PARIDHI GOSSIP: बिन फेरे हम तेरे…!


बिन फेरे हम तेरे…!
अपने बैतूल में लिव इन जैसे संस्कृति विरोधी संस्कारों की दस्तक को बमुश्किल 5 साल ही हुए है, लेकिन समाज में किसी व्याधि की तरह बढ़ते इस फैशन ने संबधों की आत्मा को तिलांजलि दे डाली है। भविष्य गढऩे वाले भी अब इस फरेब की जद में है। प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक त्रिकोणीय संबंध के चटकारे सुनाई पड़ रहे है। सुना है कि एक नाम वाले दो भविष्यनिर्माता देवरों ने अपनी मुंह बोली भौजाई की मदद का बीड़ा कुछ इस कदर उठाया कि सब अवाक है। इस सत्यकथा में बड़े-बड़े ट्वीस्ट है एक गांव, एक विभाग, एक सा काम, एक ही नाम वाले अलग-अलग दो शख्स दीर्घकाल से एक अंशकालीन कनेक्शन के फेर में है। एक ही नाम राशि के ये दो भविष्यनिर्माता अपने ही दूर के रिश्तें की भौजाई के साथ बिन फेरे हम तेरे जैसी मूवी की स्क्रीप्ट पर टेक-रिटेक देने में जुटे है। एक ही डिपार्टमेंट में मुंहबोली भौजाई सहित एक परिवार के पांच सदस्यों पर हो रही मेहरबानी भी समझ से परे है। एक भविष्य निर्माता ने तो अपने भाई का भविष्य बनाने के लिए उसे अपनी पत्नी के कार्यक्षेत्र का चूल्हा -चौका ही थमा दिया है, ये बात अलग है कि यहां सुबह -शाम 450 लोगो का भोजन बनता है। अपनों को मालामाल करने के इस खेल में भविष्य निर्माता मर्यादा और संस्कार भी भूलते जा रहे है। वैसे तो दोनों भविष्य निर्माताओं ने जिस तरह का चक्रव्यूह रचा है उसमें दोनो के परिवार बर्बाद हो सकते है। दोनों ने बिसात बिछाई तो सोच-समझकर है, लेकिन खेल में दो गोटियां कच्ची है, इन्हीं दो कच्ची गोटियों में से एक का दोनों भविष्यनिर्माताओं से पक्का नाता है। त्रिकोणीय संबंधों की आंच दो परिवारों को झुलसा सकती है। मुंह बोली अंशकालीन भौजाई को कम तो क्या लेश मात्र भी परेशानी नहीं इसलिए उन्हें सेफ जोन में रखने का प्रयास दोनों भविष्य निर्माता भरसक कर रहे है। कार्यक्षेत्र के कक्ष से हटाकर अब कुछ दूरी पर कमरा और उनकी देख-देख, किराया, खान -पान की पूरी जिम्मेदारी दोनों बारी-बारी उठा रहे है। हर जरुरत के लिए दोनों हाजिर है। इस हाजरी के पीछे वजह भी है कि भौजाई अकेली है। साथ निभाना साथिया बनकर दोनों के दोनों बिन फेरे हम तेरे बने हुए है। रिश्तेदारी इसलिए भी पराकाष्ठा पर है क्योंकि रोजगार के साथ-साथ घर का खर्च भी दोनों भविष्य निर्माता ही उठा रहे है। एक परिवार के हम पांच के खेल में तीन पक्की और दो गोटी कच्ची है, लेकिन कच्ची गोटियों को यह पता है कि पक्के खिलाड़ी उन्हें खेल से बाहर नहीं होने देंगे। एक पक्की गोटी को तो चार पेटी खर्च करके मैदान में लाया गया है और इस गोटी के साथ एक भविष्य निर्माता की कच्ची गोटी खिचड़ी पका रही है। भविष्य निर्माताओं की दसो उंगलियां घी में और सर कढ़ाई में और ये रिश्ता क्या कहलाता है का राज जानने के लिए एसी वाली आरामगाह से सेंंधमारी जरूरी है।