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कोल माफिया के आतंक के सामने बौना मैदानी अमला…!

दुलारा के खजाने पर ढाई दशक से कोल माफिया का कब्जा

✓कोल माफिया के आतंक के सामने बौना मैदानी अमला…!
✓कोयले की दलाली में सबके हाथ काले
✓डुल्हारा के खजाने पर ढाई दशक से कोल माफिया का कब्जा
परिधि पड़ताल बैतूल

तवा नदी के किनारे बसा डुल्हारा ग्राम एवं इसके आसपास का क्षेत्र कोल माफिया के लिए करीब 20 वर्षों से दुलारा रहा है। जमीन को कभी मशीनों से तो कभी हाथ मजदूरी से लगातार खोद-खोदकर यहां से बेश्कीमती कोयला निकाला जाता रहा है। यह क्रम शाम ढलने के बाद और पौ फटने से पहले वर्षों से चल रहा है। डुल्हारा से दुलार के पीछे स्थानीय से लेकर अंतर राज्यीय स्तर तक माफिया सक्रिय है। पिछले 20 वर्षों में यहां तवा नदी के किनारे एवं बसाहट वाले क्षेत्रों में जमीन की खुदाई कर कोयला निकालने की कार्रवाई की जाती रही है। प्रशासन ने नकेल कसने की कोशिश भी की लेकिन 20 वर्षों में कभी भी प्रशासन पूरी तरह से कोल माफिया पर अंकुश लगाने में सफल नहीं हो पाया।
खदानों को बंद करने के लिए बस होते रहे वैकल्पिक प्रयास
डुल्हारा में कोयला खनन के लिए किए गए गड्ढों एवं सुरंगों को बंद करने के लिए संभवत: जिले में पदस्थ रह चुके हर कलेक्टर ने प्रयास किए, लेकिन किए गए हर प्रयास नाकाफी ही रहे, इसके पीछे वजह यही रही कि जिस भी मुहाने से कोयला खनन किया गया उस मुहाने को बंद करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई। कोयले के अवैध खनन की सूचनाएं मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी संयुक्त टीमों के साथ मौके पर पहुंचे और कोयला खनन के प्रमाण मिलने पर मुहानों को कभी पानी भरकर, कभी रेत भरकर तो कभी कटीली झाडिय़ों से बंद कर दिया, लेकिन यह स्थायी समाधान न होने के कारण कोल माफिया फिर इन खदानों को या नए गड्डों से कोयला निकालता रहा।
20 साल पहले स्थानीय माफिया फगन ने की थी कोयला खनन की शुरुआत
करीब 20 साल पहले यहां स्थानीय कोल माफिया फगन ने अपने रिश्तेदार सूरज के साथ मिलकर कोयले के अवैध खनन का काम शुरु किया था। जब फगन को यह बात समझ आई कि यह कोयला नहीं सोना है उसके बाद तो फगन के हौसले बुलंद होते चले गए और जिले एवं जिले के बाहर भी कोयला सप्लाई का सिलसिला शुरु हुआ। हालांकि कोरोना काल में पार्टनर की मौत के बाद फगन कुछ वर्ष शांत रहा, लेकिन एक बार फिर नए पार्टनर के साथ मिलकर उसने पूरा सिंडीकेट तैयार कर लिया है और कोयला खनन एवं परिवहन करने में लिप्त हो गया है।
आखिर क्यों कतराता है कार्रवाई करने में प्रशासन
कोल माफिया पर अंकुश लगाने में प्रशासन न जाने क्यों सख्त कदम उठाने से कतराता रहा है। वैकल्पिक तौर पर की गई कार्रवाई के कुछ दिनों बाद कोल माफिया फिर सक्रिय हो जाता है। गौरतलब है कि फगन अब अपने नए सिंडीकेट के साथ मिलकर डुल्हारा में सजीवन के घर के पास की खदानों से हर रात दो से तीन ट्रक कोयला जिले के बाहर भेज रहा है। सूत्रों का दावा है कि कोयले के कारोबार में काले हाथ हाथ सिर्फ कोल माफिया के ही नहीं अन्य जिम्मेदारों के भी है। कोयला खनन से लेकर उसे जिले से बाहर ईंट-भट्टों एवं फैक्ट्रियों तक पहुंचाना अकेले कोल माफिया के बस का तो है नहीं, इसके लिए बाकायदा प्लानिंग से इन कामों को निर्विघ्र अंजाम देने वाले नुमाइंदों को प्रतिमाह मोटी रकम दी जाती है। सूत्र बताते है कि हर माह पहुंचने वाली रकम की वजह से ही प्रशासनिक महकमा हो या जनप्रतिनिधि सभी मौन है। सूत्र के अनुसार डुल्हारा में कोयले के अवैध उत्खनन ही एक पंचायत के जनप्रतिनधि द्वारा कराया जा रहा है।
जाने प्रशासनिक कार्रवाई और कब-कब सुर्खियों में आया अवैध उत्खनन


?16 मई 2023: तीन टन कोयले से भरी ट्रेक्टर ट्राली जब्त की

मुखबिर की सूचना पर चोपना पुलिस ने ट्रेक्टर ट्राली में भरा करीब तीन टन कोयला जब्त किया था, जिसकी बाजार कीमत करीब 30 हजार आंकी गई थी। इस मामले में ट्रेक्टर क्रमांक एमपी 48 ए 9104 के अज्ञात चालक के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था।

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?16 फरवरी 2022: जेसीबी की मदद से बंद किए सात गड्ढे
कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने अवैध खनन के लिए खोदे गए 7 गड्ढों को जेसीबी की मदद से बंद करवाया। राजस्व पुलिस एवं खनिज विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई के पहले भी प्रशासनिक टीम ने तीन बार अवैध उत्खनन के लिए खोदे गए गड्ढों को पूरा था।
?6 मार्च 2021: तवा नदी के किनारे गुफा बनाकर किया जा रहा था खनन
तत्कालीन कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने टेमरु गांव में तवा नदी के किनारे गुफा बनाकर किए जा रहे कोयले के अवैध उत्खनन को बंद करवाया। इस दौरान पानी खींचने की एक मोटर, सात वॉल कटर, सात सब्बल, भारी संख्या में गैती और फावडे के अलावा तीन डम्फर डम्प कोयला जब्त किया गया था।
?6 वर्ष पहले भी बंद किए थे छह मुहाने
डुल्हारा गांव में अवैध कोयले की खदानों पर कार्रवाई करते हुए खनिज विभाग ने छह मुहाने बंद कराए थे। एक ही खदान के अंदर ही कायेला निकालने के लिए कई भागों में विभाजित किया गया था। तत्कालीन कलेक्टर तरुण पिथोड़े और एसपी काॢतकेयन के ने पांच दिन पहले निरीक्षण किया फिर फिर पुलिस और खनिज की संयुक्त टीम ने अवैध खदानों के छह मुहानों को जेसीबी की मदद से बंद कराया और अन्य मुहानों पर पानी छोड़ दिया था।
?10 जनवरी 2018: सुरंग के अंदर बिजली पहुंचाने की तस्वीरें आई सामने
कोयला खनन के लिए सुरंग के अंदर तक बिजली पहुंचाने की तस्वीरें सामने आई थी। ड्रिल से कोयला खनन किया जा रहा था। उस वक्त कोयला 5 हजार रुपए प्रति टन था और प्रतिदिन खदानों से 100 टन कोयला निकाला जा रहा था।
?26 मई 2017: जंगल के बीच 600 मीटर तक खुदाई कर निकाला कोयला
तवा नदी के किनारे गोलाई, दुलारा, सीवनपाट गांवों में ब्लास्टिग से कोयले के खनन के संबंध में जानकारी सामने आई थी। कोल माफिया के आतंक की कुछ तस्वीरे इस दौरान सामनें आई थी जो डराने वाली थी, जंगल के बीच कोयले की अवैध खदान के इस दौरान खनन किया जा रहा था और इस खदान की गहराई उस वक्त 600 मीटर से अधिक हो चुकी थी।

इनका कहना….
दुलारा में कोयले का अवैध उत्खनन बंद करने के लिए कलेक्टर से चर्चा की जाएगी। अवैध उत्खनन के लिए खोदे गए गड्ढों से हादसों की भी आशंका रहती है। मै इस संबंध में पुख्ता कारवाई किए जाने पर कलेक्टर से विस्तार से बात करुंगी।
श्रीमती गंगा उईके
विधायक घोड़ाडोंगरी

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