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कई रातों से ठंड में ठिठुर रही थी 6 से 11 वर्ष की बालिकाएं,कलेक्टर को रात 8 बजे दी जानकारी 9 बजे कन्या आश्रम की बालिकाओं को मिल गए नए कंबल

एसी के निर्देश पर भीमपुर बीईओ खुद कंबल लेकर पहुंचे भाडरीढाना आदिवासी कन्या आश्रम

✓कई रातों से ठंड में ठिठुर रही थी 6 से 11 वर्ष की बालिकाएं
✓कलेक्टर को रात 8 बजे दी जानकारी 9 बजे कन्या आश्रम की बालिकाओं को मिल गए नए कंबल
✓एसी के निर्देश पर भीमपुर बीईओ खुद कंबल लेकर पहुंचे भाडरीढाना कन्या आश्रम
गौरी बालापुरे पदम,परिधि न्यूज बैतूल
भीमपुर विकासखंड के भाडरीढाना में संचालित शासकीय कन्या आश्रम में बीती रात 60 बालिकाएं सुकून से सो पाई। बुधवार रात के पहले तक यहां फटे-पुराने कंबल में एक पलंग पर दो बालिकाएं सोती थी और ठिठुरते हुए सुबह होने का इंतजार करती थी, मात्र 6 वर्ष से 11 वर्ष उम्र की बालिकाएं जंगल से सटे भाडरीढाना ग्राम में संचालित कन्या आश्रम में आवासीय शिक्षा प्राप्त करती है। इन बालिकाओं को शासन द्वारा तमाम सुविधाएं दी जाती है लेकिन इन तक सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही। जिले के संवेदनशील कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी को जब बुधवार रात करीब 8 बजे भाडरीढाना कन्या आश्रम की बालिकाओं की स्थिति से परिधि न्यूज ने अवगत कराया गया तो उन्होंने तत्काल बालिकाओं के लिए कंबल भेजने की व्यवस्था बनाई। एक घंटे में मासूम बालिकाओं के पास खुद भीमपुर बीईओ 25 कंबल लेकर पहुंचे, कंबल देखते ही छोटी-छोटी बालिकाएं झूम उठी। बालिकाओं की परेशानियां संज्ञान में आते ही कलेक्टर ने जिस तरह त्वरित एक्शन लिया वह उनकी संवेदनशीलता और बेटियों की सुरक्षा का उदाहरण है। परिधि न्यूज ने कलेक्टर द्वारा बालिकाओं को तत्काल कंबल उपलब्ध कराने पर आभार माना है। बीईओ रमेश कौशिक ने बताया कि वे आज कन्या आश्रम पहुंचकर बालिकाओं की संख्या एवं स्थिति देखकर आवश्यकता होने पर और कंबल उन्हें प्रदाय करेंगे। साथ ही उम्मीद है कि कलेक्टर श्री सूर्यवंशी एवं एसी शिल्पा जैन कन्या आश्रम में अन्य अव्यवस्थाओं में सुधार के साथ यहां पदस्थ अडिय़ल एवं बालिकाओं के अधिकारों का पिछले तीन वर्षों से हनन करने वाली पूर्व अधीक्षिका ढिल्लो पांसे एवं यहां पदस्थ दो पुरुष रसोईयों को भी अन्यत्र स्थानांतरित कर बालिकाओं को सुरक्षित आवास एवं शिक्षा प्रदान करेंगे।
तत्काल एसी को दिए निर्देश
कलेक्टर श्री सूर्यवंशी को जब परिधि न्यूज ने बीती रात कन्या आश्रम में ठिठुरती बालिकाओं की जानकारी दी तो उन्होंने इस मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया और तत्काल एसी शिल्पा जैन को बालिकाओं को कंबल उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया। निर्देश मिलते ही एसी ने भीमपुर बीईओ को निर्देश दिए और रात 9 बजे बालिकाओं के लिए अपनी गाड़ी में 25 कंबल लेकर भीमपुर बीईओ श्री कौशिक भाडरीढाना पहुंचे।
पूर्व अधीक्षिका ने नहीं दिए बालिकाओं को कंबल

प्राप्त जानकारी के अनुसार कन्या आश्रम की पूर्व अधीक्षिका ढिल्लो पांसे ने बालिकाओं को कंबल तक नहीं दिए जिसकी वजह से बालिकाएं फटे कंबल-चादर-तकिए में सोने के लिए विवश है। यहां बच्चों को पास स्कूल डे्रस तक फटी हुई है। इसके अलावा भंडार गृह की स्थिति भी दयनीय है, इन सभी समस्याओं को लेकर परिधि न्यूज द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट प्रसारित की गई थी, जिसके आधार पर एसी शिल्पा जैन द्वारा बीईओ रमेश कौशिक से छात्रावास की जांच कराई गई और प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद कलेक्टर के अनुमोदन से कन्या आश्रम अधीक्षिका को पद से हटाया गया। जानकारी के अनुसार ढिल्लो पांसे नई अधीक्षिका को चार्ज देने भी तैयार नहीं है, हालांकि वित्तीय लेनदेन पर होल्ड लगा दिया गया है और नई अधीक्षिका ने कन्या आश्रम में ज्वाइनिंग भी ले ली है। छात्रावास का नियंत्रण अभी भी ढिल्लो पांसे एवं पुरुष रसोईये के पास ही है। बीती रात बालिकाओं को कंबल देने के बाद आज बीईओ एक बार फिर कन्या आश्रम का निरीक्षण कर यहां की तमाम अव्यवस्थाओं एवं कमियों को पूरा करने के लिए निर्देशित कर सकते है।
आश्रमशाला खोलने का महत्व ही कर दिया खत्म
पिछले तीन वर्षों से ढिल्लो पांसे ने भाडरीढाना आश्रम का महत्व ही खत्म कर दिया। गौरतलब है भाडरीढाना ग्राम में कन्या आश्रम स्थापित करने के पीछे शासन की मंशा यही थी कि इस गांव के रहवासी जो रोजगार के लिए बच्चों एवं बुजुर्गों को गांव में छोडक़र पलायन कर जाते थे, आश्रम खुलने के बाद बालिकाओं को यहां रहकर पढऩे की सहूलियत मिलने से आदिवासी परिवार बेफिक्री से रोजगार के लिए बाहर जाते थे। पिछले तीन वर्षों से 70 सीटर छात्रावास में तीस से ज्यादा बच्चों की दर्ज संख्या बढ़ी ही नहीं। इसके पीछे आश्रम अधीक्षिका की सोची समझी साजिश है। सूत्रों की माने तो आश्रम में कागजों पर तो 70 बच्चों को प्रवेश दिया गया लेकिन पूरे बच्चें छात्रावास में रखे नहीं जाते। बालिकाओं को पढ़ाने के लिए शासन इतने जतन कर रहा है लेकिन भाडरीढाना में ढिल्लो पांसे बालिकाओं से उनकी शिक्षा का अधिकार ही छीन रही है। गौरतलब है कि नई अधीक्षिका ने स्कूल ज्वाईन करने के बाद आश्रम में दर्ज बच्चों के घर पहुंचकर उन्हें आश्रम लाया गया है, जिस आश्रम में तीन वर्षों से बालिकाओं की संख्या 30 से उपर नहीं पहुंची थी वहां वर्तमान में 60 बालिकाएं फिर शिक्षा पाने की दिशा में अग्रसर हो चुकी है। यदि कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त इस छात्रावास का एक बार निरीक्षण करें तो बाकी समस्याओं का भी मौके पर निराकरण किया जा सकता है। बहरहाल कंबल पाकर इस ठंड में बालिकाएं सुकून की नींद सो सकेगी।
इनका कहना…
एसी मेडम के निर्देश मिलने पर रात में करीब 9 बजे बालिकाओं को कंबल पहुंचाए गए।
रमेश कौशिक, बीईओ भीमपुर 
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