बारालिंग तीर्थ के दर्शन के लिए ताप्ती नदी में बनाया पत्थरों का रास्ता जोखिम से भरा

✓बारालिंग तीर्थ के दर्शन के लिए ताप्ती नदी में बनाया पत्थरों का रास्ता जोखिम से भरा
✓काई वाले चिकने गोल पत्थरों पर स्लिप होकर घायल होते श्रद्धालु
मनोहर अग्रवाल परिधि न्यूज खेड़ीसावलीगढ़

प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी पुण्य सलिला मां ताप्ती नदी के तट स्थित पावन शिवधाम बारालिंग में आगामी 15 नवंबर से तीन दिन का मेला आयोजित किया जाएगा। कई वर्षों से यह मेला लग रहा है और मेले में व्यस्था की जिम्मेदारी जनपद पंचायत भैंसदेही की ग्राम पंचायत केरपानी के द्वारा कि जाती है। ताप्ती नदी के किनारे बारालिंग तीर्थ के दर्शन के लिए श्रद्धालु नदी पार करके जाते है।जिसके लिए हर वर्ष पंचायत द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाती है।इस वर्ष भी ग्राम पंचायत ने नदी के दोनों किनारों को जोड़ने के लिए पत्थरों से अस्थाई रास्ता बनाया है ताकि श्रद्धालु नदी के दूसरे तट पर पहुंचकर दर्शन कर सके। यहां प्रतिवर्ष हजारों तीर्थ यात्री मेले में आते है।उन्हे नदी तट की दूसरी ओर जाना जरूरी रहता है, क्योंकि बारह शिवलिंग के दर्शन के बिना यह मेले का तीर्थ का फल नहीं मिलता। इसके अलावा प्राचीन शिव मंदिर और फ्लैश्वर महादेव मंदिर आदि के दर्शन के लिए श्रद्धालु आते है।फिर भी यह मेला लगातार प्रशानिक उपेक्षा का शिकार होता रहा है। नदी पर पुल न होने से ताप्ती नदी के पत्थरों से ही नदी में रास्ता बना दिया जाता है। हजारों लोगों का आवागमन इस रास्ते से होता है। पत्थर पर फिसलने, लड़खड़ाकर गिरने ने कई लोग चोटिल होते है।क्षेत्र के लोगो का कहना है ।यहां स्थाई पुल बनाया जाना चाहिए।इस मामले में सरपंच संतराम बारस्कर का कहना है प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर ताप्ती नदी बारालिंग पर पानी में रास्ता बनाया जाता है जिसमें लगभग बीस से पच्चीस हजार खर्च होता है।अगर नदी पर सरकार पक्का पुल बना दे तो सीहार, बरामहु,बोथी सहित तीन गांव के हजारों लोग एवं बारालिंग में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।