सफर-संघर्ष शून्य से शिखर तक…
सफर-संघर्ष शून्य से शिखर तक…
जिसने साधा वह साधक है ।।
जो साधक है वहीं सफल है ।।
✍🏼सीए सुनील हिरानी,बैतूल

शब्द परिधि बैतूल…
बात व्यापार व्यवसाय के शिखर की हो या आध्यात्मिक ऊंचाइयों की यही सूत्र है मेरे गुरुदेव पूज्य श्री दीपक शर्मा जी का ।। एक गुरु की भूमिका में जीवन का ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां मुझे उनका मार्गदर्शन न मिला हो , जीवन की यात्रा के हर पायदान पर उनकी ऊंगली पकड़कर ही हम ऊपर चढ़े हैं , तथा सफलता का हर सोपान हमने उनके मार्गदर्शन एवं शिक्षाओं से ही पूर्ण किया है , तथा हमारी प्रत्येक असफलता को उन्होंने हमारे नए लक्ष्य निर्धारण में उत्प्रेरक बनाकर हमारा उत्साह बढ़ाया है ।। तपस्या , अथक परिश्रम , निष्ठा , ईमानदारी , व्यावहारिकता , अत्यंत पैना व सूक्ष्म अवलोकन , दूरदृष्टी , लक्ष्य निर्धारण , धैर्य के साथ सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता , पूंजी का उचित प्रयोग , आदि आदि प्रबंधन के ऐसे मूल्य हैं जो हमने सहज ही उनसे सीखे हैं ।। आपका पूरा जीवन हम सबके लिए एक प्रेरणास्पद एवं पथप्रदर्शक है फिर वो व्यापार व्यवसाय का क्षेत्र हो या आध्यात्मपथ एवं धर्म मार्ग।।
“कर्म प्रधान विश्व करी राखा
जो जस करै , सो तस फल चाखा “एक 9 वर्षीय तीसरी कक्षा का अबोध बालक जिसने 60 के दशक में चने बेचकर अपनी स्कूल फीस भरी तथा व्यापार का जिसका ये पहला अनुभव हो आज यदि हल्दीराम जैसे ब्रांड का चार जिलों का सुपरस्टाकिस्ट का तमगा हासिल करता है तथा 15-16 वर्ष की उम्र में ईश्वर क्या है इस जिज्ञासा के पीछे उसे पाने की ललक व लगन से अंततः उसे पा लेना तथा एक नीम के पेड़ की पूजा स्थली को एक सिद्धपीठ के रूप में बीजासनी माता मंदिर के रूप में प्रतिस्थापित कर बैतूल जिले को सनातन की धर्म ध्वजा देने की कहानी वास्तव में रामचरित मानस के इसी दोहे को चरितार्थ करने की वास्तविक गाथा है जिसके हम आंशिक ही सही लेकिन प्रत्यक्षदर्शी हैं , जिसका हमें गर्व भी है अभिमान भी क्योंकि इस कहानी का नायक कोई और नहीं हमारे गुरुदेव पूज्य दीपक शर्मा जी हैं ।।
इस पूरे कथानक का एक बहुत महत्वपूर्ण पात्र और भी है जिसका नाम है अभिषेक शर्मा जिसे पूरा बैतूल जिला मोंटू शर्मा के नाम से जानता है जिसके व्यापार कौशल का पहला परिचय उनके पिता को तब हुआ जब उसने अपना पहला iphone अपने खुद की कमाई से 15 वर्ष की उम्र में खरीदा अपने खुदके व्यापार कौशल से , वास्तव में उसकी कार्यक्षमता ने ही पिता के बड़े व्यापारिक लक्ष्यों को निर्धारित करने पर मजबूर किया क्योंकि अपने सामाजिक व्यापारिक आदि क्रियाकलापों के कारण लोग यह कहते अक्सर सुने जाते हैं कि ” अच्छा मोंटू भैया का कार्यक्रम है क्या तो भैया बहुत बड़ा तथा भव्य कार्यक्रम होगा , उसकी बराबरी नहीं कर सकते ” हल्दीराम का चार जिलों के सुपर स्टाकिस्ट का कार्य वास्तव में अभिषेक मोंटू शर्मा की विगत 15 वर्षों से भी अधिक समय की निरंतर कड़ी मेहनत तथा सफलता की जिद का प्रतिफल है ।। आदरणीय दीपक भैया , मोंटू एवं पूरे परिवार को समस्त बीजासनी मंदिर परिवार की ओर से कोटिशः बधाई एवं शुभकामनाएं।।

