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खंडवा की स्क्रिप्ट पर अब बैतूल में भी सीरिज बना रहे AC साहब

➡️खंडवा की स्क्रिप्ट पर अब बैतूल में भी सीरिज बना रहे AC साहब

➡️नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार करवा चुके है जांच

परिधि पड़ताल बैतूल

जिले में आमद के बाद से ही विवादों से घिरे एवं वित्तीय अनियमिताओं के लिए आए दिन सुर्खियों में रहने वाले जनजातीय कार्य विभाग बैतूल के सहायक आयुक्त विवेक पाण्डे, खंडवा जिले में भी अनियमितताओं के लिए चर्चा में रहे है। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के गृह जिले में पदस्थ रहे विवेक पाण्डे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार भी भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके है। जून-2025 में बैतूल जिले में आमद देने के बाद से ही खंडवा की तर्ज पर ही बैतूल में भी सहायक आयुक्त की मनमानियां जारी है। यहीं वजह है कि अब लोग यह कहने लगे है कि सहायक आयुक्त ने खंडवा में जो स्क्रिप्ट लिखी थी उसकी सीरीज और एपिसोड बैतूल में बनाएं जा रहे है। ज्ञात हो कि फरवरी 2025 में तत्कालीन सहायक आयुक्त खंडवा विवेक पांडे के विरुद्ध आदिवासी विकास परिषद के जिला संगठन ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार से शिकायत की थी। जिन पर जांच और कार्रवाई के लिए उमंग सिंगार ने खंडवा कलेक्टर को पत्र लिखा था। मामले की जांच के लिए कलेक्टर के वास्ते संयुक्त कलेक्टर ने कमेटी बनाई थी बतौर अध्यक्ष बजरंग बहादूर,तत्कालीन एसडीएम खंडवा सहित दो सदस्यों में ईई पीडब्ल्यूडी हृदेय आर्य और ट्रेजरी ऑफिसर आरएस गवली को रखा गया था।
खंडवा में लग चुके है भ्रष्टाचार के आरोप


आदिवासी विकास परिषद खंडवा के अध्यक्ष के पत्र पर विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने कलेक्टर खंडवा को पत्र भेजकर 16 बिंदुओं की शिकायत की गई थी, नेता प्रतिपक्ष ने 16 बिंदुओं में से खासतौर पर छात्रों की सुविधाओं के छह मुख्य बिंदुओं की जांच करने का विशेष आग्रह किया था। नेता प्रतिपक्ष ने सहायक आयुक्त पर यह आरोप भी लगाए थे कि एसी द्वारा विधानसभा प्रश्नों एवं आयुक्त आदिवासी विकास को पत्र के माध्यम से गलत जानकारी भेजी गई और शासन को गुमराह किया गया।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में बैतूल में पदस्थ सहायक आयुक्त पर खंडवा पदस्थापना के दौरान वित्तीय अनियमितता के जो आरोप लगे है उनमें यह बिंदु शामिल है-
➡️ आवासीय विद्यालय में फर्जी फर्म के माध्यम से सामग्री क्रय की गई। करीब 10 स्कूलों में सीसीटीवी (एलईडी) की सप्लाई भोपाल के फर्म से क्रय की है। कलेक्टर की आपत्ति के बावजूद संबंधित फर्म को भुगतान कर दिया गया। मूल कीमत से अधिक राशि के बिल संस्था में लगाए गए और मामला सामने आया तो सहायक आयुक्त ने फाइल को गायब कर दी। उस फाइल पर क्रय समिति द्वारा भुगतान को निरस्त करने के लिए सिफारिश की गई है। जिस पर अपर कलेक्टर अंशु जावला खंडवा ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी।
➡️कन्या शिक्षा परिसर रजूर, सदलपुर व जामनी गुर्जर में अपूर्ण भवनों को आधिपत्य में ले लिया गया, जबकि तीनों भवनों में करीब 3-3 करोड़ रूपए का काम अपूर्ण एवं गुणवत्ताहीन होना पाया गया। आरोप है कि लेने-देन के आधार पर भवन आधिपत्य में ले लिया गया और मामले में आयुक्त आदिवासी विभाग को गलत जानकारी भेजी गई।
➡️सहायक ग्रेड-3 मीना पुंडगे को बिना सीपीसीटी परीक्षा के नौकरी पर रखा गया है। कोष एवं लेखा के आपत्ति के बावजूद उन्हें पद से हटाया नहीं गया। माध्यमिक शिक्षक राजेंद्र बामने पर शराब तस्करी का केस होने और उनके दो महीने महीने जेल में रहने के बाद भी सहायक आयुक्त ने उन्हें निलंबित नहीं किया। लेन-देन कर छात्रावास का प्रभार सौंप दिया।
➡️साल 2021-22 एवं 2022-23 में करीब 150 शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों से रोड किनारे के स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया। आयुक्त आदिवासी विकास के आदेश के बावजूद उन्हें मूल शाला में कार्यरत नहीं किया।
➡️80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग महिलाओं को कन्या छात्रावास का प्रभार सौंपा गया हैं। जबकि शासन के निर्देश अनुसार दिव्यांग या असक्षम व्यक्ति को छात्रावास की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाना चाहिए।
➡️ वरिष्ठ शिक्षक एवं प्रधान पाठकों को उनकी मूल संस्था से सामुदायिक विकासखंड खंडवा, पुनासा में अधीक्षक पद पर कार्य कराया जा रहा है। अशोक कलम प्रधानपाठक सुंदरदेव (खालवा) से पुनासा, संजय वानखेड़े प्रधानपाठक भगावा (खालवा) से खंडवा अधीक्षक बनाया गया।
➡️अनुसूचित जाति बालक छात्रावासों में सामग्री क्रय लाखों रुपयों का भ्रष्टाचार किया गया है। करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य इनके कार्यकाल में कराए गए है। जिनकी छत बरसात के पानी टपक रही है, प्लास्टर उखड़ रहा हैं।
➡️विवेक पांडेय के पास पिछड़ा वर्ग विभाग का अतिरिक्त प्रभार होने के की वजह से पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में कलेक्टर के बिना प्रतिनियुक्ति के अधीक्षकों नियुक्ति की गई है। जो अधीक्षकों की शिकायत जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद भी उन्हें बिना प्रतिनियुक्ति के अन्य विभाग में अधीक्षक बना दिया गया है। उक्त सभी शिकायतों पर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने इस जांच आदेश को टीएल प्रकरण में दर्ज किया था।
बैतूल में भी लग रहे आरोप, आखिर कब एक्शन लेंगे जिम्मेदार?
जून-2025 में जिले में खंडवा से स्थानांतरित होकर बैतूल आए सहायक आयुक्त विवेक पाण्डे पर वित्तीय अनियमितता, छात्रावासों में नियम विरुद्ध नियुक्ति, अधीक्षक के पद पर बने रहने के लिए अवैध वसूली के आरोप लगते रहे है। जिसकी शिकायत भी कलेक्टर से लेकर प्रभारी मंत्री तक से की जा चुकी है। खंडवा से बैतूल को मिली सौगात को कब तक केन्द्रीय राज्य मंत्री डीडी उईके, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, विधायक महेन्द्र सिंह चौहान, गंगा सज्जनसिंह उईके एवं अन्य सहेजेंगे यह तो वे ही जाने लेकिन जिस तरह से बच्चों के हितों की अनदेखी हो रही है वह उचित नहीं है। श्री पाण्डे को लेकर मीडिया द्वारा प्रभारी मंत्री को की गई शिकायतों के बाद जांच के लिए आश्वस्त भी किया गया था, लेकिन जांच का कुछ पता नहीं है। परिधि न्यूज द्वारा जनजातीय कार्य विभाग के 134 छात्रावासों में को लेकर जब-तब की जाने वाली खरीदी, कमीशनखोरी को लेकर भी सूत्रों एवं तथ्यों के आधार पर समाचार प्रकाशित किए गए है। दो छात्रावास में एक अधीक्षक, पति पत्नी को छात्रावासों की जिम्मेदारी, दूरी का ध्यान न रखते हुए अटैचमेंट, मुख्यालय पर न रहने वाले अधीक्षकों से लेकर दाल में कॉकरोच और पोहे में पत्थर तक के साक्ष्य के साथ शिकायत मिलने पर समाचार प्रसारित एवं प्रचारित हुए। माननीयों एवं कलेक्टर ने भी ट्रांसफर नीति 2026 के तहत कई बदलाव करने आश्वस्त किया है। अब देखना यह है कि ट्रांसफर नीति के तहत वर्षों से जमे छात्रावास अधीक्षकों को शैक्षणिक संस्थानों में विदा किया जाएगा या फिर 134 छात्रावास एवं आश्रमों में बालक/बालिकाओं के हिस्से की सुविधाओं से अधीक्षकों को मलाई खिलाई जाएगी। इसके अलावा कार्यालय में भी पदस्थ स्टाफ में कई ऐसे है जो एक ही कुर्सी पर वर्षों से टिके है। जिले में सबसे ज्यादा आवश्यकता जनजातीय कार्य विभाग को दुरस्त करने की है..

इनका कहना…

जांच प्रतिवेदन सौंपे काफी समय हो गया है। कई सारे बिंदुओं के आधार पर जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी गई थी।

बजरंग बहादूर, तत्कालीन एसडीएम खंडवा एवं अध्यक्ष जांच कमेटी

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