शराबी आदमी परिवार और समाज के लिए कलंक है: पूज्य भंते महाथेरो

✓वर्षावास समिति की सराहनीय पहल
✓हमें किसी धर्म की नहीं, बल्कि हर धर्म में शील का पालन करने की आवश्यकता है
✓शराबी आदमी परिवार और समाज के लिए कलंक है: पूज्य भंते महाथेरो
परिधि न्यूज बैतूल
भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षा का मूल आधार पंचशील है। जो समाज में गरीबी, लाचारी, बीमारी को दूर करने में सहायक हो सकता है, यदि समाज के लोग पंचशील का पालन कड़ाई से करे। तो हम उच्चतम विकसित समाज का निर्माण कर सकते है। जिसमें शारीरिक, मानसिक आर्थिक, सामाजिक, आध्यात्मिक पांचों भागों में उन्नति केवल मात्र पंचशील का कड़ाई से पालन करने से होता है।
पंचशील बुद्ध विहार सदर बैतूल में 14 अक्तूबर को पूज्य भंते विनय रक्खिता महाथेरो एवं भिखू संघ जिसमें बैतूल से पूज्य दीपांकर भंते, कर्नाटक से आए पूज्य भंते धम्म तिस्सा, श्रामनेर यासा , श्रामनेर अनमोल नागपुर से आए है।वर्षावास कार्यक्रम 21 जुलाई से 20 अक्तूबर 2024 तक होना है। यह कार्यक्रम वर्षावास समिति द्वारा आयोजन किया गया है।
जिसमें पंचशील में मुख्यरूप से पांचवां शील नशा पत्ती से विरक्त रहना यह शील चारों शील पर भारी है
नशे में चूर आदमी हत्या, चोरी,व्यभिचार और झूठ भी बोल सकता है। इसलिए आज की युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखना समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है। चाहे वह किसी भी धर्म का हो।
राज्य सरकारों से यह अपील की गई है कि बच्चों को मोरल एजुकेशन में शील पालन करने पर जोर दिया जाए। ताकि बच्चों का या यू कहें आने वाले समय में उच्चतम विकसित समाज का निर्माण में यह युवा पीढ़ी अपना योगदान दे सके।
पंचशील क्या है?
पंचशील का उनका सिद्धांत किसी भी मनुष्य के जीवन को सार्थक बना सकता है, जिसमें उन्होंने कहा हिंसा न करना, चोरी न करना, व्यभिचार न करना, झूठ न बोलना और नशा न करना शामिल हैं।यह बात पूज्य भंते जी ने प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से समाज के लोगों को संदेश दिया है।