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मरीजों को तड़पता छोड़कर अब एंबुलेंस भी लेने लगी टी ब्रेक और ब्रेकफास्ट हॉल्ट

✓मरीजों को तड़पता छोड़कर अब एंबुलेंस भी लेने लगी टी ब्रेक और ब्रेकफास्ट हॉल्ट
✓मुलताई से रेफर गर्भवती महिला को लेकर जिला अस्पताल के लिए निकली 108 एंबुलेंस 20 मिनट तक ससुंद्रा जोड़ पर रुकी..!
गौरी पदम /परिधि पड़ताल बैतूल

जिले में 108 एंबुलेंस की सेवाओं को लेकर आए दिन शिकायतें मिलती है।कभी एंबुलेंस के देरी से पहुंचने तो कभी एंबुलेंस कर्मचारियों की अभद्रता तो कभी एंबुलेंस में सवारियां ढोने के मामले सामने आते रहे है।

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ताजा मामला तो शर्मसार करने वाला है जब मुलताई से रेफर गर्भवती महिला को प्रसव वेदना से तड़पता छोड़ एंबुलेंस के चालक और बाकी स्टाफ करीब 20- 25 मिनट तक चाय नाश्ते के लिए रुक गए। वह तो शुक्र है 108 एंबुलेंस क्रमांक  CG04NV6467 के स्टाफ की लापरवाही से गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु को कोई नुकसान नहीं हुआ।

जबकि पूर्व में कई ऐसे मामले भी सामने आए है जब 108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचने से पहले गर्भवती महिला का प्रसव एंबुलेंस में ही कराया गया। इस पूरे मामले में 108 एंबुलेंस के जिला प्रभारी अपने गैर जिम्मेदार स्टाफ का पक्ष लेते हुए महिला के अटेंडर की वजह से ही एंबुलेंस रोके जाने को वजह बता रहे है।
यह है पूरा मामला

गर्भवती महिला शीतल इवनाते पति सुशील इवनाते को लेकर सायरन बजाते हुए 108 एंबुलेंस के चालक सतीश घाटे मुलताई से शुक्रवार शाम को निकलते है और शाम 6.29 को यह एंबुलेंस ससुंद्रा जोड़ पर रोक दी जाती है। दर्द से तड़प रही महिला और उसके परिजनों को छोड़कर एंबुलेंस चालक सतीश और अन्य स्टाफ यहां संचालित होटल में नाश्ता और चाय पीते है।करीब 20 मिनट एंबुलेंस यहां खड़ी रहती है और परिजन एंबुलेंस चलने का इंतजार करते रहते है।

यह एंबुलेंस शाम करीब 7.20 पर जिला अस्पताल पहुंची। महिला को 7.26 बजे एडमिट कर लिया गया और 7.48 मिनट पर उसकी नॉर्मल डिलेवरी जिला अस्पताल में ही।एंबुलेंस की गति सीमा से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीच रास्ते में करीब 25 मिनट यह एंबुलेंस देरी से अस्पताल पहुंची।


चालक और स्टाफ को बचाने झूठ का सहारा
108 एंबुलेंस के जिला प्रभारी शुभम धोटे से जब परिधि न्यूज ने एंबुलेंस के बारे में विस्तृत रिपोर्टिंग चाही गई तो कुछ देर बाद रिटर्न कॉल पर उन्होंने बताया कि करीब 5 मिनट के लिए एंबुलेंस को ससुंद्रा जोड़ पर रोका गया था।गर्भवती महिला के अटेंडर को उल्टी हो रही थी इसलिए एंबुलेंस उन्हीं के द्वारा रुकवाई गई। एम्बुलेंस चालक  सतीश घाटे इस दौरान वॉशरूम के लिए और ईएमटी स्टाफ अटेंडर के लिए पानी लेने के लिए गया था। जानकारों की माने तो एम्बुलेंस में मरीज होने की स्थिति में बीच रास्ते में रोकना गलत है।इसके अलावा एंबुलेंस में उल्टी करवाने के लिए पॉलीथिन बैग की भी व्यवस्था होती है।इन सब से परे परिधि न्यूज के सूत्रों के मुताबिक एंबुलेंस चालक और बाकी स्टाफ होटल में नाश्ता करने रुके थे। यदि एंबुलेंस के जिला प्रभारी की बात सच है तो 6.29 को ससुंद्रा जोड़ पर रुकी एंबुलेंस को 7 बजे तक हॉस्पिटल पहुंच जाना था लेकिन एंबुलेंस करीब 25 मिनट की देरी से जिला अस्पताल पहुंची। जिला प्रभारी शुभम धोटे की माने तो एंबुलेंस में जिस महिला को जिला अस्पताल लाया जा रहा था वह ज्यादा क्रिटिकल भी नहीं थी।पर सवाल यह है कि जब महिला की स्थिति गंभीर नहीं थी तो उन्हें मुल्ताई से बैतूल क्यों लाया गया..?

भर्ती करने के करीब 23 मिनट बाद हुआ प्रसव

गर्भवती महिला की एडमिट पर्चे के मुताबिक शुक्रवार शाम 7.26 बजे एडमिट किया गया और मात्र 22 मिनट बाद 7.48 बजेउसका प्रसव जिला अस्पताल में हो गया। जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि 108 एंबुलेंस स्टाफ की यह लापरवाही भारी पड़ सकती थी।

इनका कहना…

आप मुझे डिटेल भेज दीजिए।यदि दोषी पाए जाते है तो 108 एम्बुलेंस स्टाफ पर नियमानुसार कारवाई की जाएगी।

डॉ रविकांत धुर्वे, सीएमएचओ बैतूल

यह रेफर केस था।महिला की नॉर्मल डिलेवरी 7.48 पर हुई है

डॉ जगदीश घोरे, सिविल सर्जन जिला अस्पताल बैतूल

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