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इंटरनेशनल मंच पर बिखरे मध्यप्रदेश की आदिवासी संस्कृति के रंग

✓इंटरनेशनल मंच पर बिखरे मध्यप्रदेश की आदिवासी संस्कृति के रंग

✓साउथ एशियन फ्रेटरनिटी कॉन्फ्रेंस में शानदार प्रस्तुति 

परिधि न्यूज बैतूल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की आदिवासी और लोकसंस्कृति ने एक बार फिर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई। साउथ एशियन फ्रेटरनिटी मध्यप्रदेश की कॉर्डिनेटर गौरी बालापुरे पदम के नेतृत्व में 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उड़ीसा प्रांत के गोपालपुर में आयोजित 35वें साउथ एशियन फ्रेटरनिटी कॉन्फ्रेंस में सहभागिता की। समुद्र के किनारे आयोजित तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देशभर से 130 से अधिक डेलीगेट्स शामिल हुए।
दक्षिण एशियाई बिरादरी साउथ एशियन फ्रेटरनिटी की स्थापना वर्ष 1990 में लाजपत भवन, लाजपत नगर नई दिल्ली में की गई थी। इसका उद्देश्य भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांगलादेश, मालदीव, श्रीलंका, म्यानमार (बर्मा), भूटान और नेपाल के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में 12 से 14 दिसंबर तक गोपालपुर में 35वां सम्मेलन आयोजित हुआ।


मध्यप्रदेश की डेलीगेट्स टीम का नेतृत्व श्रीमती गौरी बालापुरे पदम ने किया। टीम में प्राची कमाविसदार, उषा देशमुख, गीतु मवासे, मयंक मौसिक, रीता गुजरे, सियांशी गुजरे और पूर्वांशी गुजरे शामिल रहे, जिन्होंने पीस कॉन्फ्रेंस में सक्रिय सहभागिता की।
साउथ एशियन फ्रेटरनिटी के संस्थापकों में स्वर्गीय कृष्णकांत पूर्व उपराष्ट्रपति, स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपाई, स्वर्गीय इंद्रकुमार गुजराल, स्वर्गीय डॉ. एस. एन. सुब्बाराव भाई जी डायरेक्टर नेशनल यूथ प्रोजेक्ट और स्वर्गीय सत्यपाल ग्रोवर पूर्व संस्थापक महासचिव शामिल रहे हैं। वर्तमान में दीपक मालवीय अध्यक्ष, चित्रा सुकुमारन उपाध्यक्ष और रवि मोहन्ती सचिव के मार्गदर्शन में संगठन गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
देशभर की सहभागिता


35वें सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, पंजाब, पांडिचेरी, तेलंगाना, त्रिपुरा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से प्रतिनिधि शामिल हुए।


कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसेवक मंडल के राष्ट्रीय सभापति राजकुमार चोपड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। 14 दिसंबर को समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप पाणीग्रही लोकसभा सदस्य भारत सरकार, श्रीमती गीतांजली दास वाइस चांसलर ब्रह्मपुर यूनिवर्सिटी, दीपक मालवीय चेयरमेन साउथ एशियन फ्रेटरनिटी, राजेंद्र जेना राष्ट्रीय सचिव लोकसेवक मंडल और प्रोफेसर पी. रवि कुमार की उपस्थिति में प्रतिभागियों को स्मृतिचिन्ह और सम्मान पत्र प्रदान किए गए।पीस कॉन्फ्रेंस में हमारे जीवन में नैतिक मूल्यों की भूमिका, दक्षिण एशियाई देशों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं, आतंकवाद और उग्रवाद से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे, युद्धग्रस्त विश्व का दक्षिण एशिया में लोकतंत्र पर प्रभाव और विश्व परिदृश्य में भारत की भूमिका जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आपसी सांस्कृतिक आदान प्रदान किया गया।
– लोकनृत्य में झलकी आदिवासी पहचान

 

मध्यप्रदेश की टीम ने गोंडी, कोरकू और निमाड़ी वेशभूषा में लोकनृत्य प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। टीम लीडर एवं मध्यप्रदेश की संयोजक श्रीमती गौरी बालापुरे पदम ने बताया कि मध्यप्रदेश में 46 जनजातियां और 90 से अधिक उप जनजातियां पाई जाती हैं। वे वर्ष 2002 से साउथ एशियन फ्रेटरनिटी की सदस्य हैं और एक वर्ष पूर्व उन्हें मध्यप्रदेश संयोजक का दायित्व सौंपा गया है।

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