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गाय को कुत्ते ने काटा पर गौपालक सहित परिवार के सात लोगों ने लगवाये रेबीज के टीके..!

✓गाय को कुत्ते ने काटा पर गौपालक सहित परिवार के सात लोगों ने  लगवाये रेबीज के टीके
✓बीमार गाय के दुध से बनी चाय पीने से परिवार में दहशत
गौरी बालापुरे पदम/अजब-गजब परिधि

बैतूल जिले के दभेरी गांव में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक गाय को कुत्ते ने काट लिया जिसकी जानकारी परिवार को नहीं है, लेकिन जब गाय के व्यवहार में उग्रता देखी तो गौ पालक चिंतित हो गए और उन्होंने गाय का उपचार कराना शुरु किया। गौ पालक को पशु चिकित्सकों ने गाय के व्यवहार में आए बदलाव का कारण कुत्ते का काटना बताया है। इसके बाद से पूरा परिवार आशंकाओं से घिर गया है। गौ पालक सहित परिवार के सात सदस्यों ने बीते दिनों गाय के दूध से बनी चाय पी थी। किसी तरह की अनहोनी की आशंका से परेशान गौ पालक एवं उनके परिवार के सदस्य आज जिला अस्पताल पहुंचे और यहां सभी ने रेबीज के टीके लगवाएं। इस पूरे परिवार को दूसरा टीका 13 मार्च के बाद लगाया जाएगा।
यह है पूरा मामला
दभेरी निवासी बेनी प्रसाद की गाय को करीब एक-डेढ़ महीने कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद गाय के व्यवहार में परिवर्तन हो गया। वह परिवार के लोगों को मारने लगी थी, बेनीप्रसाद का कहना है कि करीब 12 वर्ष से गाय उनके साथ रह रही है, कभी उसने किसी को नहीं मारा। जब गाय के व्यवहार में बदलाव देखा तो उन्होंने गांव में डेयरी वाले डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बताया कि गाय को कुत्ते ने काटा है इसलिए वह मानसिक बीमार हो गई है। इधर आठ दिन पहले बेनीप्रसाद के बेटी दामाद, नाति, नातिन, पत्नी सहित सात लोगों ने गाय के दूध से बनी चाय पी थी। गाय को कुत्ते ने काटा यह जानकर परिवार दहशत में आ गया। हालांकि डॉक्टर ने उन्हें बताया भी कि दूध को उबालने के बाद उसके सारे कीटाणु-विषाणु खत्म हो जाते है, लेकिन फिर भी आशंकित परिवार आज जिला चिकित्सालय पहुंचा। यहां बेनीप्रसाद, उनकी पत्नी, बेटी हेमलता, पुष्पलता, दामाद दिनेश लोखंडे, नातिन हिमानी, नाति भुवन ने रेबीज के टीके लगाए। पूरे परिवार को रेबीज टीकाकरण के लिए अस्पताल से कार्ड दिया गया है। सभी को 13 मार्च के बाद दूसरा टीका लगाया जाएगा।
बीमार है गाय
बेनीप्रसाद ने बताया कि उनकी गाय बीमार है। अभी भी वह उग्र व्यवहार कर रही है। मानसिक बीमार होने की वजह से उसकी हालत लगातार गंभीर हो रही है। उन्होंने बताया कि उनकी इस गाय की चार साल की बछिया भी है एहतियात के तौर पर वे बछिया का भी उपचार कराएंगे। बहरहाल रेबीज का पहला टीका लगाने के बाद पूरे परिवार ने राहत की सांस ली है।
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