Betul and MP Latest News

कथड़ी सीलने के धागे से सिल दी भाडरीढाना कन्या आश्रम की छात्राओं की फटी स्कूल ड्रेस

✓कथड़ी सीलने के धागे से सिल दी भाडरीढाना कन्या आश्रम की छात्राओं की फटी स्कूल ड्रेस
✓10 -11 साल की छात्राओं को पुरुष रसोईयों के भरोसे छोड़ बैतूल आ जाती है अधीक्षिका
✓जमीन पर लोट-पोट होते बच्चों को पढ़ाया जा रहा पाठ

परिधि ग्राउंड रिपोर्ट बैतूल- 2

बियाबान जंगल के रास्ते में गांव से अलग-थलग बने शासकीय कन्या आश्रम भांडरीढाना में रहने वाले 6 से 11 वर्ष तक बच्चों की दुर्दशा देखकर लगता है कि जिम्मेदार महकमें का इस ओर कोई ध्यान ही नहीं है। छात्राओं के कपड़े मैले कुचेलै होने के साथ-साथ फटे पुराने है। आलम यह है कि कई छात्राओं की ड्रेस कथड़ी सिलने के धागे से टकी हुई और कुछ की घुटनों से उपर तक पहुंच गई है। छात्राओं के पास ड्रेस में बेल्ट तक नही है। वर्षों से इन बालिकाओं को ड्रेस तक नहीं दी गई इससे यह साफ जाहिर है भाडरीढाना कन्या आश्रम में आदिवासी बालिकाओं को मिलने वाली सुविधाओं पर अधीक्षिका और यहां कार्यरत कर्मचारी मिलकर डाका डाल रहे है। बच्चों को न तो समय पर भोजन दिया जा रहा है न नाश्ता, यहां तक कि भंडारगृह की चाबिया भी रसोईये के भरोसे है।
कथड़ी सीलने के धागे से सिली गई उधड़ी स्कूल ड्रेस, शर्ट से बटन तक गायब
कन्या आश्रम वैसे तो 70 सीटर है लेकिन यहां कभी 30 से ज्यादा बच्चे नहीं रहते। परिधि न्यूज की टीम जब इस आश्रम में पहुंची थी उस वक्त भी यहां मात्र 26-27 बच्चे ही थे। इन बच्चों की गणवेश पर जब नजर पड़ी तो किसी की स्कूल ड्रेस हद से ज्यादा बड़ी थी तो किसी की हद से ज्यादा छोटी, बालिकाओं के कपड़े फटे हुए थे जिन्हें कथड़ी सीलने के धागे से दुरुस्त किया गया था। कुछ बालिकाओं की शर्ट पर बटन तक नहीं थे, खुली शर्ट पर स्कर्ट पहने बालिकाएं कन्या आश्रम में अध्ययन कर रही है। आश्रम में चल रही धांधलियों पर किसी भी जिम्मेदार की नजर नहीं है।
बच्चों को अनुशासन तक सिखाने में फेल साबित हो रहा स्टाफ

middle post add

कन्या आश्रम का संचालन अधिक्षिका ढिल्लो पांसे द्वारा करीब दो वर्षों से किया जा रहा है। यहां कक्षाओं में 10-15 बच्चों को अनुशासन का पाठ तक पढ़ाने में शिक्षिकाएं असमर्थ है। दो-दो शिक्षिकाओं की मौजूदगी में बालिकाएं लोट-पोट होकर कक्षाओं में अध्ययन कर रही है। इससे यह भी साफ है कि अधीक्षिका कन्या आश्रम के संचालन में ही अक्षम है। जब परिधि न्यूज की टीम इस कन्या आश्रम में पहुंची उस वक्त अधिकांश बालिकाए कक्षाओं में न होकर इधर-उधर भटक रहे थे।
बालिकाओ की सुरक्षा पर सवाल

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कन्या आश्रम की अधीक्षिका शाम होते ही, छात्रावास अपने रिश्तेदार रसोईये के भरोसे छोडक़र घर(बैतूल) आ जाती है। गौरतलब है कि छात्रावास में बच्चों के लिए नाश्ता एवं भोजन बनाने का काम दो पुरुष रसोईयों को सौंपा गया है। ऐसे में बालिकाओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे है। आदिवासी अंचल का यह कन्या आश्रम बसाहट से दूर है और आसपास जंगल क्षेत्र है ऐसे में यदि बालिकाओं के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
इनका कहना…
सोमवार को कन्या आश्रम का निरीक्षण किया गया, व्यवस्थाएं दुरुस्त के निर्देश अधीक्षिका को दिए गए है।
रमेश कौशिक, बीईओ भीमपुर

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.