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दुकानों के बेदखल आदेश के 45 दिन बाद भी नहीं पहुचे राजस्व के जिम्मेदार अधिकारी

✓बैतूल कलेक्टर न्यायालय की आदेश की उड़ गई धज्जियां
✓राजनीतिक दबाव के कारण तत्कालीन दोषी सरपंच सचिव पर 45 दिनों बाद भी नहीं की गई वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई

✓दुकानों के बेदखल आदेश के 45 दिन बाद भी नहीं पहुचे राजस्व के जिम्मेदार अधिकारी

परिधि न्यूज संदीप वाईकर बोरदेही

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ग्राम पंचयात बोरदेही की दुकानों मे लगातार आनियमितताये भ्रष्टाचार की दीवारो पर लगतार पूर्व सरपंच और सचिव ने भ्रष्टाचार की लूट नामक कलर से पुताई की परतु किसी सरपंच सचिव ने मामले की 30सालो मे कभी उच्च जांच नहीं करवाई आखिर किस सरपंच और सचिव को मोहन सरकार के भ्रष्टाचारी अधिकारी का संरक्षण मिलते आ रहा है जिससे अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के लोगों को ग्राम पंचायत की दुकानों से वंचित रखा गया। 30 सालो मे अनेक वर्ष मे दुकानों की नीलामी ग्राम पंचयात के द्वारा अलग अलग सरपचं सचिव ने बिना किसी अधिकारी की अनुमति और नियमावली आरक्षण को ताक पर रखते हुए से कराई गई परतु आज तक आदिवासी बहुमूल्य को ग्राम पंचयात बोरदेही मे रोजगार के लिए दुकाने आवंटित नहीं की गई छोटी जाति वर्ग को ग्राम पंचयात की दुकानों से दूर रखा गया जब की ग्राम पंचयात बोरदेही मे कई दुकानों को कई बार दुकानदार के द्वारा ख़रीदा बेचा गया तो कई बार दुकानों को अधिक राशि मे किराये से बटा गया और एक दुकानदार ने तो पंचयात की दो दो दुकाने अपने नाम पर ले ली गई यहाँ सब काम ग्राम पंचायत के कर्ताधर्ता तत्कालीन सचिव सरपंच की उपस्थिति मे किया गया आप को बता दे की ग्राम पंचयात के अला अधिकारी के द्वारा रिश्वत की लकीरो से इस भ्रष्टाचार के काम को चार चांद लगाए गए परतु किसी उच्च अधिकारी ने इस मामले को जनता के सामने नहीं लाया।

आदेश क्रमांक 0014व -121वर्ष 2024-25 ग्राम पंचयात बोरदेही दुकान मामले मे तत्कालीन सरपंच सचिव को बैतूल कलेक्टर न्यायालय ने ठहराया दोषी परंतु विभाग के द्वारा 50 दिनों के बाद भी नहीं की गई कोई दंडात्मक वैधानिक कार्रवाई।

बोरदेही दुकान मामले से दुकानदार और तत्कालीन सरपंच सचिव दोषी दुकानों के बेदखल के आदेश पर दुकानदारों में आक्रोश गलती की सरपंच सचिव ने और भुगतना पड़ रहा है दुकानदारों कोआखिर ग्राम पंचायत बोरदेही मे 30 सालो से अनुसूचित जाति जनजाति के परिवारों को ग्राम पंचायत की दुकानों से क्यों रखा वंचित कई सालो से राजनैतिक पार्टी बड़ी बड़ी सरकार अनुसूचित जाति जनजाति की भविष्य की उत्तम कामना करती है और वोटो से समाज भला करने के खोखले वादे करते आ रही है और 30सालो मे कितने जनप्रतिनिधि आके चले गए परतु की जनप्रतिनिधि ने समाज के साथ हमेशा भेद भाव हीं किया गया।
जब ग्रामीणों ने पहली शिकायत ग्राम पंचायत मे दुकान संबंधी मामले में की गई परन्तु ग्राम पंचायत के द्वारा समस्या को नहीं सुना गया फिर ग्रामीणों के द्वारा यह शिकायत जनपद पंचायत आमला से की गई मामले की जांच करके यहाँ मामला बैतूल कलेक्टर के संज्ञान में लाया गया।बैतूल कलेक्टर के द्वारा ग्रामीणों को सुना गया समस्या को समझ गया तत्कालीन सरपचं सचिव और दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किये गए थे।
बैतूल कलेक्टर न्यायालय मे इस प्रकरण को 9महीने बैतूल कलेक्टर न्यायालय में चलाया गया फिर मामले की पूर्णता जांच के बाद दुकानदारों को दुकाने से बेदखल के आदेश किए गए परंतु दोषी सरपंच सचिव के खिलाफ में अधिकारियों के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई आदेश में साफ बैतूल कलेक्टर के द्वारा तत्कालीन सरपंच सचिव को दोषी ठहराया गया है परतु विभाग के द्वारा किसी प्रकार की सरपंच सचिव पर कार्रवाई नहीं की गई और जिन दुकानदारों ने नीलामी में दुकान ली उन दुकानदारों ने भी किसी सरपंच सचिव की शिकायत नहीं की गई इससे साफ जनता को नजर आता है की दुकानदारों और तत्कालीन सरपंच सचिव की मिली भगत से दुकानों का बिना आरक्षण के आवंटन किया गया होगा।

इनका कहना…

सोमवार मंगलवार नायब साहब आते है फिर कार्रवाई करवाते हैं।

शैलेंद्र बडोनिया, एसडीएम आमला 

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