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6 कलेक्टर 7 डीपीसी बदले पर बैतूल में 2017 से नहीं बदल पाये कई वार्डन..!

➡️6 कलेक्टर 7 डीपीसी बदले पर बैतूल में 2017 से नहीं बदल पाये कई वार्डन..!
➡️नए कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे और नवागत डीपीसी सुधीर कुमार साकेत क्या कर सकेंगें बदलाव?
➡️डीपीसी के सामने एपीसी ने लगाया दो वार्डन को कॉल..बताईए कौन है आपके छात्रावास में मेकर
➡️मेकर, चेकर, अपु्रवल के चक्कर में जिले के 16 छात्रावासों में करोड़ों के वारे-न्यारे

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गौरी बालापुरे पदम/ परिधि पड़ताल 

जिला शिक्षा केन्द्र बैतूल के अंतर्गत छात्रावासों में वर्षों से मलाईदार पदों पर आसीन वार्डनों के बदलने के आसार अभी भी नजर नहीं आ रहे है। विभाग चाहे तो इनकी मूल पदस्थापना पर वापसी कर सकता है, राज्य शिक्षा केन्द्र ने 2017 से अब तक कई बार जिला शिक्षा केन्द्र को 3 वर्ष अधिक समय से पदस्थ वार्डनों को बदलने के निर्देश दिए है लेकिन कभी अधिकारियों की सांठगांठ तो कभी राजनीतिक संरक्षण के चलते अधीक्षक बदले ही नही गए, लिहाजा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एवं कस्तूरबा गांधी छात्रावासों में 15-15 वर्षों से वार्डन पदस्थ है। उक्त अवधि में जिले में प्रशासनिक फेरबदल पर नजर डाले तो वर्ष 2017 से अब तक जिले में 6 कलेक्टर शंशाक मिश्रा, तरुण कुमार पिथोड़े, तेजस्वी एस नायक, राकेश सिंह, अमनबीर सिंह बैंस, नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी बदल चुके है और 7 डीपीसी अशोक पराडक़र, जीएल साहू, आईडी बोडख़े, जितेन्द्र कुमार भनारिया, सुबोध शर्मा, संजीव श्रीवास्तव, भूपेन्द्र वरकड़े बदल चुके है लेकिन कोई भी छात्रावास में पदस्थ वार्डनों को तीन वर्ष से अधिक कार्यकाल होने के बावजूद नहीं बदल पाया। अब नवागत कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे एवं डीपीसी सुधीर कुमार साकेत से उम्मीद की जा रही है कि वार्डनों की विदाई मूल शालाओं में की जाएगी।

➡️डीपीसी ने पहली बैठक में टटोली नब्ज

जिला शिक्षा केन्द्र बैतूल कार्यालय में 27 मई 2026 को आयोजित बैठक का नज़ारा देखने लायक था। नवागत डीपीसी सुधीर कुमार साकेत की मौजूदगी में जिला शिक्षा केन्द्र के अंतर्गत आने वाले 11 नेताजी सुभाषचन्द्र बालिका एवं  बालक छात्रावास तथा 4 कस्तूरबा गांधी छात्रावासों में पदस्थ सहायक वार्डनों की बैठक दोपहर 12 बजे आयोजित की गई। बैठक में सहायक वार्डनों को नियुक्ति, सेवा वृद्धि, संविदा स्थानांतरण, शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज की प्रति लेकर पहुंचना था। निर्धारित समय पर बैठक में पहुंची वार्डनों से पहली बार नवागत डीपीसी सुधीर कुमार साकेत रुबरु हुए और पहली ही बैठक में उनके सख्त तेवरों ने सभी सहायक वार्डनों को छात्रावासों में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर बोलने की हिम्मत दे दी। इस बैठक में वर्षों से छात्रावासों में वार्डन द्वारा चल रही वित्तीय अनियमितताओं की पोल खोल कर रख दी। दरअसल नेताजी सुभाष चन्द्र बोस बालिका एवं बालक छात्रावास तथा कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावासों में सामग्री क्रय करने के लिए मेकर, चेकर और अप्रवूल तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चेकर एवं अपू्रवल वार्डन होता है और मेकर सहायक वार्डन लेकिन जिला शिक्षा केन्द्र के अधीन उक्त 16 छात्रावासों में अधिकांश में मेकर के रुप में सहायक वार्डन का नाम दर्ज है लेकिन मोबाईल नंबर और अन्य जानकारी लेखापाल या अन्य की है। जब भी किसी क्रय सामग्री का भुगतान किया जाता है तो इसके लिए मेकर के मोबाईल पर ओटीपी आती है लेकिन आज तक मेकर सहायक वार्डनों को इसकी जानकारी और अपने अधिकारों की जानकारी ही नहीं थी। बैठक के दौरान जब छात्रावासों में मेकर की डिटेल ली गई तो दो छात्रावासों की वार्डन को एपीसी राजेश तुरिया ने कॉल करके मेकर के बारे में जानकारी ली जिनमें सदर छात्रावास की अधीक्षक प्रीति पवन फाटे एवं दुनावा छात्रावास की वार्डन कल्पना खुशराम शामिल है। इनमें एक वार्डन ने मेकर लेखापाल को बनाने की जानकारी दी। गौरतलब है कि जब डीपीसी ने सभी सहायक वार्डनों से मेकर, चेकर एवं अप्रूवल की जानकारी चाही तो वार्डनों ने अनभिज्ञता जाहिर की। छात्रावासों में वर्षों से जमें अधीक्षकों द्वारा करोड़ों का घालमेल मेकर और चेकर दोनों की भूमिका निभाते हुए किया है।
➡️सहायक वार्डनो से लिखित में मांगी शिकायत, हो सकती है बड़ी कार्रवाई की तैयारी
वर्ष 2017 से यह पहली बार हुआ है जब किसी डीपीसी ने सहायक वार्डनों से छात्रावासों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं पर खुली चर्चा की । अधिकारी की निष्पक्षता को देख सहायक वार्डनों ने डीपीसी को छात्रावासों की वस्तुस्थिति से अवगत भी कराया। इसके अलावा सभी सहायक वार्डनों ने एक प्रारूप में डीजीगो पोर्टल पर दर्ज मेकर के नाम के संबंध में कोई जानकारी न होने की शिकायत की। उक्त प्रारुप में उल्लेख है कि वह छात्रावास में कब से पदस्थ है तथा छात्रावास में सामग्री क्रय के लिए मेकर की भूमिका में नहीं है और न ही कोई मोबाईल नंबर ही दर्ज है। सामग्री क्रय के लिए किसी तरह की ओटीपी उन्हें प्राप्त नहीं होती है। गौरतलब है कि अधिकांश वार्डन ने मेकर के रुप में सहायक वार्डन का नाम तो दर्ज किया है लेकिन मोबाईल नंबर एवं अन्य जानकारी लेखापाल या छात्रावास के अन्य कर्मचारी की दर्ज की है। किसी भी क्रय सामग्री के भुगतान एवं सत्यापन में मेकर भी महत्वपूर्ण है लेकिन वर्षों से सहायक वार्डन पोर्टल पर मेकर के रुप में नाममात्र के लिए दर्ज है। जिस तरह से डीपीसी ने सहायक वार्डनों से जानकारी ली है उससे यह तो तय है कि निकट भविष्य में छात्रावासों की व्यवस्था में बदलाव होगा।
➡️ क्या नवागत कलेक्टर और डीपीसी बदल पायेंगे 15-17 वर्षों पुराने वार्डन..?
राज्य शिक्षा केन्द्र के 9 मई 2025 के आदेश के मुताबिक क्या जिले में संचालित नेताजी सुभाषचन्द्र बोस बालक/बालिका छात्रावास एवं कस्तूरबा गांधी छात्रावासों में पदस्थ अधीक्षकों को बदला जाएगा। आदेश के मुताबिक जिन छात्रावासों में अधीक्षकों का तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है उन्हें हटाकर नई नियुक्ति की जानी है, इसके अलावा जिन छात्रावासों में सहायक वार्डन का कार्यकाल पांच वर्ष का हो गया है उन्हें भी हटाया जाना है। राज्य शिक्षा केन्द्र ने तीन वर्ष से अधिक अवधि से पदस्थ वार्डन को बदलने के लिए कई बार दिशा निर्देश जारी किए है। गत वर्ष भी 9 मई 2025 को जारी आदेश में 11 अगस्त 2017, 3 मई 2018, 31 मार्च 2018, 17 दिसंबर 2019 और 11 जून 2021 के आदेश का भी संदर्भ है। गौरतलब है कि 11 जून 2021 को जारी पत्र जिसमें छात्रावासों में प्रभार परिवर्तन एवं सहायक वार्डन के रिक्त पदों पर पूर्ति विषयक कार्रवाई न होने पर विधानसभा में भी गूंज हुई थी। राज्य शिक्षा केन्द्र आदेश के परिपालन न होने पर 30 जून 2025 तक छात्रावासों में वार्डन एवं समयावधि पूर्ण कर चुके सहायक वार्डन का प्रभार परिवर्तन तथा रिक्त पदो पर प्रभार देने की कार्रवाई पूर्ण कर राज्य शिक्षा केन्द्र को सूचित करने के निर्देश दिए थे लेकिन बैतूल में कोई बदलाव नहीं हुआ।
➡️वर्षों से मलाईदार पदों पर जमे वार्डन
नाम उजागर न करने की शर्त पर विभागीय सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 11 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस बालिका छात्रावास एक बालक छात्रावास पटेल स्कूल परिसर में संचालित है। इसके अलावा 4 कस्तूरबा गांधी छात्रावासों में एक दशक से अधिक समय से वार्डन अंगद के पांव की तरह जमे हुए है। मुलताई विकासखंड के दुनावा में कल्पना खुशराम(04 वर्ष) चिचोली विकासखंड के खपरिया में अधीक्षक शशिकला इरपाचे, कुनखेड़ी भीमपुर में किरण भलावी (10 वर्ष), सदर बैतूल श्रीमती प्रीति फाटे (15 वर्ष), चिलकापुर भैंसदेही सुनिता सेलकरी (15 वर्ष),शाहपुर भारती अनवाने (15 वर्ष), चिल्लौर भीमपुर लता मरकाम (15 वर्ष),कस्तुरबा गांधी छात्रावास मांडवी आठनेर सुनिता नरवरे (20 वर्ष), जम्बाड़ा आमला सरोज कासदे (15 वर्ष), गोधना चिचोली सुजाता उईके (10वर्ष), बाकुड़ आठनेर कुसुमलता यादव (10 वर्ष), रानीपुर छात्रावास कृष्णा मदन यादव (10 वर्ष), राधा धुर्वे बीजादेही चोपना (15 वर्ष), प्रभात पट्टन वीणा सलामे भी लंबे समय से छात्रावास में पदस्थ है। लगभग 10 से 15 वर्ष से अधिक समय से उक्त वार्डन छात्रावासों की बागडोर संभाले हुए है। कई बार कुछ छात्रावासों में अनियमितताएं भी उजागर हुई और अधीक्षकों का विरोध भी हुआ लेकिन कभी भी इनकी कुर्सी पर कोई आंच नहीं आई। इस संबंध में जानकारी के लिए कलेक्टर डॉ सोनवणे एवं डीपीसी श्री साकेत से उनके मोबाईल नंबर पर सम्पर्क किया गया परंतु सम्पर्क नहीं हो पाया।

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1 Comment
  1. Sohan Lal Rathor says

    Shandar

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