कोयला खनन पर कलेक्टर की दो टूक: इन चोट्टों को किसी भी स्थिति में बख्शेंगे नहीं
क्या डुल्हारा में कोयले की खदानों का पुख्ता इंतजाम करने के मूड में है DM साहब..?

✓कोयला खनन पर कलेक्टर की दो टूक: इन चोट्टों को किसी भी स्थिति में बख्शेंगे नहीं
✓क्या डुल्हारा में कोयले की खदानों का पुख्ता इंतजाम करने के मूड में है DM साहब..?
गौरी बालापुरे पदम / परिधि न्यूज बैतूल
जिले की चर्चित ग्राम पंचायत डुल्हारा में कोल माफिया के बुलंद हौसलों पर भले ही दो दशकों में पाबंदी नहीं लग पाई है, लेकिन अब यहां अवैध खदानों को हमेशा के लिए बंद करने लोगों के स्वर मुखर होने लगे है। जिले के संवेदनशील कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने भू माफिया, रेत माफिया एवं स्टोन के्रशर्स पर जिस तरह कार्रवाई पूर्व में की है उसके बाद यह कहा जा रहा है कि उनका अगला टारगेट कोल माफिया हो सकता है। जिले में वर्षों से चल रहे कोयले के अवैध कारोबार को लेकर उन्होंने परिधि न्यूज से अपनी मंशा भी साफ कर दी है कि इन चोट्टों को किसी भी स्थिति में बख्शेंगे नहीं।
जिले की घोड़ाडोंगरी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम डुल्हारा करीब दो दशकों से चर्चा में रहा है। कहने के लिए यह गांव छोटा सा है लेकिन सच तो यह है कि इस गांव ने कई लोगों को करोड़पति और लखपति बनाया है। वजह है यहां जमीन से कुछ फीट नीचे का कोयला। जानकारी के अनुसार तवा नदी के किनारे बसे ग्राम डुल्हारा, सिवनपाट, गोलाई सहित आसपास के क्षेत्र में कोयले का अथाह भंडार है। क्षेत्र के लोगों की माने तो डुल्हारा में कोयले की उपलब्धता को लेकर पूर्व में एक सर्वे भी सरकार द्वारा किया गया, लेकिन कभी डुल्हारा के आसपास के क्षेत्र में डब्ल्यूसीएल जैसी खदानों के लिए स्वीकृति नहीं मिल पाई। इसके पीछे आसपास की बसाहट या फिर जनप्रतिनिधियों या शासन के प्रयासों में कमी को जिम्मेदार माना जा सकता है। सरकार ने भले ही यहां के कोयले का दोहन करने की रणनीति न बनाई हो लेकिन एक कोयला माफिया ने अस्तित्व में आने के बाद डुल्हारा की जमीन को छलनी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
चोट्टों को बख्शेंगे नहीं के पीछे क्या है कलेक्टर की मंशा


डुल्हारा में हो रहे कोल खनिज के बेजा उत्खनन पर प्रशासनिक एक्शन आखिर क्या होगा यह जानने के लिए जब कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी से चर्चा की गई तो उन्होंने भी इस पर चिंता जाहिर की। साथ ही इन चोट्टों को किसी भी स्थिति में बख्शेंगे नहीं उनके यह शब्द कहीं न कहीं संकेत है कि डुल्हारा में अवैध कोल खनन को पूर्णत: बंद करने के जिले में प्रयास हो सकते है।
पहले दो रिश्तेदार अब भोपाल और होशंगाबाद का माफिया सक्रिय
डुल्हारा में कोराना काल के पहले तक स्थानीय माफिया फगन एवं सूरज का बोलबाला था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान सूरज की मौत ने फगन के हौसले कुछ हद तक पस्त किए। पिछले कुछ महीनों से एक बार फिर फगन ने अवैध कोयले के कारोबार में नई टीम बनाकर वापसी की है। इस बार फगन भोपाल अवधपुरी के सत्येन्द्र, होशंगाबाद सोहागपुर के लखन और घोड़ाडोंगरी निवासी प्रेम की तिगड़ी के साथ मिलकर कोयला खनन, परिवहन को अंजाम दे रहा है। संभाग और प्रदेश की राजधानी से कोल माफिया के जुड़ जाने से अब फगन ने कोयले के ट्रकों को जिले एवं प्रदेश के पार भी करना शुरु कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईंट भट्टों एवं फैक्ट्रियों में डुल्हारा का कोयला खपाया जा रहा है।
बिना प्रशासनिक अमले की मदद के संभव नहीं अवैध उत्खनन
सूत्र बताते है कि रात 9 बजे से दो बजे तक कोयला खनन किया जाता है, इसके बाद तीन बजे तक ट्रकों में लोडिंग कर कोयला दो अनुभाग, तीन थाने और दो पुलिस चौकियों के सीमाक्षेत्र से बाहर हो जाता है। न पुलिस कार्रवाई करती है न राजस्व एवं खनिज विभाग का अमला। हाल ही में कोयले के अवैध उत्खनन के समाचार सामने आने आने के बाद कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर दीपावली के पूर्व खनिज अधिकारी मनीष पालेवार, पुलिस एवं राजस्व की टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। यहां की जांच पड़ताल के बाद कलेक्टर को खनिज अधिकारी ने अपडेट भी दिया, लेकिन अगले ही दिन फिर खनन शुरु हुआ और मैदानी अमला दीपावली के दौरान और दीपावली के बाद से रोज हो रहे अवैध कोयला उत्खनन को नकारता ही रहा।
कोयला खदानों को पूरी तरह बंद करने की कार्रवाई आखिर क्यों नहीं?
बीस वर्षों में भी कोयले के गड्ढों एवं अवैध खदानों को पूर्णत: बंद करने की कार्रवाई पूर्व कलेक्टर एवं जनप्रतिनिधि नहीं कर पाये है। जानकार सूत्रों की माने तो इसके पीछे कोयले से होने वाली मोटी कमाई में सभी की हिस्सेदारी है, यदि हिस्सेदारी नहीं होती तो कोयले के गड्ढों एवं खदानों के मुहानों पर बसे आदिवासी गांवों की बसाहट को इस तरह जोखिम में भला कौन डालता। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि यदि चाहे तो दुलारा की सभी खदानों को तकनीकि तौर पर ब्लास्टिंग कर बंद करा सकते है, लेकिन इतने वर्षोंं में यह प्रयास किसी ने भी नहीं किए।
खनिज-राजस्व एवं पुलिस को करने होंगे ईमानदार प्रयास
यदि डुल्हारा में कोल माफिया को जड़ से उखाडऩा है तो इसके लिए प्रशासन की संबंधित इकाईयों को ईमानदार प्रयास करने होंगे। कलेक्टर के निर्देश के बाद यहां खनिज अधिकारी, पुलिस, राजस्व का अमला पहुंचा पहली बार साक्ष्य मिले और दूसरी बार सब ठीक जबकि इस बार न तो कोयले की खदानों को रेत-मुरम से पूरा गया, न इनमें पानी छोड़ा गया। खुले गड्ढों एवं नदी के किनारे बनी सुरंग के अलावा नए नए गड्ढे बनाकर कोयला खनन टारगेट बनाकर किया जा रहा है। यदि प्रशासन चाहे तो डुल्हारा बच सकता है लेकिन कोशिश ईमानदारी से करने की जरुरत है।
इनका कहना…
डुल्हारा में हो रहे अवैध उत्खनन को बंद करने के प्रयास किए जाएंगे। इन चोट्टों को किसी भी स्थिति में बख्शेंगे नहीं। रात में कायेले की चोरी होती है दूरस्थ क्षेत्र भी है, फिर भी प्रशासन अलर्ट है। जल्दी ही ठोस कार्रवाई की जाएगी।
नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी
कलेक्टर बैतूल