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जंगली शहद ने घोली आदिवासियों के जीवन में मिठास,पश्चिम वन मंडल के सहयोग से समृद्धि की ओर वनवासी

✓जंगली शहद ने घोली आदिवासियों के जीवन में मिठास

✓पश्चिम वन मंडल के सहयोग से समृद्धि की ओर वनवासी

परिधि न्यूज बैतूल

बैतूल जिले के जंगल वनोपज से समृद्ध है। जिले के आदिवासी वर्षों से इन जंगलों पर आश्रित हैं। जंगल से वन उपज संग्रहण का कार्य करने वाले आदिवासियों को अब नया मुकाम मिल गया है। जिससे आदिवासी बेहतर तरीके से वनोंपज का संग्रहण भी कर पा रहे हैं और पहले से अधिक मुनाफा भी उन्हें मिल रहा है। बैतूल जिले के पश्चिमी वन मंडल के डीएफओ वरुण यादव की पहल ने वर्षों से जंगल से शहद इकट्ठा करने वाले सैकड़ो आदिवासियों के जीवन में बदलाव लाने के सार्थक प्रयास किए हैं। जंगल से शहद संग्रहण में लगे आदिवासी अब 40 से 50 हजार रुपए महज एक महीने में कमा रहे हैं। डीएफओ ने इन आदिवासियों को जंगल से शहद इकट्ठा करने भोपाल में ट्रेनिंग दिलवाने के साथ ही शहद संग्राहकों की सुरक्षा के लिए उपकरण भी उपलब्ध करवाए है। शहद संग्राहकों को बिचौलियों से बचाने बाज़ार भी उपलब्ध करवाया गया है। पश्चिम वन मंडल में संग्रहित होने वाले शहद की शुद्धता के लिए मप्र राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था भोपाल से आर्गेनिक प्रमाण पत्र भी दिलवाया गया है। शहद की शुद्धता की जांच विंध्य हर्बल बरखेड़ा भोपाल द्वारा की जाती है। शुद्ध और आर्गेनिक होने के कारण पश्चिम वन मंडल के शहद की मांग बढ़ गई हैं। सभी गैंगों को आने वाली कोई भी समस्या के लिए डीएफओ वरुण यादव के साथ ही चिचोली रेंज अफसर नांदा डिप्टी रेंजर यादव के साथ ही वन अमला मदद करता है।

संग्राहकों को प्रशिक्षण के साथ मिली हनी कलेक्शन किट

पश्चिमी वन मंडल में शहद संग्रहण का कार्य में कर रहे आदिवासियों अभी तक अपने पारंपरिक रतिकों से ही जंगल से शहद इकट्ठा करते थे। जिससे गैंग के सदस्य कई बार मधुमक्खियों के काटने और पेड़ से गिरने की घटना हो जाती थी। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए डीएफओ वरुण यादव ने सभी गैंग के सदस्यों को भोपाल से प्रशिक्षण दिलवाया है। इन आदिवासियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए वन विभाग ने गैंग के सभी सदस्यों को हनी कलेक्शन किट मुहैया करवाई है। जिसमें सीढ़ी,हेलमेट,दस्ताने,कपड़े,चाकू,बाल्टी,रस्सी दिए गए हैं।

40 समूह कर रहे शहद का संग्रहण

पश्चिमी वनमंडल के परसापानी, पीपल ढाना, निशाना,गदाखार,पाट,सेमलडोह,गुरुवा,धुंदरी,घोरपड़,ढोडरा,जनोना सहित अन्य ग्रामों के आदिवासियों की 40 समूह शहद संग्रहण के कार्य में लगी हुई है। प्रत्येक समूह में 5 से 10 सदस्य तक होते हैं। प्रत्येक गैंग एक सीजन में 8 क्विंटल तक शहद निकाल लेती है।आदिवासियों के ये समूह पश्चिमी वन मंडल के जंगलों के साथ ही दक्षिण वन मंडल और महाराष्ट्र,खंडवा,हरदा के जंगलों से शहद निकालने का कार्य करती है। शहद निकालने का काम मई और जून में 25 से 30 दिनों के बीच किया जाता है। जिसे आदिवासी अपना सीजन कहते हैं। एक सीजन में समूह का प्रत्येक सदस्य 40 से 50 हजार रुपए का शहद निकाल लेता है। पश्चिम मंडल के आदिवासियों के इन समूहों ने पिछले वर्ष 82 क्विंटल शहद संग्रहण कर 18 लाख 50 हजार रुपए कमा लिए थे। इस बार आदिवासियों के सभी समूह का टारगेट 120 क्विंटल शहद संग्रहण करने का है।

शहद ने बदल दी आदिवासियों की जिंदगी

शहद संग्रहण के कार्य में लगे सौतखेड़ा निवासी सदस्य राजू सेलूकर ने बताया कि वर्षों से हम शहद का संग्रहण जंगल से करते आए हैं। पहले बिचौलिए हमसे औने पौने दामों में शहद खरीद लेते थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों से पश्चिम मंडल के डीएफओ वरुण यादव द्वारा भोपाल में सभी सदस्यों को ट्रेनिंग दिलवाने और किट दिलवाने के बाद हमारा शहद नांदा समिति अच्छे दाम में खरीद रही है। जिससे हम बड़ी मात्रा में शहद का संग्रहण कर पा रहे हैं। पहले तीन से चार क्विंटल शहद एक गैंग संग्रहण करती थी लेकिन अब यह बढ़कर 8 से 10 क्विंटल तक पहुंच गया है एक सीजन में हम 40 से 50 हजार रुपए तक कमा लेते हैं। इस पैसे से हम मकान बनाने,शादी ब्याह और कुछ सदस्य मोटरसाइकिल खरीदने का विचार बना रहे हैं।

नांदा समिति करती है शहद की खरीदी

पश्चिम वन मंडल की शहद संग्रहण में लगी आदिवासियों की गैंग से प्राथमिक वन उपज सहकारी समिति मर्यादित नांदा शहद की खरीदी करती है। समिति के प्रबंधक रामचरण सरनेकर ने बताया कि गैंग से खरीदे गए शहद को विंध्य हर्बल भोपाल द्वारा परीक्षण कर आर्गेनिक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। समिति गैंग से 225 रुपए प्रति किलो शहद की खरीदी करती है। समिति ने पिछले वर्ष 82 क्विटंल शहद की खरीदी की थी। इस वर्ष समिति 120 क्विंटल शहद की खरीदी करने का प्रयास कर रही हैं। शहद की प्रोसेसिंग यूनिट से सफाई कर परीक्षण के बाद विंध्य हर्बल बरखेड़ा भोपाल और वन मेले में विक्रय किया जाता है। नांदा समिति के शहद को आर्गेनिक प्रमाण पत्र मिलने से उसकी शुद्धता के चलते अब प्राइवेट कंपनी भी समिति से शहद खरीदने आगे आने लगी है। आने वाले दिनों में शहद की मांग बढ़ने पर इसका लाभ नांदा समिति के साथ शहद संग्रहण कर रहे आदिवासियों को भी होगा।

इनका कहना:-

सरकार ने 32 वनोपज की एमएसपी निर्धारित कर रखी है। शहद का 225 रुपए प्रति किलो ग्राम निधारण किया गया है। पश्चिम वन मंडल में शहद का बड़ी मात्रा में संग्रहण होता है और बिचौलिए आदिवासियों से 150 से लेकर 170 में शहद खरीदते थे। हमने डिविजन के 40 समूहों को  प्रशिक्षण दिलवाया और उन्हें हनी कलेक्शन किट मुहैया कराई है। बिचौलियों से बचाने और समिति के माध्यम से शहद का संग्रहण कर रहे हैं। पिछले वर्ष हमने 18 लाख 50 हजार का शहद खरीदा था। शहद की शुद्धता के लिए आर्गेनिक प्रमाण पत्र दिलवाया है,जिससे हमारे शहद की मांग बढ़ रही है।

वरुण यादव,डीएफओ पश्चिम वन मंडल (सा) बैतूल

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