Betul and MP Latest News

सीएम साहब भैंसदेही सतपुड़ांचल में आपका स्वागत है…कुकरु को पर्यटन हब बनाईए साथ ही इसी क्षेत्र के दर्जनों ग्रामों के लोगों के जख्मों पर मरहम का फाहा भी रख जाईए….!

➡️यदि मोबाईल पर बात करनी होगी तो सीएम को भी आना होगा कुकरु से खामला…!

➡️शाम होते ही इन तीन गांवों में हो जाता है अंधेरा, तीन गांव के लोग गेंहू पिसवाने जाते है महाराष्ट्र
➡️भोडिया कुंड से एम्बुलेंस को कॉल करो तो अमरावती में बजती है घंटी, नहीं आती एम्बुलेंस
➡️बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और मोबाईल नेटवर्क को तरसता भैंसदेही का कोरकांचल
गौरी बालापुरे पदम/परिधि न्यूज बैतूल


सीएम साहब भैंसदेही सतपुड़ांचल में आपका स्वागत है…कुकरु को पर्यटन हब बनाईए साथ ही इसी क्षेत्र के दर्जनों ग्रामों के लोगों के जख्मों पर मरहम का फाहा भी रख जाईए….!

यह आवाज है मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर बसे बैतूल जिले के दर्जनों ग्रामों की। जो आजादी के 79 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे है। जरा सोचिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कुकरु में आज 27 जून की शाम को आ रहे है। उनके लिए निसंदेह कंट्रोल रुम स्थापित किया गया है, ताकि उनके यहां रहने के दौरान कोई कम्यूनिकेशन गेप की स्थिति निर्मित न हो, जरुरत पडऩे पर पुलिस के वॉकी-टॉकी एवं अन्य संसाधन भी है जो उन्हें पूरे नेटवर्क में रखेगे लेकिन यह सुविधा नहीं होगी तो मुख्यमंत्री को दूरभाष पर बिना किसी अवरोध के बात करने के लिए कुकरु से तीन किमी दूर खामला ही आना पड़ेगा। वैसे तो बैतूल जिले को विकास के पर लग गए है, फोरलेन से जिले की चातुर्दिक सीमाएं घिर चुकी है। यहां के जीवन स्तर में आशातीत सुधार और रफ्तार देखने मिल रही है,महानगरों की तर्ज पर यहां के नगर विकसित हो रहे है, गांव भी विकास की राह पर सरपट भाग रहे है लेकिन विकास की रफ्तार जिले के आदिवासी बाहुल्य अंचलों के दर्जनों ग्रामों की उबडख़ाबड़ राह पर हाफती नजर आ रही है।
आज और कल प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जिले के ऐसे ही एक अंचल में दो दिन की मेहमानवाजी पर है। जिले की भैंसदेही तहसील में सतपुड़ा की गोद में बसे पर्यटन स्थल कुकरु में जिले के विकास पर बात होगी, घोषणाएं होगी। संभवत: बैतूल नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा देने, मां ताप्ती ट्रस्ट, कुकरु को पर्यटन हब बनाने एवं जिले को स्वास्थ्य, सडक़ , आद्योगिक विकास सहित अन्य घोषणा मुख्यमंत्री डॉ यादव कर सकते है, लेकिन जिस कुकरु में सीएम रुकने वाले है वहां यहां से 20 किमी की परिधि में बसे ग्रामों में पेयजल, स्वास्थ्य, मोबाइल, बिजली, नेटवर्क सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की घोषणा और उन पर शीघ्रता से अमल यदि हो जाए तो हजारों ग्रामीणों के लिए सीएम का यह दौरा वरदान साबित होगा।
➡️बुरहानपुर, ससोदा, धोत्रा का सवाल कब रोशन होंगे हमारे घर आंगन?
जिले के बानूर पंचायत के बुरहानपुर, ससोदा और धोत्रा इन तीन गांवों में करीब 400 परिवार रहते है। आजादी के 79 वर्षों में न जाने कितना विकास हुआ, लेकिन इन गांवों की सुध न जनप्रतिनिधि ले पाये और न ही तंत्र। आज भी इन तीन गांवों के लोग गेंहू पिसवाने के लिए महाराष्ट्र जाने विवश है। पानी के लिए नदी में झिरिया बनाना इनकी नियती है, इलाज के लिए आसपास कोई अस्पताल नहीं है, बच्चे महाराष्ट्र में शिक्षा प्राप्त करते है। शाम होते ही इन गांवों में अंधेरा छा जाता है। बिजली की मांग करते-करते एक के बाद एक पीढिय़ां दीए की रोशनी में जीवन गुजार रही है। ग्रामीणों ने कई बार शासन से मांग की है कि यहां स्कूल, पेयजल और बिजली लाई जाए, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार ने संज्ञान नहीं लिया। अब जब मुखिया ही इस क्षेत्र में है तो एक फिर ग्रामीणों की उम्मीदें जागी है कि जो उनका हक है संभवत: अबकी बार उन्हें मिल ही जाएगा।
➡️भोडियाकुंड से इमजेंसी कॉल लगाना मना है
जिस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं है उसी कुकरु से महज 4 किमी दूर है भोंडियाकुंड इस गांव के लोगों की भी अलग ही समस्या है। यहां से यदि कोई बीमार व्यक्ति के लिए आपाताकालीन सेवाओं एम्बुलेंस आदि के लिए कॉल करता है तो 108 एम्बुलेंस और जननी एक्सपे्रस के लिए लगाया गया कॉल महाराष्ट्र लग जाता है। कॉल सेवाओं पर उपलब्ध व्यक्ति द्वारा जब थाना-क्षेत्र आदि की जानकारी ली जाती है तो कॉलर को बता दिया जाता है कि उनका कॉल महाराष्ट्र में आपातकालीन सेवा के लिए लग गया है आप मध्यप्रदेश की सेवा के लिए सही नेटवर्क का चयन करें। ऐसे में ग्रामीण को अपने किसी रिश्तेदार या परिचित के सहारे एम्बुलेंस बुलवानी पड़ती है या निजी साधनों से मरीजों, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
➡️कुकरु में भी तो नहीं है नेटवर्क
यदि नेटवर्क की बात की जाए तो कुकरु में भी नेटवर्क की स्थिति छोड़-पकड़ ही है। कुकरु के लोग भी मोबाईल पर अपनों से बात करने के लिए नेटवर्क के डंडे तलाश करते है। हालांकि बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते क्षेत्र में जनजीवन को मूलधारा से जोडऩे के लिए प्रयास भी किए गए लेकिन उसके प्रतिकूल एवं प्रभावी परिणाम सामने नहीं आ पाए। दो साल पहले ही कुकरु और लोकलदरी में दो होम स्टे भी प्रारंभ किए गए थे लेकिन पर्यटकों के अभाव में वह भी ढाई दिन में अढ़ाई कोस ही चल पाए। हालांकि उम्मीद है कि पर्यटन हब के रूप में बैतूल के इस स्वर्ग को विकसित करने की पहल होगी तो कुकरु  के भाग्य के अंधेरा भी दूर हो जाएगा।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.