जागते रहो…डुल्हारा के मुहाने पर रात 11:00 बजे पहुंचे दो ट्रक !
10 और 12 चका ट्रकों में कोयला जिले से देर रात बाहर करने तैयार है कोल माफिया
✓जागते रहो…डुल्हारा के मुहाने पर रात 11:00 बजे पहुंचे दो ट्रक !
✓10 और 12 चका ट्रकों में कोयला जिले से देर रात बाहर करने तैयार है कोल माफिया
✓राजस्व खनिज के पास मैदानी अमला नहीं पुलिस की भूमिका संदिग्ध
✓खनिज अधिकारी बालाघाट में इंस्पेक्टर के तेवर हुए तीखे
परिधि अलर्ट न्यूज बैतूल

रात 11:00 बजे से डुल्हारा ग्राम के मुहाने पर दो ट्रक खड़े हैं और कोल माफिया ने फिर अपने काम को अंजाम देना शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसी सुरजीत की ट्रैक्टर ट्राली में मजदूरों के द्वारा खदानों से कोयला निकाल के भरा जा रहा है और जिम्मेदार अमला तमाशाबीन बना हुआ है। कोल माफिया के बुलंद हौसलों के पीछे आखिर संरक्षण किसका है इसकी परवाह जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को करने की जरूरत है।परिधि न्यूज द्वारा शुक्रवार दोपहर में प्रसारित समाचार में यह स्पष्ट भी किया था कि डुल्हारा की कोयला खदानों से आज दो ट्रक कोयला जिले से बाहर भेजने की तैयारी है। खनिज अधिकारी जहां परिधि न्यूज की खबरों की विश्वसनीयता स्वीकार कर चुके है वहीं खनिज इंस्पेक्टर नागवंशी का सटीक समाचारों पर एतराज समझ से परे है। गौरतलब है कि लगातार सूत्रों के माध्यम से सटीक समाचार प्रसारित करने से खिन्न इंस्पेक्टर नागवंशी का कहना है कि एक बार संयुक्त कारवाई आपके साथ कर लेते है। खनिज इंस्पेक्टर को संभवतः यह जानकारी नहीं है कि सबसे पहले डुल्हारा में कोल खनन की खबर पर खनिज अधिकारी ने गांव पहुंचकर परिधि न्यूज से ही खनन की लोकेशन पूछी थी।खैर जहां खनिज महकमे की भूमिका संदिग्ध है वहीं पुलिस के दो अनुभाग, तीन थाने और दो पुलिस चौकी की कोल परिवहन में भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। खनिज मामले में पुलिस की बार बार भूमिका के पीछे एक बड़ी वजह भी है जिसे पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारियों को समझना होगा।खनिज और राजस्व के पास मैदानी अमला कम है। इसके अलावा रात के समय गश्त और सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है। दूसरी बड़ी बात कोल माफिया अपना काम रात 9 बजे के बाद शुरू करता है और रात 3 से 4 बजे के बाद खत्म कर देता है। ऐसे में जब डुल्हारा में संजीवन के घर से लगी खदानों में खुदाई कर रात 3 बजे यदि कोयला पार किया जा रहा है तो इस दौरान चोपना थाना क्षेत्र के डुल्हारा में खुदाई का काम कर कोयले की लोडिंग ट्रैक्टर और ट्रक में हो रही है। सूत्रों के मुताबिक यहां से कोयले के ट्रक तीन थाने चोपना, रानीपुर, शाहपुर, दो अनुभाग सारणी शाहपुर और दो चौकी भौंरा और घोड़ाडोंगरी की सीमा से रात के समय निकाले जा रहे है। बिना रोकटोक, बिना जांच पड़ताल यदि यह कोयले से भरे ट्रक रातों रात जिले की सीमा से निकल रहे है तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है यह तो प्रशासन ही जाने।
कैसे मिलेगा कोयला, ट्रक, मजदूर और माफिया?
जिस तरह से डुल्हारा में कोयले के अवैध खनन को नकारा जा रहा है उससे यह तो स्पष्ट है कि दाल पूरी काली है। बहरहाल समाचार लिखने के दौरान जो जानकारी सूत्रों के आधार पर प्रशासनिक जिम्मेदार और मैदानी अमले तक पहुंचाई गई उस दौरान कोल माफिया का अपने काम पर लगा हुआ है। सुरजीत के ट्रैक्टर को कोयले से भरा जा रहा है और इस कोयले को संकेत मिलते ही ट्रकों में लोड किया जाएगा। परिधि की सटिक खबरों से खिन्न खनिज इंस्पेक्टर बी के नागवंशी से जब खनिज अधिकारी द्वारा ड्यूटी लगाए जाने की बात कही गई तो उन्होंने दो टूक लहजे में कह दिया एक बार जाकर लौट आए है कुछ नहीं मिला, जबकि इंस्पेक्टर इस बात से भली भांति वाकिफ है कि कोल माफिया देर रात काम शुरू करते है। अपनी खिन्नता में उन्होंने यह तक कह दिया कि परिधि न्यूज की खबर ही गलत है, जबकि पहली खबर के बाद मौके पर संयुक्त टीम के साथ मौके पर पहुंचे खनिज अधिकारी ने ही कारवाई की वीडियो परिधि न्यूज से साझा किए थे।लेकिन जिम्मेदार ही सच पर पर्दा डालने लग जाएंगे तो भला कोयला, ट्रक, मजदूर और माफिया कैसे मौके पर मिलेंगे?
इनका कहना…
मै बालाघाट आ गया हूं। तत्काल खनिज इंस्पेक्टर को मौके पर पहुंचने के निर्देश देता हूं।
मनीष पालेवार, खनिज अधिकारी बैतूल
