ब्यूरोकेट्स और डेमोक्रेट में प्रभावशाली संविदा पीजीएमओ डॉ अंकिता सीते की लैब होगी सील…! पर कब…?
➡️ब्यूरोकेट्स और डेमोक्रेट में प्रभावशाली संविदा पीजीएमओ डॉ अंकिता सीते की लैब होगी सील…! पर कब…?
➡️अवैध है स्वास्थ्यम लैब फिर कार्रवाई से परहेज क्यों?
परिधि न्यूज बैतूल

जिला अस्पताल में पदस्थ संविदा पीजीएमओ डॉ अंकिता सीते द्वारा अवैध रुप से संचालित स्वास्थ्यम लैब सीएमएचओ कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर है, बावजूद इसके इस अवैध लैब के संचालन पर स्वास्थ्य महकमें के आला अधिकारी नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहे है। डॉ अंकिता सीते जिले में ब्यूरोकेट्स एवं डेमोके्रट्स के बीच एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी एवं दखल से यह कयास लगाए जा रहे है कि भले ही लैब अवैध है, लेकिन उन पर कार्रवाई करना इतना आसान नहीं है। डॉ सीते के नियमविरुद्ध लैब संचालन का खुलासा होने के एक सप्ताह बाद भी इस लैब को सील करने, मशीनों को जब्त करने जैसे कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि अब तक एक नोटिस तक विभाग ने डॉ सीते को नहीं दिया है, जबकि विभागीय आला कमान जानते है कि डॉ सीते पांच साल की बान्ड अवधि में जिला अस्पताल में पीजीएमओ/ ब्लड बैंक अधिकारी के रुप में पदस्थ है।
नियमानुसार अनुबंध/बंध पत्र पर कार्यरत ब्लड बैंक अधिकारी (संविदा अधिकारी) अपनी निजी पैथोलॉजी लैब नहीं खोल सकती और न ही उसका प्रचार कर सकती है। यह पूरी तरह से सेवा नियमों और मेडिकल काउंसिल के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। इसके विपरीत डॉ सीते लम्बे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय है, इंस्टा, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वे अपनी स्वास्थ्यम पैथोलॉजी के अलावा जिला अस्पताल में भी रील बनाकर अपलोड करती रही है। उन्होंने सोशल मीडिया इंस्टा पर अलग से स्वास्थ्यम लैब का अकाउंट भी क्रियेट किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ सीते ने रील बनाने के लिए भी कर्मचारी नियुक्त किये है, जो खासतौर पर वीआईपी के साथ उनके मूवमेंट, प्रोग्राम आदि पर रील क्रियेट करते है इनके अस्पताल में रील बनाने पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है। इसके अलावा विभिन्न जांचे जो उनके द्वारा अपने घर की लैब में की जा रही है उसके भी कई वीडियो उनके इंस्टा अकाउंट पर देखे जा सकते है। डॉ सीते द्वारा अवैध लैब संचालन पर कार्रवाई को लेकर फिलहाल सीएमएचओ डॉ संजीव शर्मा का कहना है कि जल्द ही लैब सील करने की कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल देखना यह है कि अवैध लैब सील करने के लिए सीएमएचओ कार्यालय से टीम 500 मीटर की दूरी कितने दिनों में तय करेगी।
जिम्मेदारों का गैर जिम्मेदाराना रवैया आखिर क्यों ?
मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम और स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, कोई भी सरकारी/संविदा डॉक्टर अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर व्यावसायिक रूप से क्लीनिक, नर्सिंग होम या पैथोलॉजी/बायोकेमिस्ट्री लैब स्थापित नहीं कर सकते। सरकारी/ संविदा डॉक्टर अपने निजी उपयोग या घर पर ऐसी कोई भी जांच मशीन (जैसे पैथोलॉजी उपकरण, एक्स-रे, या यूएसजी) नहीं रख सकते जिसके लिए व्यावसायिक लाइसेंस की आवश्यकता होती है। गौरतलब है कि जिला अस्पताल की संविदा ब्लड बैंक नोडल अधिकारी यदि निजी लैब चलाती है, तो सरकारी अस्पताल के मरीजों को अपनी निजी लैब में रेफर करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, जो कि भ्रष्टाचार और नैतिक कदाचार की श्रेणी में आता है। सरकारी/संविदा अधिकारी होने के नाते वह किसी भी निजी व्यावसायिक गतिविधि का विज्ञापन या प्रचार-प्रसार नहीं कर सकती। गौरतलब है कि डॉ सीते के मामले में उक्त दिशा निर्देशों की बात करें तो जिला अस्पताल से अधिकांश मरीज स्वास्थ्यम लैब में रेफर हो रहे है। यदि जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग इसकी निष्पक्ष जांच कराते है तो स्थिति पूर्णत: स्पष्ट हो जाएगी, कि डॉ सीते सरकारी अस्पताल को अपने निजी व्यवसाय के प्रचार-प्रसार का माध्यम बना चुकी है। उनके द्वारा इंस्टा पर अपलोड रील में कई ऐसी रील्स है जिसमें सरकारी अस्पताल एवं निजी लैब की गतिविधि को जोडक़र दर्शाया गया है। इसके अलावा निजी एवं सरकारी लैब में जांच के लिए आने वाले मरीजों की फोटो एवं वीडियों भी उनके द्वारा बिना अनुमति लिए उपयोग किए जा रहे है।
नियमों के उल्लंघन पर यह कार्रवाई भी संभव
➡️ बॉन्ड राशि की वसूली: 5 साल का अनुबंध तोडऩे या उसकी शर्तों का उल्लंघन करने पर बॉन्ड की पूरी राशि पेनाल्टी के रूप में वसूल की जा सकती है।
➡️ लाइसेंस रद्द होना: नर्सिंग होम एक्ट और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अवैध निजी लैब को सील कर उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
लैब होगी सील-सीएमएचओ: डॉ शर्मा
स्वास्थ्यम लैब के अवैध होने की जानकारी सामने आने के बाद सीएमएचओ डॉ संजीव शर्मा ने परिधि न्यूज से चर्चा मेंं बताया कि उनके द्वारा तीन सदस्यीय समिति का गठन जिला स्तर पर किया गया है। जिसमें नगर पालिका, राजस्व एवं सीएमएचओ कार्यालय से अधिकारी शामिल है। समिति द्वारा जिले की सभी लैब की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्यम लैब को भी जल्द ही सील करने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इस मामले में अब तक सीएमएचओ ने डॉ अंकिता सीते को कोई नोटिस नहीं जारी किया है, न ही कोई स्पष्टीकरण ही मांगा गया है।
पांच साल के बंध पत्र पर जिला अस्पताल में पदस्थ है डॉ अंकिता सीते
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में संविदा पीजीएमओ डॉ अंकिता सीते को ब्लड बैंक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में 13 अगस्त 2019 को उन्हें संविदा चिकित्सा अधिकारी के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई थी। वर्ष 2024-25 में स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम पूर्ण करने की वजह से एनएचएम द्वारा इन्हें बंध पत्र चिकित्सा के रुप में पीजीएमओ के पद, मासिक मानदेय 1 लाख 25 हजार रुपए पर ब्लड सेल जिला चिकित्सालय में पदस्थापना दी गई। फिलहाल वे पांच साल की बान्ड अवधि में बतौर पीजीएमओ पदस्थ है। गौरतलब है कि 5 साल के अनिवार्य शासकीय सेवा बंध पत्र के दौरान डॉक्टर पूरी तरह से सरकार के अधीन और सरकार के प्रति जवाबदेह होता है। एक एमडी पैथालॉजी होने से उसे शासन के नियमों की अवहेलना करने या शासकीय सेवा में रहते हुए निजी व्यवसायिक लैब खोलने की अनुमति नहीं मिल जाती। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र वर्ष 2025 की गाईडलाईन के पेज 20 पर नियम 18.6 में उल्लेख किया गया है कि संविदा अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के अन्य संस्थानों/ कार्यालयों में कार्य करने अथवा व्यक्तिगत तौर पर किसी भी प्रकार का व्यापार/व्यवसाय करना प्रतिबंधित होगा। नियम 18.7 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संविदा स्नातक/स्नातकोत्तर चिकित्सा अधिकारियों के लिए निजी पै्रक्टिस हेतु लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग मप्र शासन द्वारा जारी दिशा निर्देश लागू होंगे।

पैथोलॉजी लैब को व्यावसायिक रूप से संचालित करने यह अनुमतियां भी जरुरी
➡️ क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण: क्लीनिक पे के अनुसार मध्यप्रदेश के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत लैब का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। डॉ अंकिता द्वारा पंजीकरण के लिए किया गया आवेदन पूर्व से ही उनके संविदा अधिकारी होने की वजह से निरस्त किया जा चुका है। बावजूद इसके उनके द्वारा स्वास्थ्यम लैब का अवैध रुप से संचालन किया जा रहा है।
➡️ बायो-मेडिकल वेस्ट ऑथराइजेशन: लैब से निकलने वाले कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति और किसी अधिकृत बायो-मेडिकल वेस्ट एजेंसी के साथ अनुबंध जरूरी है। स्वास्थ्यम लैब का यह अनुबंध छिंदवाड़ा की कंपनी में है। जानकारी के अनुसार डॉ सीते की लैब से बायोवेस्ट एजेंसी की गाड़ी को दिया जाता है।
➡️ गुमाश्ता / शॉप एंड एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस: स्थानीय नगर पालिका से व्यावसायिक संचालन के लिए गुमाश्ता लाइसेंस लेना जरुरी है, डॉ सीते द्वारा चन्द्रशेखर वार्ड स्थित आवास में व्यवसायिक लैब का संचालन किया जा रहा है। फिलहाल यह जानकारी में नहीं है कि नगर पालिका से लैब संचालन के लिए एनओसी, फायर एनओसी एवं गुमास्ता लाईसेंस प्राप्त किया गया है या नहीं।
➡️ जीएसटी रजिस्ट्रेशन: वित्तीय लेनदेन और उपकरणों की खरीद के लिए जीएसटी नंबर अनिवार्य है। जो स्वास्थ्यम लैब की रिपोर्ट्स पर अंकित नहीं है।
यदि व्यवसायिक लैब का संचालन करना ही है तो यह विकल्प बेहतर
डॉ अंकिता सीते यदि संविदा अधिकारी के रुप में रहते हुए निजी लैब संचालित करना चाहती है तो नियमानुसार यह संभव नहीं है। जानकारों की माने तो वे अपना इस्तीफा देकर एक एमबीबीएस एमडी पैथालॉजी होने के नाते नर्सिंग होम एक्ट और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के सभी प्रावधानों का पालन करते हुए स्वास्थ्यम लैब का स्वतंत्र रुप से संचालन कर सकती है। इसके लिए डॉ आनंद मालवीय, डॉ सौरभ राठौर, डॉ प्रतिभा रघुवंशी सहित अन्य एमबीबीएस, एमडी डॉक्टर्स उदाहरण भी है जिन्होंने शासकीय सेवा छोडक़र अपना चिकित्सकीय व्यवसाय प्रारंभ किया। डॉ अंकिता सीते एमडी पैथालॉजी है उनका मानना है कि वह लैब चला सकती है, लेकिन गाईडलाईन और शासन के नियमों के विरुद्ध वे यदि निजी लैब संचालित कर रही है तो वह अवैध ही है।
इनका कहना…
तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है जिसमें राजस्व, नगरपालिका और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल है। अवैध स्वास्थ्यम लैब सील की जाएगी।
डॉ संजीव शर्मा, सीएमएचओ बैतूल
नगर पालिका से एनओसी प्राप्त की है या नहीं यह जानकारी निकलवानी पड़ेगी। फिलहाल हमारी जानकारी में नहीं है।
नवनीत पाण्डेय, सीएमओ नगर पालिका बैतूल।