भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से ही सेवानिवृत्ति लेंगे एमपीडब्ल्यू बर्डे साहब..!
फिल्ड वर्कर को अधिकारी बनने का गजब शौक, इस बंदे पर लागू नहीं होते नियम-कायदे

✓भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से ही सेवानिवृत्ति लेंगे एमपीडब्ल्यू बर्डे साहब..!
✓फिल्ड वर्कर को अधिकारी बनने का गजब शौक, इस बंदे पर लागू नहीं होते नियम-कायदे
परिधि न्यूज बैतूल
जिले का सबसे पिछड़ा विकासखंड भीमपुर हमेशा किसी न किसी वजह से चर्चा में रहता है। यहां विभिन्न विभागों में पदस्थ अधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक के अपने रुवाब होते है, इसकी वजह जिले के अधिकारियों का भीमपुर के प्रति साफ्ट कार्नर कहा जा सकता है, लेकिन इस साफ्ट कार्नर का अधिकारी और कर्मचारी बेजा फायदा उठाते है। यहां कर्मचारियों के ठाठ राजा से कम नहीं है, इसकी बानगी स्वास्थ्य विभाग में देखी जा सकती है जहां न कोई सुनने वाला है और न कोई कहने वाला। पिछले करीब 14 वर्षों से एक एमपीडब्ल्यू का भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अटैच होना इस बात को साफ कर देता है कि यहां की तमाम व्यवस्थाएं वरिष्ठ अधिकारियों के नियंत्रण से बाहर है। जहां एक ओर पूरे प्रदेश में अटैचमेंट की व्यवस्था खत्म कर दी गई है वहीं सेहरा सीएचसी के एक एमपीडब्ल्यू के लिए यह नियम लागू नहीं होता। लगातार एक ही स्थान पर करीब 14 वर्षों से अटैचमेंट की वजह से एमपीडब्ल्यू के तेवर कुछ इस तरह हो गए है कि विधायक हो या मंत्री उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। एमपीडब्ल्यू की यह बात वास्तव में सच भी साबित होती नजर आ रही है, कुछ महीनों पहले विधायक महेन्द्र सिंह चौहान ने तमाम अटैचमेंट खत्म कर कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर लौटाने के लिए पत्र लिखा था, इस पत्र पर कार्रवाई भी हुई लेकिन अंगद के पांव की तरह एमपीडब्ल्यू विधायक के पत्र के बाद भी टस से मस नहीं हो पाया।
मंत्री और विधायक भी खत्म नहीं करा सकते अटैचमेंट
सेहरा सीएससी के अंतर्गत उपस्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ एमपीडब्ल्यू बलदेव बर्डे की आधी से ज्यादा नौकरी भीमपुर स्वास्थ्य केन्द्र में अधिकारियों की तरह रौब झाड़ते हुए बीत गई है। एमपीडब्ल्यू श्री बर्डे के तेवर देखकर लगने लगा है कि करीब 12 साल की नौकरी भी भीमपुर स्वास्थ्य केन्द्र में करने के बाद वह यहीं से सेवानिवृत्त होगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार एमपीडब्ल्यू बर्डे भीमपुर सीएचसी के अंतर्गत सोनाझार(सिमोरी)उपस्वास्थ्य केन्द्र में मूल रूप से पदस्थ रहते हुए बलदेव बर्डे ने भीमपुर में अटैचमेंट पर लम्बी अवधि बीता दी। दो वर्ष पहले सेहरा ट्रांसफर होने के बाद इस फिल्ड वर्कर ने अपना टिकड़म जमाकर फिर अपना अटैचमेंट भीमपुर में करवा लिया। सेहरा ट्रांसफर के बाद एमपीडब्ल्यू ने फिर भीमपुर में वापसी कर ली और इस तरह करीब 14 वर्ष से एमपीडब्ल्यू बर्डे भीमपुर में ही पदस्थ है।
सप्ताह में एक दिन नौकरी, बाकी दिन घर में चाकरी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एमपीडब्ल्यू के अपने ठाठ है, सप्ताह में वह मात्र एक दिन के लिए नौकरी करने भीमपुर पहुंचते है बाकी दिन अपने खेड़ी एवं बैतूल के आवास की चाकरी में बीत रहे है। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री बर्डे के पास वर्तमान प्रभारी मलेरिया अधिकारी भी चार्ज है। बावजूद इसके मैदानी स्तर पर लार्वा सर्वे, मलेरिया-डेंगू के प्रति जागरुकता में भीमपुर फिसड्डी रहा है। भीमपुर के विभिन्न ग्रामों में डेंगू के प्रकोप का परिणाम भी बीते दिनों सामने आया था। बावजूद इसके एक लापरवाह फिल्ड वर्कर पर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की कृपा बरस रही है।

इनका कहना…
मुझे ज्वाईन किए ज्यादा वक्त नहीं हुआ है, मैं पता करता हूं। उसके बाद ही कुछ कह पाउंगा।
डॉ दीपक निंगवाल, बीएमओ, भीमपुर
सीएचसी के कर्मचारियों के कहीं और अटैच होने की जानकारी के आधार पर उनकी मूल पदस्थापना पर वापसी के लिए बीच-बीच में पत्राचार किया गया। अटैचमेंट निरस्त करने या न करने का पावर सीएमएचओ के पास है।
डॉ संगम मांडवे, बीएमओ सेहरा