गैर जिम्मेदार शिक्षा विभाग, खिलाडिय़ों की सुरक्षा ताक पर..!
राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में शामिल होने बिना जिम्मेदार रवाना हुए वुशु और कराते खिलाड़ी

✓गैर जिम्मेदार शिक्षा विभाग, खिलाडिय़ों की सुरक्षा ताक पर
✓राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में शामिल होने बिना जिम्मेदार रवाना हुए वुशु और कराते खिलाड़ी
✓जिन्हें दी थी जिम्मेदारी वह पहले ही नर्मदापुरम पहुंच गए, आरपीएफ ने करवाया सुरक्षित सफर
परिधि पड़ताल बैतूल

खिलाड़ी यदि मैडल जीतकर आता है विभाग अपनी पीठ थपथपाने लगता है, लेकिन जब बात इन खिलाडिय़ों को नियमानुसार सुरक्षा और सुविधाएं देने की बात आती है तो जिम्मेदार आंख मंूद लेते है। कुछ ऐसा ही नजारा 13 अक्टूबर को रेलवे स्टेशन बैतूल में देखने मिला, जहां वुशू एवं कराते के करीब 25 खिलाड़ी जिम्मेदार अधिकारी की रास्ता देखते रहे, लेकिन मौके पर शिक्षा विभाग से कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा और खिलाड़ी अकेले ही राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सहभागिता के लिए बैतूल से नर्मदापुरम के लिए रवाना हुए। जानकारी के अनुसार इन खिलाडिय़ों नर्मदापुरम संभाग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के मुताबिक संबंधित स्कूल की थी, लेकिन स्कूलों से भी कोई कोच या शिक्षक खिलाडिय़ों के साथ नहीं था।

खिलाड़ी आखिर किसकी जिम्मेदारी?

राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के बैतूल जिले से क्रिकेट में 6, बास्केटबाल में 10, कराते-7, वुशू में 17 खिलाडिय़ों का चयन किया गया था। इन खिलाडिय़ों को ग्वालियर में आयोजित प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए संभाग मुख्यालय तक पहुंचाया जाना था।शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की माने तो बच्चों को संभाग तक छोडऩे की जिम्मेदारी संबंधित खिलाड़ी के स्कूल की थी, हालांकि विभाग द्वारा 10 अक्टूबर प्राचार्य एवं प्रधान पाठक के नाम से जारी पत्र में 14 से 18 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होने वाले खिलाडिय़ों के लिए ऑफिशियल मैनेजर एवं कोच की ड्यूटी लगाई गई थी। कराते एवं वुशू के खिलाडिय़ों के लिए ऑफिशियल जनरल मैनेजर के तौर पर शिक्षक दशरथ गावंडे की ड्यूटी लगाई गई थी। वुशू के खिलाडिय़ों के लिए कोच रानू मालवीय को बच्चों को नर्मदापुरम ले जाने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन कराते खिलाडिय़ों के लिए किसी भी कोच की ड्यूटी नहीं लगाई गई। जानकारी के अनुसार वुशू कोच रानू को श्री गावंडे ने पातालकोट एक्सप्रेस के समय पर बच्चों को स्टेशन बुलवाने के लिए कहा और स्वयं भी स्टेशन पहुंचने के लिए आश्वस्त किया, लेकिन एन टाईम पर श्री गावंडे स्टेशन ही नहीं पहुंचे। इस दौरान पातालकोट एक्सप्रेस छूट गई। इस दौरान अभिभावक ने जब जनरल मैनेजर दशरथ गावंडे से सम्पर्क किया तो उन्होंने नर्मदापुरम में होने तथा बच्चों को नर्मदापुरम लाने की जिम्मेदारी उनकी न होने की जानकारी दी। इस उहापोह के बीच खिलाड़ी परेशान होते रहे।
आरपीएफ बनी मददगार

करीब 25 बच्चों का त्योहार के सीजन में जनरल बोगी में यात्रा करना असंभव सा था, ऐसे में अभिभावकों ने आरपीएफ टीआई से खिलाडिय़ों को सुरक्षित नर्मदापुरम तक सफर करवाने का अनुरोध किया, जिसके बाद टीआई राजेश बनकर ने आरपीएफ स्टाफ हेड कांस्टेबल पूरन सल्लाम, ताप्ती घोगरकर एवं फराह खान को निर्देशित किया। आरपीएफ ने खिलाडिय़ों की सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था बनाई। दक्षिण एक्सप्रेस से 25 खिलाडिय़ों को सुरक्षित नर्मदापुरम भिजवाया गया। इस दौरान अभिभावकों एवं आरपीएफ स्टाफ ने ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों से भी सहयोग के लिए राजी किया। नर्मदापुरम पहुंचने के बाद रात 8 बजे संभागीय टीम के साथ सभी खिलाड़ी ग्वालियर के लिए रवाना हुए जो आज 14 अक्टूबर की सुबह करीब 5 बजे ग्वालियर पहुंचे।
इन स्कूलों के बच्चों का हुआ राज्य स्तर के लिए चयन
कराते के लिए जो सात खिलाड़ी राज्य स्तर के लिए चयनित किए गए थे उनमें श्री अग्रसेन स्कूल गंज बैतूल, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बैतूल, आरडी पब्लिक स्कूल बैतूल, संजीवनी स्कूल बैतूल के विद्यार्थी शामिल है। इसी तरह वुशू के लिए संजीवनी स्कूल बैतूल, शाउमावि टिकारी, विद्या संस्कार वैली बैतूल, आरडी पब्लिक स्कूल बैतूल, विद्यात्री पब्लिक स्कूल बैतूल, शास.एमएलबी स्कूल बैतूल, विद्या संस्कार वैली के 17 खिलाडिय़ों का चयन किया गया। शिक्षा विभाग के खेल अधिकारी की माने तो स्कूल प्राचार्यों एवं प्रधान पाठकों को पत्र जारी कर बच्चों को टूर्नामेंट में पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है, तो क्या स्कूलों ने अपने खिलाडिय़ों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया है, यह सवाल गंभीर भी है और विचारणीय भी।
हर बार खिलाड़ी होते है परेशान

अभिभावकों ने बताया कि स्कूल टूर्नामेंट के दोरान हर बार खिलाड़ी परेशान होते है। जिले से राज्य स्तर पर शिक्षा विभाग का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे खिलाडिय़ों के लिए विभाग सुरक्षित यात्रा तक का प्रबंध नहीं कर पाता है। जबकि हर स्कूल में खेल शुल्क लिया जाता है। जो खिलाडिय़ों की खेल सुविधाओं के लिए ही खर्च होना चाहिए। विभाग यदि चाहता तो स्कूलों से समन्वय स्थापित कर बच्चों को नर्मदापुरम तक पहुंचाने की व्यवस्था बना सकता था, लेकिन स्कूलों पर जिम्मेदारी डालकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कर्तव्य की इतिश्री कर ली, इधर स्कूलों के जिम्मेदार शिक्षा विभाग के खेल अधिकारी के भरोसे पर रहे। अभिभावकों ने कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी एवं जिला शिक्षा अधिकारी से खिलाडिय़ों को हर बार होने वाली शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा देने वाली व्यवस्था में सुधार की मांग की है, साथ ही अनुरोध किया है कि टूर्नामेंट खेलकर वापस नर्मदापुरम आने के बाद इन बच्चों को बैतूल तक सुरक्षित लाने की व्यवस्था के लिए सख्त निर्देश दिए जाए।
इनका कहना…
व्यवस्था बनाई होगी, मैं दिखवाता हूं।
अनिल कुशवाह,जिला शिक्षा अधिकारी, बैतूल
बच्चों को संभाग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल की है, इस संबंध में शिक्षा विभाग से पत्र जारी किया गया है।
धमेन्द्र पंवार, खेल अधिकारी जिला शिक्षा
मैं नर्मदापुरम में हूं, आगे की कार्रवाई करने के लिए पहले आना पड़ता है, बच्चों को स्कूल द्वारा नर्मदापुरम तक छोड़ा जाना था, यह मेरी जिम्मेदारी नहीं है।
दशरथ गावंडे, जनरल मैनेजर वुशू एवं कराते राज्य स्तरीय टूर्नामेंट
पातालकोट एक्सपे्रस के समय पर बच्चों को एकत्रित करने का कहा गया था, गावंडे जी ने स्टेशन पर ही मिलने के लिए कहा था, वे पहुंचे हीं नहीं। पत्र में मेरे नाम के साथ जनरल मैनेजर के तौर पर गावंडे सर का नाम लिखा है, स्टेशन पहुंचकर पता चला वह नहीं आ रहे।
रानू मालवीय, कोच वूशू