PARIDHI GOSSIP:पास में ही तो है…!

पास में ही तो है…!
तू पास नहीं है तो क्या हुआ पास ही तो है.. यह बात बड़ी सीधी सी है लेकिन इसके अर्थ बड़े गहरे है। 11 महीने पहले ऐसा ही कुछ अपने बैतूल के पड़ोस में हुआ जब वहां एक साहब की बात-बात पर बात बिगड़ने लगी तो एक माननीय ने अपने उन करीबी साहब को यह कहकर बैतूल भेज दिया कि कौनसा दूर है बैतूल..अरे पास में ही तो है। बात-बात पर बात भी सीधी सी लाइन नहीं है पहली बात साहब घोर तिकड़मबाज,दूसरी बात साहब के आचरण खराब और तीसरी बात साहब की माननीय से यारी। इतनी खूबियों वाले साहब को बैतूल जैसा सीधा सादा जिला मिला भी तो गिफ्ट के तौर पर ही है।हुआ यू कि साहब ने माननीय के दूसरे करीबी का जब बड़ा भुगतान रोक दिया तो माननीय ऐंठ गए।जैसे तैसे याराना बच भी जाता लेकिन जिनका भुगतान रोका वह माननीय की अर्धांगिनी के मुंहबोले भाई निकले। अब क्या था कुर्बानी तो देनी ही थी सो माननीय ने याराना निभाने के लिए साहब को बैतूल की गद्दी दे दी और पत्नी को भी मना लिया। दूर जाने से अनमने साहब ने विदाई से पहले जब माननीय से मुलाकात की तो माननीय ने गले लगाकर कहा अरे तू पास नहीं है तो क्या हुआ पास में ही तो है।जब दिल चाहे आ जाना। दादा झूठ न बुलाए साहब बैतूल के माननीय से भले ही नमस्कार चमत्कार न करते हो लेकिन पास वाले माननीय से बराबर व्यवहार निभा रहे है। सुना है साहब कुछ दिनों पहले ही पास वाले माननीय से मिलकर आए है कि बैतूल तो 11 महीने में ही पूरा सेट कर लिया।अब इसका ईनाम अतिरिक्त प्रभार देकर अपने पास बुलाकर दे दो मित्र। आत्मविश्वासी साहब को लेकर चटकारा लग रहा है कि वह तो दोनों जिले की गद्दी संभालने और नगदी नापने का दम रखते है। अपने AC चैंबर,AC कार के लिए मशहूर साहब को पड़ोसियों से लगाव भारी पड़ सकता है। इन साहब का एक और पैटर्न है,,जब इनके आचरण,आवरण और कदाचरण के किस्से उजागर होने लगते है तो,जहां होते है वहां एक ढाल पहले से ढूंढ लेते है,,ताकि जैसे ही कोई आक्रमण हो साहब ढाल को सामने कर देते है। संभवतः साहब 11 महीनों में बैतूल से वाकिफ नहीं हो पाए है। यहां ढाल कई बार बचाव करने की बजाय खुद ही आघात दे जाती है।साहब ये बैतूल है लोग भोले भाले जरूर है,,बोलते कुछ नहीं पर समझते सब है,और पानी जब सर से ऊपर आ जाए तो झटक भी देते है।