कलेक्टर साहब… पीपल ढाना में पेयजल के लिए सच में मचा हाहाकार…!
कुएं के डोबरे से गंदा- कीटाणुयुक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

✓कुएं के डोबरे से गंदा- कीटाणुयुक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
मनोहर अग्रवाल परिधि न्यूज खेड़ीसांवलीगढ़
जिले के आदिवासी बाहुल्य गावों में पीने के पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है।लोग दूर दूर से पीने का पानी जुटा रहे है लेकिन सरकारी नुमाइंदे इस विकराल समस्या को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नही है।जिला मुख्यालय से महज 15 किलो मीटर दूर विकासखंड की ग्राम पंचायत सराड के पीपलढाना गांव के आदिवासी पीने के पानी के लिए कुएं के गंदे और कीटामुयुक्त पानी पर आश्रित हो गए है। इसके लिए भी ग्रामीणों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। कुएं में भी पानी कम होने की वजह से बाल्टी डूब नही पाती ऐसे में कुएं में उतरकर ग्रामीण बाल्टी भरते है फिर ऊपर खड़े लोग उसे खींचते है और इस
दुर्गंध युक्त पानी को पीने योग्य बनाने कपड़े से छानकर पानी जुटाते है।

ग्रामीण बताते है की इस पानी में सूक्ष्म कीटाणु भी है ।पानी मट्टमेला है फिर भी प्यासे कंठो को तृप्त करने उन्हे इस पानी को ही उपयोग में लेना पड़ रहा है।
खेतो में ट्यूबवेल पर 200 रुपए माह में बेचा जा रहा पानी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के आसपास कुछ किसानों के खेत में ट्यूबवेल है, लेकिन वे भी 200 रुपए प्रति माह लेकर पानी बेच रहे है। गरीब आदिवासी पानी खरीद कर पानी नही पी सकते। पीपलढाना में हेड पंप नही है, बोरवेल में मोटर फंसी है, इन सब समस्याओं के बावजूद जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी को नही समझ पा रहे और ग्रामवासी बूंद बूंद पानी को तरस रहे है।इन गावों को जल जीवन मिशन में भी नही जोड़ा गया। बैतूल विकासखंड में यह एक ऐसा गांव है जहां गांव ग्रामीणों के सुख सुविधा की चिंता किसी को नही है, ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया
है।
विगत दिनों भीमपुर विकासखंड के ग्राम उत्तरी में पेयजल संकट की खबर पर वास्तविकता जानने कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी भरी दोपहर में उत्तरी पहुंच गए थे। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि साहब उनके गांव में लोग सच में बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे है, उनकी समस्या का निराकरण भी शीघ्र करें।