आप चले गए लेकिन सदा याद रखी जाएगी आपकी नेकी
जनआस्था के वरिष्ठ सहयोगी जीएस तिवारी को विनम्र श्रद्धांजलि
✓आप चले गए लेकिन सदा याद रखी जाएगी आपकी नेकी
✓जनआस्था के वरिष्ठ सहयोगी जीएस तिवारी को विनम्र श्रद्धांजलि
आलेख:संजय शुक्ला
संस्थापक जनास्था
बात करीब डेढ़ दशक पुरानी जरूर है लेकिन आज भी मेरी स्मृति में तरोताजा है। वरिष्ठ नागरिक होने के बाद भी जवानों जैसी ऊर्जा से हमेशा लबरेज रहने वाले आदरणीय जगदीश शरण (जीएस) तिवारी दान-पुण्य करने वाले महान इंसान थे।

वह जब भी कोई नेक कार्य करते थे तो उनकी यह खासियत होती थी कि इस हाथ से करने के बाद दूसरे हाथ को भी पता नहीं चलता था। मेरी उनसे मुलाकात भी कम दिलचस्प नहीं थी। मैं एक लावारिस शव के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान जिला चिकित्सालय में नेत्र शिविर चल रहा था। इसी दौरान उन्हें किसी ने मेरे बारे में बताया तो उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और रौबदार आवाज में कहा। क्या नाम है तुम्हारा? मैंने कहा संजय शुक्ला। उन्होंने फिर प्रश्र किया। यह काम तुम कब से कर रहे हो और क्यों कर रहे हो? मैंने कहा यह काम मैं 2006 से कर रहा हूं और इसलिए कर रहा हूं क्योंकि हर इंसान की इतनी तो आस्था होती है कि उसकी जहां कहीं भी सांसों की डोर टूटे तो कम से कम दो गज जमीन और ढ़ाई मीटर कपड़ा उसे नसीब होना चाहिए। लोगों की इस आस्था को पूरा करने काम जनआस्था के द्वारा मैं कर रहा हूं। मेरी बातों को सुनकर परम श्रद्धेय श्री तिवारी जी ने यही कहा कि बेटा उम्र छोटी है लेकिन आप काम बहुत बड़ा कर रहे हो। मैंने उनके पैर छूए और उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया और मैं चला गया। समय बीता कुछ दिनों बाद मेरे पास आरदणीय जगदीश शरण तिवारी जी का फोन आया और उन्होंने मुझे अपने कोसमी स्थित घर पर बुलाया। मेरे वहां पहुंचने पर उन्होंने े कुछ राशि दी और यह कहा कि इस बात का जिक्र कभी किसी से ना करना। और यह राशि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में खर्च करना और जब-जब रुपयों की आवश्यकता हो मुझसे बेहिचक लेकर जाना। मैं तीन-चार बार उनके घर गया और उन्होंने मुझे हर बार कुछ ना कुछ राशि जरूर दी। मैंने उन्हें दी गई राशि का पूरा हिसाब बताया तो उन्होंने मेरा एक हाथ दबाते हुए कहा कि बेटा तुम जो कर रहे हो उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है। हिसाब अपने पास रखो। चूंकि आज परम आदरणीय श्री तिवारी इस दुनिया में नहीं है तो मेरे दिल ने यह कहा कि उनके द्वारा किए नेक कार्यों के बारे में उनके जीते जी ना सही लेकिन दिवंगत होने के बाद सभी को जरूर पता चलना चाहिए कि लावारिसों, बेसहाराओं, जरूरतमंदों की मदद करने के लिए हरदम तैयार रहने वाला एक नेक, धर्मात्मा इस दुनिया से चला गया है। आदरणीय अंकल जी आप भले ही इस दुनिया से चले गए हों लेकिन आपके द्वारा किए गए पुण्य कार्य और नेकी सदा याद रखी जाएगी। ईश्वर आपको अपने श्रीचरणों में स्थान दें। और आपके परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
विनम्र श्रद्धांजलि…
