क्लीनिक सील होने के दूसरे दिन झोलाछाप फिर पकडऩे लगा मरीजों की नब्ज, बंगाली डॉक्टर को किसका संरक्षण..?
➡️बीएमओ के आवेदन पर भीमपुर पुलिस चौकी में देहाती नाल पर कायमी, असल नंबर के लिए चिचोली थाने भेजा गया प्रकरण
गौरी बालापुरे पदम परिधि ग्राउंड रिपोर्ट-1

भीमपुर विकासखंड के चिखली ग्राम में अवैध रुप से फर्जी डॉक्टर द्वारा संचालित किए जा रहे 8 बिस्तरों वाले अस्पताल पर स्वास्थ्य, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई के बाद सील तो कर दिया लेकिन अगले दिन फिर इस झोलाछाप डॉक्टर द्वारा मरीजों के उपचार किए जाने की जानकारी सामने आने लगी है। यह आरोप किसी और ने नहीं संयुक्त टीम द्वारा सील किए गए मेडिकल पर काम करने वाले कर्मचारी ने लगाए है जिसके विरुद्ध अवैध मेडिकल संचालित करने पर कार्रवाई की गई और मेडिकल सील कर दिया गया है। कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर की गई छापामार कार्रवाई के बाद बीएमओ की शिकायत पर भीमपुर चौकी में देहाती नालसी लेख कर चिचोली थाने में असल कायमी हेतु प्रस्तुत किया गया।
प्रथम सूचना में तथ्य

बीएमओ पंकज उईके द्वारा आरोपी जामिनी विश्वास द्वारा अवैध रुपसे क्लीनिक संचालित करते हुए चिकित्सक के रुप में उपचार करने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया गया जो धारा 24 मप्र राज्य आर्युविज्ञान अधिनियम धारा 319 बीएसएन धारा 18 सी औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 का पाये जाने से जामिनी कुमार पिता जानकीनाथ विश्वास उम्र 59 साल निवासी चिखली चौकी भीमपुर थाना चिचोली के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। चौकी प्रभारी को बीएमओ द्वारा दिए गए आवेदन – कार्यालय खंड चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भीमपुर जिला बैतूल मप्र क्रमांक/कार्या/2026/1839 भीमपुर दिनांक 05/10/2026 में आरोपी जामिनी विश्वास द्वारा अवैध रुप से क्लीनिक संचालित करते हुए चिकित्सक के रुप में उपचार करने संबंधी है। आवेदन में उल्लेख है कि 4 अक्टूबर को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश अनुसार प्राप्त शिकायत के आधार पर 5 अक्टूबर 2026 को ब्लाक स्तरीय स्वास्थ्य टीम, राजस्व विभाग अधिकारी तहसीलदार एवं चौकी प्रभारी के साथ ग्राम चिखली भीमपुर में स्थित लक्ष्मी विश्वास मेडिकल स्टोर एवं कृषि सेवा केन्द्र में अवैध रुप से क्लीनिक संचालित पाया गया। टीम द्वारा भारी मात्रा में अवैध दवाईयां, इंजेक्शन, आई बॉटल एवं अन्य इंस्टूमेंट बरामत की गई एवं जिसमें आठ बिस्तरीय क्लीनिक संचालित पाया गया। निरीक्षण के दौरान कलीराम कास्दे निवासी माकड़ा 48 वर्ष, सगरति पति रमेश्वर 38 वर्ष निवासी चिखली एवं अन्य छह मरीजों का उपचार इंजेक्शन एवं बॉटल द्वारा करते पाया गया।
जन स्वास्थ्य को खतरा फिर भी जामिनी पर शिंकजा ढीला
बीएमओ पंकज उईके के आवेदन के आधार पर प्रथम सूचना में इस तथ्य को शामिल किया गया कि संयुक्त टीम की जांच में पाया गया कि आरोपी जामिनी विश्वास के पास कोई वैध चिकित्सकीय डिग्री नहीं है। मप्र मेडिकल काउंसिल में पंंजीयन नहीं हुआ है। क्लीनिक पंजीयन नर्सिंग होम संचालित करने की अनुमति नहीं है। मौके पर भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाईयां, इंजेक्शन प्रतिबंधित दवाएं एवं उपयोग की हुई सिरिंज पाई गई, जिससे जन स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है। बीएमओ डॉ पंकज कुमार पिता बिरसा उईके उम्र 36 वर्ष के आवेदन पर जामिनी कुमार पिता जानकीनाथ विश्वास उम्र 59 वर्ष निवासी चिखली के विरुद्ध भीमपुर चौकी में देहाती नालसी अपराध क्रमांक 00/2026 धारा-319, औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 18 (सी), मप्र राज्य आर्युविज्ञान परिषद एक्ट धारा 24 (1956/1958) लेख कर असल कायमी हेतु थाना चिचोली में पेश किया गया। एफआईआर में जामिनी को स्पष्ट तौर पर झोलाछाप डॉक्टर इंगित किया है। बीएमओ द्वारा आवेदन के साथ पंचनामा की प्रति, मौके के फोटो, जब्त दवाईयों की सूची भी प्रस्तुत की गई।
जब्ती में क्या कितना कहीं नहीं जिक्र!

इस पूरे मामले में एक और बात सामने आई है कि करीब 7-8 बोरी मेडिकल वेस्ट जब्त किया गया, इसके अलावा कई प्रतिबंधित दवाएं एवं इंस्ट्यूमेंट की भी जब्ती बनाई गई लेकिन स्वास्थ्य एवं पुलिस दोनों ही महकमें इसे गोपनीय मामला बताकर पल्ला झाड़ रहे है। जामिनी विश्वास का क्लिीनिक सील करने के बाद भारी भरकम राशि देकर की बंदरबाट की चचाएं पूरे क्षेत्र में हो रही है। संयुक्त टीम की छापामार कार्रवाई में गुर्जर मेडिकल को सील कर दिया गया जो सतीश चौधरी के लाइसेंस पर संचालित था और छापे के दौरान मेडिकल पर कर्मचारी अनूप पिता बाबूलाल कास्दे मौजूद था। यहां दो बिस्तरीय क्लीनिक संचालित था। मौके पर पंचनामा बनाकर क्लीनिक ओर मेडिकल को सील कर दिया गया। पुलिस ने डॉ जामिनी पर लगाई गई धाराओं के अंतर्गत ही अनूप कास्दे पर भी प्रकरण दर्ज किया गया है ।
इन धाराओं से जामिनी को दूर रखना संरक्षण या कुछ और..!
जानकारों की माने तो जब कोई फर्जी डॉक्टर क्लिनिक या अस्पताल खोलकर मरीजों को भर्ती करता है तो उस पर धारा बीएनएस 319-2, 318-4, 110 के तहत प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। बीएनएस की धारा 319-2 (आईपीसी धारा 419) फर्जी पहचान(डॉक्टर न होते हुए भी खुद को डॉक्टर बताना- संज्ञेय एवं जमानती अपराध)-तीन साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनो, 318-4 बीएनएस (आईपीसी 420) लोगों के स्वास्थ्य के साथ छल कर उनसे पैसे वसूलना-सात साल तक कठिन जेल और जुर्माना(संज्ञेय एवं गैर जमानती अपराध), 110 बीएनएस संज्ञेय एवं गैर जमानती अपराध (आईपीसी 307)यदि गलत इलाज या बिना योग्यता के गंभीर इंजेक्शन दवा देने से मरीज की जान पर बन आती है-10 साल तक की जेल से लेकर आजीवन कारावास। नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 की धारा 34 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन एलोपैथी चिकित्सा का अभ्यास करने पर एक वर्ष की जेल या 5 लाख तक जुर्माना दोनों का प्रावधान। इसके अलावा राज्य उपचर्यागृह अधिनियम के तहत बिना वैध लाईसेंस और बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल/क्लीनिक चलाना और मरीजों को भर्ती करना इस अधिनियम के तहत भी सीलिंग और भारी जुर्माने की कार्रवाई होती है। गौरतलब है कि जामिनी विश्वास के परिवार में उनका बेटा जयंत विश्वास और उनकी बहू भी मरीजों का उपचार करती है। जब संयुक्त टीम मौके पर पहुंची तब जामिनी की बहू मरीजों के पास ही मौजूद थी और उपचार भी कर रही थी।

जामिनी के अवैध अस्पताल पर छापामार एवं सील करने की कार्रवाई के बाद जामिनी द्वारा अगले दिन अपने घर के प्रथम तल पर खुले परिसर में फिर मरीजों का उपचार शुरु कर दिया। इससे यह तो स्पष्ट है कि प्रशासन की सख्ती पर जामिनी का विश्वास भारी पड़ गया है। न उसे किसी कार्रवाई का डर है और न ही प्रशासन के नियमों का। क्षेत्र में चर्चा है कि जानबूझकर कमजोर धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया जाकर जामिनी को संरक्षण दिया गया गया है। जबकि जानकार कहते है कि ऐसे गंभीर मामले में पुलिस आरोपी को तत्काल नहीं छोड़ सकती क्योंकि यह लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए ऐसे मामलों में जमानत का फैसला पुलिस नहीं बल्कि न्यायालय करता है।
जांच में कहां गायब हो गया जयंत विश्वास..?

इस पूरे मामले में एक और तथ्य को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। बीएमओ पंकज उईके के आवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि संयुक्त टीम में लक्ष्मी विश्वास मेडिकल स्टोर एवं कृषि सेवा केन्द्र में अवैध रुप से क्लीनिक संचालित पाया गया। यहां से भारी मात्रा में अवैध दवाईयां, इंजेक्शन आईबी बॉटल एवं इंस्टूमेंट बरामद किए गए, भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाईयां, इंजेक्शन प्रतिबंधित दवाएं भी पाई गई, लेकिन लक्ष्मी विश्वास मेडिकल स्टोर के संचालक जयंत विश्वास के नाम पर न तो अपराध कायम किया गया न ही जांच में कहीं नाम लिया गया। पुलिस ने जामिनी, जयंत और अनूप को चौकी लाकर पूछताछ भी की थी। क्षेत्र वासियों का कहना है कि जब सतीश चौधरी के नाम से संचालित मेडिकल को सील किया गया तो लक्ष्मी मेडिकल को किस आधार पर छोड़ दिया गया। सूत्रों के मुताबिक पूरे मामले से जयंत को दूर रखने के लिए भारी लेन-देन किया गया है। बहरहाल पूरा मामला कलेक्टर डॉ सोनवणे के संज्ञान में परिधि न्यूज द्वारा लाकर न्यायोचित कार्रवाई की अपेक्षा की है। इधर पूरे जिले से झोलाछाप डॉक्टरों की जानकारी लगातार प्राप्त हो रही है। इस संबंध में परिधि ग्राउंड रिपोर्ट में सभी 5वीं से 10वीं पास तक के डॉक्टरों के खेल को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में एसपी वीरेन्द्र जैन से उनके मोबाईल नंबर पर सम्पर्क किया गया, उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।