कहीं दूध समझकर जहर तो नहीं पी रहे आप..!!
शहर के दुधारु पशुओं की चारागाह बना नगर पालिका का ट्रेचिंग ग्राउंड में पॉलीथिन और दूषित खाद्य सामग्री खा रहा गौवंश

✓कहीं दूध समझकर जहर तो नहीं पी रहे आप
✓शहर के दुधारु पशुओं की चारागाह बना नगर पालिका का ट्रेचिंग ग्राउंड में पॉलीथिन और दूषित खाद्य सामग्री खा रहा गौवंश
परिधि ग्राउंड रिपोर्ट- 2
नगर पालिका द्वारा गौठाना स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में शहर के 33 वार्डों एवं साप्ताहिक बाजार का कचरा डम्प किया जा रहा है। हालांकि रहवासी क्षेत्र से सटा यह ट्रेचिंग ग्राउंड हमेशा विवादों में रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण के बहाने ट्रेचिंग ग्राउंड पर कभी कचरा प्रोसेसिंग तो कभी नाडेप के माध्यम से खाद बनाने से लेकर तमाम ताम-झाम नगर पालिका द्वारा किए गए।इसी ट्रेचिंग ग्रांउड पर पूरे समय शहर के दुधारु पशुओं का जमघट लगा रहता है। गाय-भैंस आदि मवेशी यहां पन्नी, पन्नी में भरा जूठन, हरी सब्जियों का कचरा या अन्य अपशिष्ट खाते नजर आते है, लेकिन कभी नगर पालिका ने इन मवेशियों को ट्रेचिंग ग्राउंड से दूर रखने के प्रयास तक नहीं किए। ट्रेचिंग ग्राउंड पर प्रतिदिन सैकड़ों मवेशी छोड़ दिए जाते है। जो दिन भर दूषित सामग्री का सेवन करते है। शाम होते ही यह मवेशी घरों को लौटते है। हैरत की बात यह है कि दुधारु पशुओं से मिलने वाले दूध को शहर की डेयरी में भी सप्लाई किया जा रहा है। जानकारों की माने तो सेहतमंद बनाने के लिए पिया जा रहा दुध लोगों की सेहत नासाज भी कर सकता है।
ट्रेचिंग ग्राउंड पर छिडक़ा जाता है रसायन
परिधि ग्राउंड रिपोर्ट के पहले एपिसोड में इस बात का उल्लेख किया गया था कि यहां बिना किसी सुरक्षा के मजदूरों के द्वारा कबाड़ बिनकर कबाड़ी को बेचा जाता है। मजदूरों की सुरक्षा पर जब ठेकेदार के कर्मचारी से सवाल किया गया तो उसके द्वारा दो टूक यह कहा गया था कि कचरे पर रसायन का छिडक़ाव किया जाता है। ताकि किसी तरह का संक्रमण मजदूरों को न हो। ऐसे में यह विचारणीय है कि मवेशी भी रसायन युक्त दूषित खाद्य एवं अखाद्य सामग्री का सेवन कर रहे है। खासतौर से ट्रेचिंग ग्राउंड पर फैली पॉलीथिन भी मवेशियों के पेट तक पहुंच रही है जिसकी वजह से वह संक्रमण का शिकार हो रहे है। पशु चिकित्सकों की माने तो पॉलीथिन की वजह से ज्यादातर मवेशियों की मौत हो रही है। कई बार पोस्टमार्टम के दौरान मवेशियों के पेट से भी पॉलीथिन निकलता है।
मवेशियों की चारागाह है ट्रेचिंग ग्राउंड
ट्रेचिंग ग्राउंड में भटक रहे मवेशियों के फोटो से ही स्पष्ट है कि शहर के ज्यादातर मवेशियों के लिए ट्रेचिंग ग्राउंड ही चारागाह बन गया है। पशु मालिकों भी अपने मवेशियों की चिंता नहीं है। नगर पालिका और ट्रेचिंग ग्रांउड का ठेका लेने वाले कबाड़ी को जब बच्चों एवं महिला पुरुषों की सुरक्षा और सेहत की फिक्र नहीं है मवेशियों के प्रति वह कितने गैर जिम्मेदार और असंवेनशील होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बहरहाल चिंता का विषय यह है कि ट्रेचिंग ग्राउंड पर दिन भर भटकने वाले मवेशियों से प्राप्त दुध पशु मालिकों द्वारा शहर की डेयरियों में बेचा जा रहा है और डेयरी से यह दुध घरों तक सप्लाई हो रहा जो लोगों को सेहममंद बनाने की बजाय उनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।