया था। यह रॉयल बाघ अधिकतर शहरी क्षेत्र में ही रहने का आदी है।

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