ट्रेचिंग ग्राउंड में खतरे के मुहाने पर आधा सैकड़ा जिदंगी!
सिंगल यूज प्लास्टिक, गीला-सूखा कचरा अलग करने वाले मजदूरों की न सुरक्षा का ध्यान, न स्वास्थ्य की परवाह

परिधि ग्राउंड रिपोर्ट- 1
✓ट्रेचिंग ग्राउंड में खतरे के मुहाने पर आधा सैकड़ा जिदंगी!
✓सिंगल यूज प्लास्टिक, गीला-सूखा कचरा अलग करने वाले मजदूरों की न सुरक्षा का ध्यान, न स्वास्थ्य की परवाह
गौरी बालापुरे पदम परिधि ग्राउंड रिपोर्ट बैतूल

नगर पालिका के ट्रेचिंग ग्राउंड की तस्वीरें यकीनन शहर के सैकड़ों मजदूरों के जीवन का वह आईना है जिसमें दुत्कार और घृणा भरी हुई है। इन तस्वीरों में जोखिम और जीवन पर संकट भी है जो शायद न तो नगर पालिका को नजर आ रहा है और न ट्रेचिंग ग्राउंड पर कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी लेने वाले ठेकेदार को। शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्र गौठाना में प्रतिदिन सैकड़ों टन कचरा डोर टू डोर कलेक्शन कर कचरा संग्रहण गाडिय़ों एवं ट्रेक्टरों के माध्यम से डम्प किया जा रहा है। इस ग्राउंड पर नगर पालिका द्वारा गीला-सूखा कचरा एवं सिंगल यूज प्लास्टिक अलग करने का ठेका दिया है। ठेकेदार द्वारा जिन मजदूरों के माध्यम से कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है वह सवालों के घेरे में है। नगर पालिका और ठेकेदार दोनों ही ट्रेचिंग ग्राउंड पर कचरा प्रबंधन में प्रयुक्त मजदूरों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे है। इन मजदूरों में छोटे बच्चे, महिला, पुरुष और बुजुर्ग तक शामिल है..ये मजदूर दो जून की रोटी के लिए सुबह होते ही कचरे और कबाड़ में जिदंगी तलाश करते नजर आते है, लेकिन सच यही है कि जिस ट्रेचिंग ग्राउंड को ये अपनी जीविका उपार्जन का जरिया बनाएं हुए है वहीं टे्रेचिंग ग्राउंड उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा जोखिम साबित हो सकता है, सिर्फ ठेकेदार और नगर पालिका के जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से।
कचरे और मलबे में बिना सुरक्षा घंटों रहते है मजदूर
नगर पालिका के गौठाना स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में रोजाना सैकड़ों क्विंटल कचरा डम्प किया जा रहा है। इस कचरे का प्रबंधन खासतौर से सिंगल यूज प्लास्टिक, कबाड़ एवं अन्य सामग्री को अलग करने का काम यहां नगर पालिका ने ठेके से दिया है। करीब 50 मजदूरों के माध्यम से ठेकेदार द्वारा गीला सूखा कचरा अलग करने एवं सिंगल यूज प्लास्टिक को अलग करने का काम कराया जाता है। 15 एकड़ में फैले कचरे के ढेर, मलबा, गंदगी, बदबू आदि के बीच मजदूर बिना जूते, हैंड ग्लब्स, बिना मास्क एवं अन्य किसी सुरक्षा साधनों के बिना दिन भर कचरे में काम की चीजे तलाश करते है। मजदूरों द्वारा संग्रहित किया गया प्लास्टिक एवं कबाड़ बेचकर ठेकेदार तो मोटा मुनाफा कमा रहे है लेकिन अपने फायदे के लिए मजदूरों की जान जोखिम में डालकर खिलवाड़ किया जा रहा है।
ठेकेदार से नहीं मिलते सुरक्षा उपकरण,नगर पालिका का भी नहीं ध्यान
ट्रेचिंग ग्राउंड पर सिंगल यूज प्लास्टिक अलग करने वाले मजदूर धनराज एवं सोनू बताते है कि उन्हें ठेकेदार और नगर पालिका द्वारा कभी भी कोई सुरक्षा उपकरण प्रदान नहीं किए गए। यहां बच्चे, महिलाएं एवं पुरुष सभी बिना जूते, बिना ग्लब्स और बिना मास्क लगाएं दिन भर कचरा अलग करते है। जबकि ठेकेदार द्वारा ट्रेचिंग ग्राउंड पर तैनात कर्मचारी अंकुश राठौर का कहना है कि मजदूरों को सभी सुविधाएं दी जाती है, वे ही इन साधनों का उपयोग नहीं करते। इसके अलावा कचरे पर रसायनों का छिडक़ाव किए जाने का भी दावा उनके द्वारा किया जा रहा है। हैरत की बात तो यह है कि नगर पालिका सीएमओ से लेकर स्वच्छता शाखा के जिम्मेदार भी इतनी बड़ी लापरवाही से अनजान है।
कचरा बेचने की वैकल्पिक व्यवस्था
नगर पालिका के स्वच्छता निरीक्षक संतोष धनेलिया की माने तो यह नगर पालिका द्वारा की गई वैकल्पिक व्यवस्था है। ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा प्रबंधन का यह ठेका नहीं है। कबाड़ी द्वारा फिलहाल ट्रेचिंग ग्राउंड से कबाड़, सिंगल यूज प्लास्टिक संग्रहित कराया जाकर उसे खरीदा जाता है। इसके एवज में नगर पालिका को कबाड़ी से 40 हजार रुपए प्रतिमाह प्राप्त होते है। ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा एकत्रित हो रहा था, इसलिए यह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
इनका कहना…
ठेकेदार नया है। उसे मजदूरों की सुरक्षा के संबंध में निर्देश दे दिए गए है। आज हर हाल में सभी मजदूरों को सुरक्षा किट मिल जाएगी।
ओमपाल सिंह भदौरिया, सीएमओ नगर पालिका बैतूल