Betul and MP Latest News

घोड़ाडोंगरी के एक ढाबे में बोटियों की पार्टी, हुकुम का इक्का जेब में…!

घोड़ाडोंगरी के एक ढाबे में
बोटियों की पार्टी
हुकुम का इक्का जेब में…!

 

परिधि न्यूज गॉसिप बैतूल
नाहक ही बैतूल जिले को पिछड़ा और गरीब जिला कहते है। भला जहां प्रकृति के अकूत भंडार हो वहां गरीबी कैसी। माचना ने जहां पीले सोने से लोगों को मालामाल किया है तो तवा के किनारे की बसाहट,जंगल एवं मैदानी क्षेत्र को काले सोने के खजाने से प्रकृति ने बख्शा है। बस लूट सकों तो लूट लो की तर्ज पर वर्षों से नदियों के किनारों को माफिया बस लूट रहा है, इस लूट को अंजाम देने के लिए मोहरा बनाया जाता है भी तो किसे?… भोले-भाले ग्रामीणों को। तवा नदी के किनारे और काले सोने के भंडार पर बसा डुल्हारा गांव इसका उम्दा उदाहरण है। जहां जमीन के नीचे से जान जोखिम में डालकर काला सोना निकालने वाले ग्रामीणों की हालत तो जस की तस है लेकिन ज्यादा मजदूरी का लालच देकर काम कराने वालों के व्यारे न्यारे हो गए।अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग बाहरी जिले एवं राज्यों के लोगों से सांठ-गांठ कर अकूत काले सोने का दो दशकों से दोहन कर रहे है। जब चोरी पकड़ में आती तो अपनी चोरी का साथी बनाने के साथ-साथ चोरी पकडऩे वाले को पेशगी के साथ-साथ बोटियों का भी साथी बना लिया जाता। बीते दिनों डुल्हारा में हो रहे खनन को लेकर राजा तो सख्त है लेकिन मंत्री- संतरी की स्थिति डावाडोल है। अब तक हम गंभीर थे, लेकिन एक उम्दा कहानी का शब्दांकन आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है…यह न हमारी आंखन देखी है, न कानन सुनी लेकिन है तो सच…यह किवंदती है, न लोकोक्ति लेकिन है तो फैक्ट…डर के आगे जीत है यही इस कहानी का सार है और इस रियल स्टोरी में पांच पात्र है…इस पर आप कितना भरोसा करते है और कितना सच इसे मानते है यह आपके विवेक पर निर्भर करता है…अंत में तय भी आपको ही करना है कि यह गॉसिप है या सच…परिधि का सच और झूठ से कोई सरोकार नहीं है…
प्रकृति की गोद में बसे ग्राम डुल्हारा में भोले-भाले आदिवासियों की जान को जोखिम में डालकर उन्हें कुछ घंटों के लिए हजार रुपए मजदूरी का लालच देकर धरती के गर्भ से काला सोना निकलवाया जाता,,,जब इस बात की हवा उड़ी तो हल्ला मच गया, फिर क्या एक दिन राजा साहब अचानक डुल्हारा पहुंच गए दल बल के साथ…और कह दिया धरती से काला सोना कोई निकाल न सके इसके लिए पुख्ता इंतजाम कर दो। राजा साहब तो आदेश देने के बाद लौट गए..लेकिन जिन साहेबान को इस आदेश का पालन करवाना था वह ठिठक गए। देर रात डुल्हारा से कुछ दूर घोड़ाडोंगरी के एक ढाबे में पांच चोरों की पार्टी में खनिज विभाग बड़े अधिकारी ने दस्तक दी। पांच पक्के दोस्त फगन डुल्हारा, प्रेम घोड़ाडोंगरी, विशाल-सत्येन्द्र भोपाल और दीपक उज्जैन के साथ, राजा साहब की आंखों का नूर बनने के लिए बैचेन इस बड़े अफसर ने जब गंभीर लहजे में कहा राजा साहेब तो किसी भी सूरत में मानेंगे नहीं…अभी तो काला सोना जहां है वहां रहने दो..वैसे भी उसको निकालने का दम किसी और में है नहीं। अभी थोड़ा रुक जाओ..डरने का नाटक करो फिर तो जीत है ही…चोरों ने भले ही पार्टी साहब को खुश करने के लिए दी थी, लेकिन जब काला सोना निकालने की फिलहाल मनाही का राग उन्होंने साहब से सुना तो सब के सब मायूस हो गए। हालांकि इस बात की राहत उन्हें है कि राजा साहब माने न माने पर हुकुम का इक्का फिलहाल उनकी जेब में है। घोड़ाडोंगरी के ढाबे में चोरों के साथ देर रात तक बड़े साहब की बोटियों की दावत उड़ाने की कहानी चौक-चौराहों पर सुनाई जा रही है।
You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.