जब तक इलाज चला बंदर थामें रहा अपने जीवन रक्षक की उंगली, करंट लगने से हो गया था बेहोश
✓जब तक इलाज चला बंदर थामें रहा अपने जीवन रक्षक की उंगली, करंट लगने से हो गया था बेहोश
✓जन सेवा समिति ने पेश की संवेदना और सेवा की मिसाल
✓अपनेपन के मौन से भरा मूक प्राणी का विश्वास
परिधि न्यूज बैतूल


इस संसार की मातृभाषा है,जो मानव को पशुओं से जोड़े रखती है। इसका उदाहरण शुक्रवार 18 अक्टूबर को आमला में उस वक्त देखने मिला जब एक बंदर करंट लगने से झुलस गया एवं बेहोश हो गया। सूचना मिलते ही जनसेवा कल्याण समिति की टीम उस तक पहुँची।
टीम के युवा सदस्यों ने बंदर को बेहोश देख उसकी छाती में पंपिग की। काफी प्रयासो के बाद बंदर होश में आया। जनसेवा कल्याण समिति के सदस्यों ने उसके उपचार की व्यवस्था की। इलाज के दौरान संवेदना और अपनेपन का जो भाव दिखा इसे देख किसी की भी आंखे नम हो जाएंगी।
पूरे वक्त उंगली थामे रहा घायल बंदर

अपनी जान बचाने वालो को देख बंदर ने उनकी उंगली थाम ली और पूरे इलाज के दौरान उंगली ऐसे थामे रखी मानो कोई बच्चा अपने परिवार जन की उंगली थामकर निश्चिंत हो जाता है।

जनसेवा कल्याण समिति के युवा पशुप्रेमी शुभम एस के, अभिषेक गोहर, नीरज बेले, सुदामा पाल,गुरुवीर उइके, हरीश निरापुरे, कपिल पवार,कुणाल देवड़े, प्रमोद पवार एवं आयुष बेडरे की सक्रियता और तत्परता से एक वन्य प्राणी की जान बची। समिति सदस्यों की सभी सराहना कर रहे है।