श्रीकांत सी कहानी बैतूल में भी: पूर्णत: दृष्टि बाधित दिलीप कुमार को मिली पीएचडी
✓श्रीकांत सी कहानी बैतूल में भी: पूर्णत: दृष्टि बाधित दिलीप कुमार को मिली पीएचडी
परिधि न्यूज बैतूल

कहते हैं मेहनत करने का जज्बा हो तो कोई भी विकलांगता आड़े नहीं आती है। ऐसा ही करिश्मा बैतूल के पूर्णत: दृष्टि बाधित दिलीप कुमार बारपेटे ने कर दिखाया है। उनके हौसले ने दिखा दिया कि कोई भी लक्ष्य अभेद नहीं होता है। बडोरा निवासी दिलीप कुमार बारपेटे को क्रिटिकल एप्रेसल ऑफ मिलटंस पोएट्री पर शोध उपरांत बरकतउल्ला विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सेहरा में अंग्रेजी विषय के उच्च माध्यमिक शिक्षक और स्व.सुखनंदन बारपेटे-श्रीमती गुलजा बारपेट के पुत्र श्री बारपेटे ने यह शोध कार्य डॉ.एसबी हसन के मार्गदर्शन में पूर्ण किया है। संभवत: दिलीप बारपेटे जिले के अंग्रेजी साहित्य के पहले पूर्णत: दृष्टि बाधित शोधकर्ता हैं जिन्हें यह उपाधि मिली है। उल्लेखनीय है कि डॉ.एसबी हसन के मार्गदर्शन में अंग्रेजी विषय में 17 शोधकर्ताओं को पीएचडी की उपाधि प्राप्त हुई है। इनमें से 6 शोध कर्ताओं को 10 से 20 लाख रुपए की राशि यूजीसी से फैलोशिप के रूप में प्राप्त हुई जो जेएच कॉलेज एवं नर्मदा संभाग में एक कीर्तिमान है। इनकी उपलब्धि शाला परिवार, ईष्ट मित्रों और परिजनों ने बधाई प्रेषित की है।
एक और श्रीकांत
दिलीप की सफलता की कहानी भी हाल ही में प्रदर्शित फिल्म श्रीकांत से मिलती-जुलती है। पीएचडी के लिए दिलीप ने ही स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से स्वयं ने ही पूरी थिसिस टाईप की है। सॉफ्टवेयर की ही सहायता से उन्होने पावर पाइंट प्रजेंटेशन बनाया। कक्षा 12वीं तक पाढर ब्लाइंड स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने के बाद जेएच कॉलेज में एमए अंग्रेजी साहित्य से किया। पीएससी द्वारा आयोजित होने वाली राज्य पात्रता परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। एक रोचक वाक्या यह भी है की दिलीप ने जिस अंग्रेज कवि मिल्टन पर शोध कार्य किया है वह भी दृष्टिबाधित थे।