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अंग्रेजी आश्रम का अधीक्षक बनाने नजरसिंह को ढूंढकर लाई किसकी नजर..?

✓बीईओ, एसी या एमएलए आखिर किसकी है मेहरबानी
शासन के अटैचमेंट खत्म करने के निर्देश भीमपुर में बेअसर

परिधि न्यूज बैतूल/ 9300924744

ग्राउंड रिर्पोट -1

 

 

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कमाई होनी चाहिए फिर चाहे वह ऐसे हो या वैसे इसलिए मैदानी स्तर परप्रपंच भी वैसे ही करने पड़ते है। जब हाथी, घोड़ा, वजीर और प्यादा अपना होगा तभी तो राजा को फायदा होगा। कुछ इसी तरह की बिसात जिले के आदिवासी बाहुल्य भीमपुर विकासखंड में बिछी हुई है। जिसने विरोध किया उसकी मात और जो जी हूजूरी करेगा उसकी शय। पूरे खेल में इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि विरोधियों को या तो खेल से बाहर कर दिया जाये या फिर किसी न किसी षडय़ंत्र का उन्हें शिकार बना दें। भीमपुर विकासखंड में जनजातीय कार्य विभाग की भर्राशाही किसी से छुपी नहीं है। इसका उदाहरण बीते दिनों भी देखने में आया जब विकासखंड मुख्यालय के आदिवासी बालक अंग्रेजी आश्रम शाला के अधीक्षक के निलंबित होने पर 50 किमी दूर संचालित प्राथमिक शाला के वर्ग तीन के शिक्षक नजरसिंह को अधीक्षक बना दिया गया। वैसे तो मप्र शासन ने अटैचमेंट खत्म कर दिया है, लेकिन भीमपुर में बिना किसी प्रस्ताव और अनुमोदन के 50 किमी दूर गुरुवापिपरिया संकुल के शिक्षक को आदिवासी बालक अंग्रेजी आश्रम शाला भीमपुर में अटैच किए जाने पर सवाल उठ रहे है। पूरे क्षेत्र में चर्चा कि शिक्षक नजरसिंह को आखिर अधीक्षक बनाने किसकी नजर ढूंढकर लाई है? या तो इस नियुक्ति के लिए लेन-देन हुआ है या फिर किसी दबाव में यह नियम विरुद्ध अटैचमेंट हुआ है। जनचर्चा है कि बीईओ विशाल भोपले, सहायक आयुक्त विवेक कुमार पाण्डेय या फिर विधायक महेंद्र सिंह चौहान तीनों में से किसी एक का वरदहस्त नजरसिंह पर है, तभी तो 50 किमी की खाई एक झटके में पाट दी गई!


यह है पूरा मामला
जिला मुख्यालय बैतूल से 100 किमी एवं आदिवासी बाहुल्य अंचल भीमपुर मुख्यालय से 50 किमी दूर गुरुवापिपरिया संकुल की प्राथमिक शाला भारी जमीन के वर्ग-3 शिक्षक नजरसिंह को आदिवासी बालक अंग्रेजी आश्रम शाला भीमपुर का अधीक्षक बनाया गया है। यह नियुक्ति अंग्रेजी आश्रम के अधीक्षक के निलंबन के बाद की गई। मप्र शासन ने अटैचमेंट खत्म कर दिया है, उस पर नजरसिंह को नियम विरुद्ध तरीके अधीक्षक बनाया गया है। बीईओ विशाल भोपले का कहना है कि सहायक आयुक्त ने शिक्षक नजर सिंह को अधीक्षक बनाने संबंधी प्रस्ताव उनसे नहीं मांगा, सीधे उपर से ही नियुक्ति की गई। इधर शिक्षा समिति भीमपुर ने भी अनुमोदन नहीं किया। ऐसे में सहायक आयुक्त विवेक कुमार पाण्डेय की नजरों ने अंतिम छोर के शिक्षक नजरसिंह को आखिर ढूंढा कैसे?
एसी साहब को 4 किमी के एक दर्जन स्कूलों में नहीं मिला एक अधीक्षक
यदि आदिवासी बालक अंग्रेजी आश्रम शाला भीमपुर के अधीक्षक को निलंबित किया गया था और रिक्त पद पर अधीक्षक को नियुक्त किया जाना था, तो नियमानुसार उसी शाला के पात्र शिक्षक को अधीक्षक बनाया जाना था। भीमपुर अंग्रेजी आश्रम में एक शिक्षक और एक शिक्षिका पदस्थ है, कायदे से उनमें से किसी को यह जिम्मेदारी दी जा सकती थी। इसके अलावा 4 किमी की परिधि में भीमपुर संकुल के अंतर्गत करीब एक दर्जन स्कूल संचालित है, जिनमें करीब आधा सैकड़ा शिक्षक-शिक्षिका पदस्थ है, उनमें से भी योग्य शिक्षक का अधीक्षक के लिए चयन किया जाना संभव था, लेकिन सहायक आयुक्त ने ऐसा न करते हुए भीमपुर से 50 किमी दूर गुरुवा पिपरिया संकुल की प्राथमिक शाला भारीजमीन के शिक्षक नजरसिंह को भीमपुर आश्रम में अटैच किया।
कन्या आश्रम- छात्रावासों में अधीक्षक बनने होड़
पूरे जिले में छात्रावास हो या कन्या आश्रम यहां अधीक्षक बनने की होड़ मची हुई है। जिले में कई ऐसे छात्रावास है जहां वर्षों से अधीक्षक अंगद की तरह पैर जमाए बैठे है। जनचर्चा है कि भारी-भरकम खर्च करके शिक्षक, अधीक्षक की सीट हथियाते है और इसके बाद अपने नुकसान की भरपाई के लिए बच्चों के निवालों और उनकी सुविधाओं पर ढाका डालते है। यदि वर्षों से छात्रावासों में पदस्थ अधीक्षकों की सम्पत्ति की जांच की जाए तो सारे भेद खुल जाएंगे। बहरहाल उम्मीद की जा रही है कि आदिवासी एवं गरीब बच्चों की शिक्षा और मिलने वाली सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम जल्द ही उठाए जाएंगे।

भारी जमीन के स्कूल में लगाना न पड़ जाए ताला..!
गौरतलब है कि भारी जमीन गुरुवा पिपरिया स्कूल में पदस्थ एक शिक्षिका ब्लैक बोर्ड पर नकल करवाने के मामले में निलंबित कर दी गई थी। यहां पदस्थ एक शिक्षक का कुछ महीनों पहले ही शाहपुर ट्रांसफर हुआ है ऐसी स्थिति में शिक्षक नजर सिंह को भी प्रभारी अधीक्षक बनाकर अंग्रेजी आश्रम में अटैच करने से भारी जमीन के स्कूल पर ताला लगाने की नौबत आ सकती है। एक तरफ शासन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए तमाम कवायद कर रहा है वही दूसरी ओर थोड़े से लालच के लिए बच्चों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है।

इनका कहना…
यह मामला संज्ञान में है, सहायक आयुक्त से पूछा गया है कि किस नियम के तहत यह नियुक्ति की गई है।
 डॉ. सौरभ संजय सोनवणे
कलेक्टर, बैतूल

मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। सहायक आयुक्त के द्वारा ही डायरेक्ट नियुक्ति की गई।इस संबंध में मुझसे कोई प्रस्ताव नहीं लिया गया।

विशाल भोपले, बीईओ, भीमपुर

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