आर्थिक संकट से जूझ रहे हजार से अधिक परिवार, भरण पोषण का संकट
मजदूरी हेड में नहीं बजट, अंशकालीन कर्मचारियों को 9 माह से नहीं मिला मानदेय
✓मजदूरी हेड में नहीं बजट, अंशकालीन कर्मचारियों को 9 माह से नहीं मिला मानदेय
✓आर्थिक संकट से जूझ रहे हजार से अधिक परिवार, भरण पोषण का संकट
परिधि न्यूज बैतूल

जिले में अंश कालीन कर्मचारियों के घरों में अब चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। करीब 9 माह से मजदूरी हेड में बजट न होने से इन कर्मचारियों को मानदेय नही मिला है जिसकी वजह से इन कर्मचारियों के लिए परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है।
बैतूल जिले के अधिकांश ब्लॉक, जिला मुख्यालय के कई छात्रावास आश्रम एवं अन्य विभागों में अंशकालिक कर्मचारी रसोईया या मजदूरी हेड से कार्य करने वाले कर्मचारी रखे गए हैं, जिनका पिछले 9 माह से मजदूरी हेड में राशि या आवंटन नहीं होने के कारण मानदेय नही मिला है। पिछले 9 माह से अंशकालीन भृत्य ,रसोईया एवं मजदूरी हेड में काम करने वाले कर्मचारियों को ब्लॉक स्तर पर या संकुल स्तर पर मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। अल्प वेतन वाले कर्मचारियों को लम्बे समय से मानदेय नही मिलने से आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। भीमपुर विकासखंड के आदर्श धनोरा में पदस्थ अंशकालीन कर्मचारी मुकेश आर्य एवं सुनील ने बताया कि विकासखंड स्तर पर मजदूरी हेड में जो भुगतान होना था उसका आवंटन पूरे जिले में नहीं है जिसके चलते हमें पिछले 9 माह से हमे मानदेय नहीं मिल रहा है। अब तो हमारे पास खाने के लाले पड़ रहे हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान हम और हमारे जैसे मजदूरी हेड पर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ बहुत परेशानी है।
जिले में 1 हजार से अधिक है अंशकालीन कर्मचारी
जिले में अंशकालीन कर्मचारी जिनकी संख्या तकरीबन हजार से ऊपर है वे सभी मानदेय न मिलने से परेशान है। शासन ने इन कर्मचारियों से काम तो लिया पर 9 माह से इनकी परेशानी को नही समझा।
इनका कहना…
अलग-अलग मजदूरी देयक में अप्राप्त आवंटन के चलते, अंशकालीन कर्मचारियों का भुगतान रुका हुआ है।
रमेश कौशिक
बी ई ओ भीमपुर