जिले में मायने नहीं रखते प्रभारी मंत्री के निर्देश
✓क्या जिले में मायने नहीं रखते प्रभारी मंत्री के निर्देश…?
✓सहायक आयुक्त के नाम पर वसूली मामले में जांच हुई ना दोषी मिले
परिधि न्यूज बैतूल

जब बागड़ ही खेत खाने लगे तो रखवाली कौन करे, यह सवाल जिले के जनजातीय कार्य विभाग के सामने बार-बार आता रहा है। विभाग के कर्ता-धर्ता की कार्यप्रणाली पर पहले भी उंगलियां उठती रही है। जिसकी शिकायत कलेक्टर से लेकर प्रभारी मंत्री तक को की गई लेकिन चार महीनें बीत गए, अब तक जांच का कुछ पता नहीं है। जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त विवेक पाण्डेय के नाम पर जिले के छात्रावासों में हुई अवैध वसूली पर बैतूल के मीडियाकर्मियों ने प्रभारी मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल से जांच की मांग की थी और प्रभारी मंत्री श्री पटेल ने इस मामले में स्पष्ट तौर पर कहा था कि जांच भी होगी और कार्रवाई भी। पिछले चार महीनों में प्रभारी मंत्री के तीन चक्कर बैतूल के लग गए है लेकिन जांच अभी भी ठंडे बस्ते में है। यहां तक कि जिले में कलेक्टर बदल गए, जांच कौन कर रहा है, क्या कोई कमेटी बनाई गई? इस पूरे मामले में अभी तक शासन की तरफ से न तो कोई जांच रिपोर्ट सामने आई और न ही दोषियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई।
अधीक्षकों ने ही की थी सहायक आयुक्त के लिए अधीक्षकों से वसूली
गौरतलब है कि भैंसदेही विकासखंड के दो छात्रावास अधीक्षकों को सहायक आयुक्त विवेक पाण्डेय द्वारा अधीक्षक पद से हटाने के बाद उसी छात्रावास में रहने के लिए मोटी रकम लेने के आरोप लगाए गए थे। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत जिले में 134 आश्रम एवं छात्रावास संचालित है। जिनमें 50, 100, 400, 500 सीटर छात्रावास भी शामिल है। छात्रावास में प्रत्येक छात्र के लिए 1300 रुपए शासन द्वारा दिया प्रतिमाह दिया जाता है, जिसमें 10 प्रतिशत शिष्यवृत्ति भी शामिल है। शेष राशि अधीक्षक को छात्र के लिए भोजन, साबुन, सोडा, मंजन, दवा आदि पर व्यय करना होता है। सीट के लिहाज से देखे तो 50 सीटर छात्रावास में प्रतिमाह 65000 रुपए प्रतिमाह एक अधीक्षक को आबंटित होता है। उक्त राशि में सहायक आयुक्त की भी 5 हजार रुपए हिस्सेदारी होती है। यदि 134 छात्रावासों का हिसाब लगाया जाए तो आयुक्त के नाम पर हर माह 7 से 10 लाख रुपए की वसूली हो रही है। अधीक्षकों द्वारा प्रतिवर्ष करीब 80 लाख रुपए चंदा सहायक आयुक्त के लिए किया जाता है। सहायक आयुक्त पर यह आरोप लगाए गए थे कि जो अधीक्षक राशि देने से मना करते है उनके छात्रावास का निरीक्षण कराया जाता है और कमिया निकालकर छात्रावास अधीक्षक को हटा दिया जाता है, निकाले गए अधीक्षक के बदले दूसरे अधीक्षक को नियुक्त करने के लिए बड़ी चढ़ोत्तरी चढ़ाई जाती है। गौरतलब है कि छात्रावास अधीक्षकों से अधीक्षकों द्वारा ही सहायक आयुक्त के लिए वसूली करने की जानकारी मीडिया के माध्यम से उजागर हुई थी। जिसकी शिकायत भी प्रभारी मंत्री से की गई थी।
प्रभारी मंत्री ने कहा था जांच भी होगी और कार्रवाई भी
8 जनवरी 2026 में प्रभारी मंत्री के बैतूल प्रवास के दौरान की गई शिकायत में जनजातीय कार्य विभाग में चल रहे अवैध वसूली के इस खेल की शिकायत मीडिया ने की थी, प्रतिमाह 5 हजार की वसूली सहायक आयुक्त के नाम पर किए जाने की जानकारी से श्री पटेल भी हतप्रभ रह गए थे। शिकायत के बाद प्रभारी मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने जिला प्रशासन को जांच के निर्देश दिए गए थे, हैरत की बात यह है कि चार महीने बीत गए लेकिन अब तक न जांच कमेटी सामने आई न ही जांच में कोई दोषी ही मिल पाया है।