जिन माननीय के कारण शिथिल हुए अटैचमेंट के नियम उन्हीं के क्षेत्र में उड़ रही धज्जियां
✓भीमपुर के छात्रावासों में अटैचमेंट का खेल, बीईओ भी 40 किमी दूर से लाए
परिधि न्यूज बैतूल/9300924744/
ग्राउंड रिपोर्ट- 2

आदिवासी बाहुल्य विकासखंड बैतूल का मैदानी हाल जानने के लिए वैसे तो कलेक्टर जिले में पदस्थापना के अगले ही दिन पहुंच गए थे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाएं भी देखी और कुछेक शैक्षणिक संस्थानों का भी निरीक्षण किया। अव्यवस्थाओं पर वह सख्त भी नजर आए। वैसे भीमपुर बैतूल जिले की दुखती रग है। यहां से बैतूल जिले के विकास, शिष्टाचार और भ्रष्टाचार की गहराई और ऊंचाई दोनों को आसानी से नापा जा सकता है। हैरत की बात यह है कि यहां मुख्यालय सहित अंचलों में प्रमुख पदों पर पदस्थापना के लिए होड़ मची रहती है यही वजह है कि अपनी पदस्थापना के लिए अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक और अधीक्षक मोटी रकम भी खर्च करने से पीछे नहीं हटते। भीमपुर सहित अन्य आदिवासी अंचलों का फंडा है पहले पदस्थापना के लिए खर्च करों फिर इतना कमाओं कि मूल खर्च तो वसूल हो जाए और जिस वजह से पोस्टिंग करवाई है वह मंशा भी पूरी हो जाए। खासतौर से यहां छात्रावासों में अधीक्षक बनने की होड़ रहती है। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों के अधीक्षक तब तक नहीं हट सकते जब तक उन्हें निलंबित न किया जाए या उनका विरोध नही होता। बहरहाल हम बात कर रहे है यहां चल रहे है अटैचमेंट के खेल की। वर्ष 2024-25 के शीतकालीन सत्र में इसी क्षेत्र के माननीय ने अटैचमेंट पर विधानसभा में सवाल उठाए थे, लेकिन विडम्बना यह है कि उन्हीं की विधानसभा क्षेत्र में अधिकारी सख्ती से अटैचमेंट खत्म नहीं कर पाये। आलम यह है कि अधीक्षक के साथ-साथ बीईओ तक को 45 किमी दूर से भीमपुर अटैच किया है।
भीमपुर के कुछ छात्रावासों की स्थिति पर एक नजर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक शाला माकड़ा से शिक्षिका को मूल पदस्थापना से 15 किमी दूर कन्या आश्रम नांदा में अटैच किया गया है। इसी तरह प्राथमिक शाला गुराडिय़ा से वर्ग तीन की शिक्षिका को उत्कृष्ट बालिका छात्रावास का अधीक्षक बनाया गया। प्राथमिक शाला लक्कड़ जाम की शिक्षिका चुनालोमा कन्या आश्रम में तो इमलीढाना की शिक्षिका रतनपुर छात्रावास की जिम्मेदारी सौपी गई है। आलम यह है कि रतनपुर की शिक्षिका चिचोली कन्या आश्रम में अधीक्षक नियुक्त की गई है। यह स्थिति जिले के कई अन्य छात्रावासों में भी है। उक्त स्थिति से साफ है कि अटैचमेंट के लिए नियमों की शिथिलता पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। क्षेत्र में 15 किमी से 50 किमी की दूरी पर स्थिति शालाओं में पदस्थ शिक्षकों को मूल पदस्थापना से अलग छात्रावास अधीक्षक बनाया गया है, किन नियमों के आधार पर यह नियुक्ति की गई यह जांच का विषय है। जानकारी के अनुसार नियम शिथिल किया जाकर 7 किमी के दायरे में अटैचमेंट किया जाना मान्य किया गया था। इससे अधिक दूरी पर टीए डीए का भी प्रावधान है।
भैंसदेही विधायक ने विधानसभा में किया था प्रश्र
गौरतलब है कि भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के विधायक महेन्द्र सिंह चौहान ने वर्ष 2024-25 के विधानसभा सत्र में अटैचमेंट पर प्रश्र उठाया था। जिसके बाद मध्यप्रदेश के सभी विभागों में अटैचमेंट खत्म किया गया था। हैरत की बात यह है कि जिन माननीय ने अटैचमेंट पर आवाज उठाई थी सबसे ज्यादा सवाल अब उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र में उठ रहे है। बहरहाल अटैचमेंट की बिसात में कौन राजा, मंत्री, हाथी, घोड़ा और प्यादा है यह जांच का विषय है, क्योंकि माननीय की आवाज को भी भीमपुर में जिले के वरिष्ठ एवं विकासखंड के अधिकारियों ने नजरअंदाज करने का जोखिम उठाया है।
क्रमशः
