काव्य संध्या में सृजन सखियों ने सुनाई मार्मिक कविताएं
'सत्यम शिवम सुंदरम' शिव आराधना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
✓काव्य संध्या में सृजन सखियों ने सुनाई मार्मिक कविताएं
✓ ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ शिव आराधना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
परिधि न्यूज बैतूल

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और अतिथि सत्कार से हुआ। इसके बाद सृजन सखी सम्मान कावले जी को प्रदान किया गया। बहुप्रतीक्षित काव्य संध्या का संचालन मीरा एंथोनी और अरुणा पाटनकर ने किया, जिससे माहौल खुशनुमा बन गया।संगीता राठौड़ ने ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ गाकर शिव आराधना की। दीपा मालवी ने ‘पिता का साया’ कविता के माध्यम से पिता का महत्व समझाया। ज्योति पांसे ने नारी शक्ति पर कविता प्रस्तुत की, जबकि मीना चांदे ने ‘निराली प्रकृति’ सुनाकर प्रदूषण पर प्रश्न चिन्ह लगाया। मधुबाला देशमुख ने ‘मां’ कविता के द्वारा मां की महत्ता पर प्रकाश डाला, और माधवी ठाकुर ने ‘वक्त’ कविता के द्वारा अपने लिए वक्त चुराने की बात की। विद्या निर्गुडकर ने ‘हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर’ के माध्यम से बुजुर्गों की अहमियत बताई। प्रतिभा देशपांडे ने पुरुषोत्तम रामचंद्र के जीवन की कथा कविता में पिरोई, और सरोजिनी कावले ने कृष्ण भक्ति से सराबोर कविता से माहौल भक्तिमय बना दिया।मंजू लंगोटे ने मेरा वजूद के द्वारा अपनी जीवन यात्रा को शब्द दिए। अरुणा पाटनकर ने ‘वृद्धावस्था कल और आज’ द्वारा कहा कि उनमें बाकी प्राण अभी हैं, और वे सामान नहीं हैं। मीरा एंथोनी ने मित्रता पर सुंदर रचना सुनाकर अच्छे मित्रों की पहचान बताई। मुख्य अतिथि, विशेष अतिथि और आयोजक मंजू बहन ने सभी सखियों और कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की। अंत में, सृजन सखी मधुबाला देशमुख ने अतिथियों और श्रोताओं का पूरे आदर के साथ आभार व्यक्त किया।