शक्ति प्रदर्शन
शक्ति प्रदर्शन
आलेख:
सुरेंद्र धोटे (पर्यावरण कार्यकर्ता)
शब्द परिधि बैतूल

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मासंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे॥
प्रयागराज में 144 साल बाद महाकुंभ का आयोजन सनातन की जड़े कितनी गहरी है प्रदर्शित करता है।
दुनिया आज इंटरनेट पर प्रयागराज के कुंभ को अत्यधिक मात्रा में सर्च कर रही है कुंभ को देखने समझने और उसके महत्व को जानने के लिए इंटरनेट पर करोड़ सर्च देखे जा रहे हैं लाखों लोग विदेश से आकर इस कुंभ में हो रहे विभिन्न आयोजनों को देख रहे हैं।यह सनातन की गहरी जड़ों को दर्शाता है 13 अखाड़े का भव्य आयोजन उनके साधना में उच्च स्तर को प्राप्त कर चुके साधु नागा साधुओं का त्याग पूरा विश्व देख पा रहा है संगम नगरी में आयोजन में तत्पर शासन प्रशासन वहां की जनता और इस आयोजन के पीछे लाखों करोड़ों का जो रोजगार लोगों को मिल रहा है वह आर्थिक विशेषज्ञों को अचंभित कर रहा है।ना जात-पात ना ही उच्च नीच ना ही कोई दलित ना कोई महा दलित सब मां गंगा की गोद में संतान की भांति अटखलिया कर रहे हैं ।धर्म का ऐसा समागम हमारे धर्म की शक्ति को और गहरी जड़ों को प्रदर्शित करता है विरोधाभास तो कालांतर से होता आ रहा है और होता रहेगा लेकिन जब जब धर्म की हानि होगी भगवान किसी न किसी रूप में आकर धर्म को पुनः स्थापित करेंगे हम इस कालखंड को देख रहे हैं और जी रहे हैं।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मासंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥
हर हर गंगे नमो नारायय, हर हर महादेव
