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जामा मस्जिद बैतूल में जनाजे की नमाज पढ़ाने से इनकार, भेदभाव का आरोप

राज्य मानव अधिकार आयोग, वक्फ बोर्ड सहित कलेक्टर से की शिकायत, कार्रवाई की मांग

✓जामा मस्जिद बैतूल में जनाजे की नमाज पढ़ाने से इनकार, भेदभाव का आरोप
✓राज्य मानव अधिकार आयोग, वक्फ बोर्ड सहित कलेक्टर से की शिकायत, कार्रवाई की मांग
परिधि न्यूज बैतूल
जामा मस्जिद बैतूल में जनाजे की नमाज पढ़ाने से इनकार करने का आरोप लगाते हुए महावीर वार्ड, निवासी शेख नाशिर पिता शेख नजीर ने राज्य मानव अधिकार आयोग, वक्फ बोर्ड सहित कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायत आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता शेख नजीर के जनाजे की नमाज बैतूल जामा मस्जिद में नहीं पढ़ाई गई। शेख नाशिर ने बताया कि उनके पिता का निधन 18 मार्च 2024 को हो गया था। जब वे और उनके रिश्तेदार जनाजे को लेकर सुबह 10 बजे जामा मस्जिद पहुंचे, तो मस्जिद के इमामों ने जनाजे की नमाज पढ़ाने से इंकार कर दिया।
शेख नाशिर ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने जामा मस्जिद अंजुमन इस्लामियां कमेटी के अध्यक्ष पासू भाई से जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए अनुरोध किया था। पासू भाई ने कहा कि वे सुन्नी बरेलवी हैं और जामा मस्जिद के इमाम सिर्फ सुन्नी मुसलमानों के जनाजे की नमाज पढ़ाएंगे। उन्होंने बताया कि शेख नाशिर और उनके पिता शिया मुसलमान हैं, इसलिए उनकी नमाज नहीं पढ़ाई जाएगी। पासू भाई ने इमामों को निर्देश दिया था कि बिना उनकी अनुमति किसी अन्य मसलक के जनाजे की नमाज न पढ़ाई जाए। शेख नाशिर ने कहा, मेरे पिता ने अपनी पूरी जिंदगी जामा मस्जिद बैतूल में ही नमाज पढ़ी और सुन्नी मसलक को अपनाया था। मेरा निकाह भी जामा मस्जिद बैतूल के सुन्नी इमाम ने ही पढ़ाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पासू भाई उनके वालिद के साथ भेदभाव कर रहे हैं, जबकि अनजान लाशों की भी जनाजे की नमाज पढ़ाई जाती है, जिनके रिश्तेदार का पता नहीं होता। शेख नाशिर ने कहा, “मुझे अपने मुसलमान होने पर अफसोस हो रहा है कि मैं इस समाज में पैदा हुआ, जहां मेरे वालिद का जनाजा नहीं पढ़ाया जा रहा है। मेरी मां की तबीयत भी और ज्यादा खराब हो गई है। अब अगर मेरी मां का भी इंतकाल हो जाए, तो कौन उनकी जनाजे की नमाज पढ़ाएगा?
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग–
शेख नाशिर ने जिला कलेक्टर से निवेदन किया है कि इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वर्तमान कमेटी को तत्काल हटाया जाए और मुस्लिम समाज में अध्यक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भेदभाव और फितने को खत्म किया जाए।
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