Betul and MP Latest News

जिला अस्पताल के सामने रोज दो घंटे के लिए आते है फरिश्ते

दूर दराज के मरीजों के परिजनों के लिए वरदान बनी चलित भोजन व्यवस्था

✓जिला अस्पताल के सामने रोज दो घंटे के लिए आते है फरिश्तें
✓दूर दराज के मरीजों के परिजनों के लिए वरदान बनी चलित भोजन व्यवस्था
परिधि न्यूज बैतूल

शाम 6 बजते ही जिला अस्तपाल के सामने एक गाड़ी आती है, जिसमें आधा दर्जन फरिश्ते उतरते है, दो टेबल लगाकर उस पर थालियां रखी जाती है और शुरु हो जाता है अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को भरपेट भोजन कराने का सिलसिला। दो घंटे में करीब सौ लोगों को भोजन कराने के बाद आधा दर्जन युवक वापस हो जाते है, फिर इस उम्मीद के साथ कि अगले दिन फिर वे जरुतमंद भूखे प्यासे मरीजों एवं उनकी परिजनों की संतुष्टि का कारण बनेगें।जिला अस्पताल के सामने पिछले एक महीने हर रोज सेवा की यह अनूठी मिसाल पेश की जा रही है। पूरे मन और आग्रह कर लोगों को भोजन कराने में जुटे लोगों में न तो कहीं फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डालने की चाहत है और न ही उनमें प्रसिद्धि की होड़ है। सभी का कहना है कि बस ईश्वर की मर्जी से यह कार्य चल रहा है। जब तक ईश्वर चाहेंगे सेवा का यह सिलसिला जारी रहेगा।
बैतूलबाजार में बनता है भोजन

middle post add

जिला अस्पताल के सामने दूर दराज से आने वाले परिजनों को भोजन के लिए परेशान होता देख भोजन सेवा के इस विचार को मूर्त रुप देने वालों ने अपना नाम तक उजागर नहीं किया है। पितृपक्ष से जिला अस्तपाल के सामने भोजन सेवा को प्रारंभ किया गया जो अनवरत जारी है। मरीजों के परिजनों के लिए बैतूलबाजार में महाराज के घर भोजन बनता है और बडोरा के युवक यहां समाजसेवी मनीष दीक्षित के मार्गदर्शन में परिजनों को भोजन कराते है।
निस्वार्थ सेवा को इससे अच्छा उदाहरण नहीं देखा: मनीष दीक्षित

समाजसेवी मनीष दीक्षित बताते है कि मरीजों के परिजनों को भोजन वितरण की व्यवस्था बनाने के लिए जब उनसे मदद मांगी गई तो वे सहर्ष इस नेक कार्य के लिए तैयार हो गए। श्री दीक्षित ने बताया कि उनके पास सेवा को प्रारंभ कराने के लिए बडोरा निवासी एक युवक ने कॉल किया और कहा कि आप हमेशा जिला अस्पताल में सेवा कार्य कराते रहते है, प्रतिदिन भोजन की गाड़ी जब अस्तपाल पहुंचे तो आप जरुरतमंदों को भोजन वितरण कराने में सहयोग करा दीजिए। उसके बाद से रोज शाम को जब शाम करीब 6 बजे तक भोजन की गाड़ी अस्पताल के सामने पहुंचती है तो श्री दीक्षित पहले से वहां मौजूद होते है। देखते ही देखते मरीजों के परिजनों की कतार लग जाती है। श्री दीक्षित ने बताया कि परिजनों को पहले कूपन वितरित किए जाते है और इसके बाद भोजन का वितरण किया जाता है।

जिला अस्पताल के सामने मात्र दस रुपए में परिजन घर का बना भोजन पूर्ण संतुष्टि के साथ करते है। श्री दीक्षित ने बताया कि करीब एक महीने से चल रही सेवा में न किसी को नाम की चाहत है न ही कोई लोभ है। वे बताते है कि निस्वार्थ सेवा का इससे अच्छा उदाहरण उन्होंने नहीं देखा।प्रतिदिन सर्वे भवन्तु सुखिन: के भाव से मंत्र पांघनेंक बाद भोजन वितरण प्रारंभ किया जाता है

भोजन के साथ यह सीख भी

भोजन वितरण करने के लिए पहुंचने वाली गाड़ी पर न कोई प्रचार-प्रसार की सामग्री चस्पा है और न ही किसी का नाम लिखा है। हां भोजन वितरण के दौरान एक बैनर सामाने रखा होता है, जिसमें अन्न का आदर करने की सीख है। इस बैनर पर लिखा है उतना ही लो थाली में, की व्यर्थ न जाये नाली में..। भोजन वितरण करने वाले युवकों द्वारा अपना नाम तक नहीं बताया गया। उनके द्वारा बस यही बात कही जा रही है कि प्रभु की कृपा से यह सेवा प्रारंभ हुई है और लोग इस सेवा से लगातार जुड़ रहे है। सबसे बड़ी संतुष्टि इस सेवा से यही मिलती है कि आदिवासी अंचल के दूर दराज से आए लोगों को भरपेट भोजन उपलब्ध करा पाते है।
एक मदद की दरकार

वैसे तो जिला अस्पताल परिसर में 24 वर्षों से भोजन शाला का भी संचालन किया जा रहा है। भोजन शाला के लिए कूपन शाम चार बजे वार्डों में वितरित किए जाते है। इसके बाद भोजन बनना शुरु होता है। ऐसे में जो परिजन वंचित रह जाते है उनके लिए शाम को आने वाली यह भोजन की गाड़ी वरदान से कम नहीं है। इस पूरी सेवा में यदि अस्पताल प्रबंधन एवं प्रशासन का थोड़ा सा सहयोग मिल जाए तो व्यवस्था और दुरुस्त हो सकती है। दरअसल जिला अस्पताल के सामने सडक़ के किनारे गाड़ी खड़ी कर भोजन का वितरण कराया जाता है।यदि अस्पताल परिसर में खाली स्थान पर भोजन वितरण की अनुमति अस्पताल प्रबंधन एवं प्रशासन दे तो सडक़ पर बैठकर परिजनों को भोजन नहीं करना पड़ेगा। कई बार वाहनों की आवाजाही की वजह से भोजन करते-करते परिजन थाली से उठते है। अस्तपताल प्रबंधन से जागरुक एवं सेवाभावी नागरिकों ने सहयोग का अनुरोध किया है।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.